(रणभेरी): Siddaramaiah ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्होंने अपना त्यागपत्र राजभवन में जमा करा दिया है। उन्होंने बताया कि उस समय राज्यपाल शहर में मौजूद नहीं थे, इसलिए इस्तीफा राज्यपाल के सचिव को सौंपा गया।
प्रेस वार्ता के दौरान सिद्धारमैया ने कहा कि वह पहले भी कई बार स्पष्ट कर चुके थे कि यदि पार्टी नेतृत्व उनसे पद छोड़ने को कहेगा, तो वह बिना किसी हिचक के निर्णय का पालन करेंगे। उनके अनुसार, पार्टी हाईकमान ने उन्हें एक दिन पहले इस्तीफा देने के लिए कहा था, जिसके बाद उन्होंने औपचारिक रूप से अपना पद छोड़ दिया।
उन्होंने भरोसा जताया कि राज्यपाल के बेंगलुरु लौटने के बाद उनका इस्तीफा संवैधानिक प्रक्रिया के तहत स्वीकार कर लिया जाएगा। सिद्धारमैया ने कहा कि उनकी पार्टी के पास विधानसभा में स्पष्ट बहुमत मौजूद है और सरकार को समर्थन देने वाले विधायकों की संख्या पर्याप्त है।
“विधायक एकजुट, सरकार को बहुमत हासिल”
सिद्धारमैया ने दावा किया कि पार्टी के 135 विधायक उनके साथ हैं, जबकि दो अन्य विधायकों का भी समर्थन प्राप्त है। उन्होंने कहा कि सभी विधायक एकजुट हैं और सरकार को किसी प्रकार का खतरा नहीं है।
उन्होंने अपने कार्यकाल को याद करते हुए कहा कि उन्हें दो बार कर्नाटक की जनता की सेवा करने का अवसर मिला। उन्होंने राज्य के करोड़ों लोगों का आभार जताते हुए कहा कि जनता के सहयोग और विश्वास की वजह से ही वह इतने लंबे समय तक सक्रिय राजनीति में बने रहे।
सोनिया, राहुल और खरगे का जताया आभार
पूर्व मुख्यमंत्री ने कांग्रेस नेतृत्व के प्रति भी धन्यवाद व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पार्टी अध्यक्ष Mallikarjun Kharge, वरिष्ठ नेता Sonia Gandhi और Rahul Gandhi ने उन पर भरोसा जताया और उन्हें राज्य का नेतृत्व करने का अवसर दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व ने हमेशा उन्हें सम्मान दिया और संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपीं। सिद्धारमैया ने यह भी कहा कि पार्टी के निर्णय उनके लिए सर्वोपरि हैं और वह आगे भी संगठन के लिए काम करते रहेंगे।
2006 में कांग्रेस में हुए थे शामिल
सिद्धारमैया ने अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने वर्ष 2006 में कांग्रेस का दामन थामा था। इसके बाद पार्टी कार्यकर्ताओं, सांसदों और नेताओं ने उन्हें लगातार समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2013 से 2018 तक और फिर 2023 से अब तक मुख्यमंत्री के रूप में काम करने के दौरान उन्हें प्रशासनिक अधिकारियों, विधायकों और पार्टी कार्यकर्ताओं का भरपूर सहयोग मिला। उन्होंने अपने पूरे कार्यकाल में साथ देने वाले सभी लोगों का आभार व्यक्त किया।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सिद्धारमैया का इस्तीफा राज्य की राजनीति में नए समीकरणों को जन्म दे सकता है। अब सभी की निगाहें कांग्रेस नेतृत्व और अगले मुख्यमंत्री के चयन पर टिकी हुई हैं।
