वर्षों की आध्यात्मिक व सांस्कृतिक विरासत है श्रीराम मंदिर: सीएम 

वर्षों की आध्यात्मिक व सांस्कृतिक विरासत है श्रीराम मंदिर: सीएम 

बोले-महाकुंभ की दिव्यता से हिंदू समाज में भेदभाव देखने वालों की खुली रह गई आंखें

मेहंदीगंज में पीएम के जनसभा स्थल पर परखी तैयारी, संसदीय कार्यालय में की जनसुनवाई

वाराणसी (रणभेरी सं.)। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहाकि सात सौ वर्षों का आध्यात्मिक व सांस्कृतिक विरासत की परंपरा को नवीनीकरण के रूप में आज काशी में जोड़ने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। इस संपूर्ण कार्यक्रम के प्रणेता जगतगुरु रामानंदाचार्य स्वामी राम कमलाचार्य का हृदय से अभिनंदन करते हैं कि उन्होंने अपने गुरु विरासत का एक नया स्वरूप एक भव्य श्रीराम मंदिर के रूप में हम सबको जोड़ने का सौभाग्य प्रदान किया है। वे आज सायं में श्री रामानंद विश्व हितकारिणी परिषद द्वारा आयोजित काश्मीरी गंज गुरुधाम में प्राचीन श्री राममंदिर का शिलान्यास करने के बाद अपने विचार में व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह अवसर सबके पास नहीं आता है। हम सब भारतवासी व हमारी पीढ़ी अत्यंत सौभाग्यशाली है जो हमारी समृद्ध विरासत को अपने आंखों के सामने मूर्त रूप मे साकार होते देख रही है। अयोध्या में लगभग 500 वर्षों से राम जन्मभूमि आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संतों का सानिध्य व उसके आत्मा अशोक सिंघल पूज्य गुरुदेव रामचंद्र दास नृत्य गोपाल दास सतुआ बाबा इस अभियान के साथ जुड़े और कहते थे की सफलता मिलेगी और आज काशीवासी इस संकल्प को देश का राष्ट्र मंदिर के रूप में देख रहा है। सनातन धर्म का परिणाम है कि महाकुंभके रूप में आज 64 करोड़ लोग एक स्थान पर आ गए। यहां न कोई जात पात भेदभाव सनातन धर्म ही इसकी पहचान बनी। उन्होंने कहा कि काशी में इस प्राचीन श्रीराम मंदिर में रामानंदाचार्य के प्रथम शिष्य अनंताचार्य नरहरिदास तुलसीदास पूज्य बाबा कीनाराम विवेकानंद माता आनन्दमयी सुभाष चंद्र बोस जैसे लोगों का जुड़ाव रहा है।

सीएम योगी ने कहा कि काशी के कंकड़-कंकड़ में शंकर का वास है मां गंगा व विश्वनाथ की कृपा से अपने जीवन को धन्य करना चाहिए। अध्यक्षता कर रहे श्रीमद् जगतगुरु रामानंदाचार्य स्वामी राम कमलाचार्य वेदांती जी महाराज ने कहा कि 1358 संवत में रामानंदाचार्य के प्रथम शिष्य अनंताचार्य द्वारा यह मंदिर स्थापित है। यह काशी के केदार खंड में है। आक्रांताओं द्वारा इसको ध्वस्त भी किया गया। फिर कश्मीर के संतों ने आकर इसका जीर्णोद्धार कराया। आज राम मंदिर का स्वरूप बदल रहा है। उन्होंने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का नेतृत्व और पूज्य संतों का सानिध्य था। अशोक सिंघल राम मंदिर आंदोलन की आत्मा थे। लोग लेकिन अशोक सिंघल कहते कौन सा कार्य ऐसा है, जो असंभव है। - पूज्य संतों से बात होती तो वे राम मंदिर को अपने जीवन का संकल्प बताते। कहते हम लोग सफल होंगे। हमारे गुरुदेव और दादा गुरु परमहंस रामचंद्र महाराज, नृत्य गोपाल दास महाराज, सतुआ बाबा ये सभी संतगण इस आंदोलन से जुड़े थे। मुलाकात होने पर उनसे पूछता कि महाराज जी क्या होगा, तो कहते-सफलता मिलेगी। हम कहते, आपकी उम्र तो ढल चुकी है, तो कहते फिर जन्म लेंगे, लेकिन अयोध्या में राम मंदिर बना कर रहेंगे। एक ही संकल्प रहा, राम मंदिर के माध्यम से राष्ट्र मंदिर को भव्य स्वरूप देना और अंतत: पीएम मोदी के नेतृत्व में सब कार्य हो रहा है। आपने इस बार प्रयागराज महाकुंभ की दिव्यता देखी। इसमें 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालु एक जगह आए। पूरा विश्व आश्चर्य कर रहा था।

