विभिन्न नेताओं ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। कुछ ने मजदूरी बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया, जबकि कुछ ने हालात पर चिंता जताई।
पुलिस द्वारा रोकने की कोशिश के बाद प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प हो गई। कुछ स्थानों पर पुलिस वाहनों पर पथराव की घटनाएं भी सामने आईं।
पुलिस के अनुसार अब तक 300 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है। उपद्रव फैलाने वालों की पहचान की जा रही है।
(रणभेरी): वेतन वृद्धि की मांग को लेकर औद्योगिक क्षेत्र में फैक्ट्री कर्मचारियों का विरोध प्रदर्शन मंगलवार को भी जारी रहा। हालात उस समय बिगड़ गए जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच झड़प हो गई। कुछ स्थानों पर भीड़ ने पुलिस वाहनों पर पथराव किया। हालांकि, पुलिस ने जल्द ही स्थिति को नियंत्रित कर लिया और प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाया।
घटनाओं के मद्देनजर प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। सुबह से ही औद्योगिक इलाकों में पुलिस और अर्द्धसैनिक बल फ्लैग मार्च कर रहे हैं। निगरानी के लिए CCTV कैमरों और ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके अलावा, पीएसी और आरएएफ की कई कंपनियों के साथ बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारियों की तैनाती की गई है। एहतियातन अधिकांश फैक्ट्रियां बंद रखी गई हैं।

प्रदेश के पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण लखनऊ स्थित कंट्रोल रूम से हालात पर नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंसा के दौरान हुई सार्वजनिक और निजी संपत्ति के नुकसान की भरपाई दोषियों से कराई जाएगी। वहीं, पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के अनुसार अब तक 300 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। साथ ही, अफवाह फैलाने वाले कई सोशल मीडिया अकाउंट्स की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

इसी बीच राज्य सरकार ने कर्मचारियों की मांगों पर आंशिक सहमति जताते हुए न्यूनतम मजदूरी में बढ़ोतरी का फैसला लिया है। मजदूरी दरों में लगभग 3000 रुपये तक की वृद्धि की गई है, जो 1 अप्रैल से प्रभावी मानी जाएगी। यह निर्णय देर रात हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद लिया गया।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह घटनाक्रम मजदूरों की अनसुनी आवाज का परिणाम है। वहीं, पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने भी मजदूरी बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि वर्तमान आय में श्रमिकों के लिए जीवनयापन करना कठिन है।
गौरतलब है कि इससे एक दिन पहले भी प्रदर्शन उग्र हो गया था। बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने कई फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ की और वाहनों को नुकसान पहुंचाया। पुलिस पर पथराव की घटनाएं भी सामने आई थीं। प्रशासन अब हालात को पूरी तरह सामान्य करने के प्रयास में जुटा है।