अविस्मरणीय, अकल्पनीय दृश्य सबके सामने था। जो लोग कहते थे कि हिंदू समाज में भेदभाव है, उनकी आंखें खुली की खुली रह गईं। एक ही संगम में कोई जाति नहीं, कोई मत नहीं, संप्रदाय नहीं, महिला-पुरुष का भेद नहीं। यही तो सनातन धर्म की सच्ची पहचान है। महाकुंभ ने वह पहचान फिर से दे दी। भव्य राष्ट्र मंदिर का यही स्वरूप है, जो हमने महाकुंभ के समय देखा। इससे पहले योगी आदित्यनाथ ने श्री राम मंदिर में राम दरबार का दर्शन-पूजन किया। इसके बाद शिलान्यास का पूजन किया। पूजन आचार्य कृष्ण कुमार दीक्षित व गोपाल शरण पांडेय ने करायी। इसके बाद गौशाला में गायों को गोचर दिया। इस अवसर पर आयुष मंत्री दयाशंकर मिश्र - दयालु, गुरु संतोषाचार्य, विहिप नेता अशोक तिवारी, स्वामी जितेंद्र आनंद, नीलकंठ तिवारी, सौरभ श्रीवास्तव, हंसराज विश्वकर्मा, सुशील सिंह, पूनम मौर्या व पंडित रामभरत शास्त्री सहित अनेक लोग उपस्थित थे।

प्राचीन श्रीराम मंदिर रामचरित मानस का केंद्र

मुख्यमंत्री ने प्राचीन श्रीराम मंदिर के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख किया। कहा कि संवत् 1398 में जगद्?गुरु रामनंदाचार्य के प्रथम शिष्य अनंताचार्य महाराज ने जीर्णोद्धार के साथ इसे स्थापित किया। विदेशी आक्रांताओं ने यदि इस मंदिर को छेड़ा तो इसका कुछ अर्थ तो अवश्य रहा होगा। 

जगद्गुरु अनंताचार्य के शिष्य नरहरिदास के शिष्य तुलसीदास ने वेद-वेदांत के अध्ययन के लिए पांच साल यहीं व्यतीत किए। तुलसीदास की रामचरित मानस के सुंदर कांड का पाठ घर-घर में होता है। उस बीज का रोपण यहीं पर हुआ। इस तरह रामचरित मानस का केंद्र बिंदु प्राचीन श्रीराम मंदिर है। इस मंदिर को अनेक ज्ञानियों, तपस्वियों, त्यागियों ने कर्मसाधना की भूमि के रूप चुना।

फुल अलर्ट रहें, तैयारियां हो फुलप्रूफ

 प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को सर्किट हाउस में पीएम विजिट की तैयारियों के रोडमैप पर अफसरों को जरूरी दिशा- निर्देश दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री के काशी आगमन को देखते हुए फुल अलर्ट होकर सभी तैयारियां कराने का निर्देश दिया। उन्होंने सभास्थल पर वाहनों की पार्किंग की समुचित व्यवस्था करने, साफ- सफाई के लिए सफाईकर्मियों की ड्यूटी लगाने, मोबाइल टॉयलेट, पीने के पानी, लंच पैकेट्स का प्रबंध करने का निर्देश दिया। सीएम ने अफसरों को पीएम विजिट को देखते हुए यातायात प्रबंधन भी करने और इसके लिए जरूरी ट्रैफिक डायवर्जन, बैरिकेडिंग व अन्य इंतजाम कराने का निर्देश दिया। सीएम ने प्रधानमंत्री के कार्यक्रम को देखते हुए सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय बनाकर कार्य करने का निर्देश दिया। मंडलायुक्त कौशल राज शर्मा ने पीएम विजिट की तैयारियों को लेकर प्रेजेंटेशन दिया जबकि पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जानकारी दी। इस दौरान जनप्रतिनिधि, भाजपा के पदाधिकारी, पुलिस, प्रशासन व अन्य विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

काशी कोतवाल व विश्वनाथ मंदिर में लगायी हाजिरी

वाराणसी (रणभेरी सं.)।  काशी दौरे पर आए सीएम योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को सायंकाल काशी कोतवाल बाबा कालभैरव मंदिर व श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन- पूजन किया। सीएम ने दोनों मंदिरों में विधि विधान से पूजन अर्चन किया। सीएम को मंदिर में देखते ही श्रद्धालुओं ने हर हर महादेव व जय श्री राम के जोरदार उद्घोष कर उनका स्वागत किया। सीएम ने हाथ जोड़कर व हाथ हिलाकर लोगों का अभिवादन किया

प्रधानमंत्री के संसदीय कार्यालय में सुनी समस्या

सीएम योगी ने गुरुवार को शाम जवाहर नगर स्थित प्रधानमंत्री के संसदीय जनसंपर्क कार्यालय में लोगों की समस्या सुनी। उन्होंने फरियादियों से प्रार्थना- पत्र लेकर उनकी समस्याओं के शीघ्र समाधान का भरोसा दिलाया। इस दौरान जनप्रतिनिधि व अधिकारी उपस्थित रहे।