वाराणसी (रणभेरी): शहर के महमूरगंज क्षेत्र में एक रिहायशी इमारत से संचालित कथित शेयर ट्रेडिंग कॉल सेंटर पर पुलिस और साइबर क्राइम टीम की संयुक्त कार्रवाई के बाद शुक्रवार को गिरफ्तार सभी 32 आरोपियों को अदालत में पेश किया गया। न्यायालय ने मामले में गिरफ्तार 21 महिला टेली कॉलर्स को 25-25 हजार रुपये के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया, जबकि 11 पुरुष आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
पुलिस जांच के अनुसार यह गिरोह देशभर के लोगों को शेयर बाजार में अधिक मुनाफे का झांसा देकर करीब 1.25 करोड़ रुपये की ठगी कर चुका था। पूरे नेटवर्क का खुलासा करने के लिए साइबर क्राइम टीम ने अपने दो सिपाहियों को नौकरी तलाशने वाले युवकों के रूप में कॉल सेंटर में भेजा था। तीन दिनों तक अंदर रहकर उन्होंने काम करने के तरीके, कर्मचारियों की भूमिका और पूरे सिस्टम की जानकारी जुटाई, जिसके बाद छापेमारी की गई।

शिकायत से शुरू हुई जांच
डीसीपी काशी नीतू कादयान ने बताया कि साइबर क्राइम थाने को एक शिकायत मिली थी, जिसमें पीड़ित ने आरोप लगाया कि महमूरगंज स्थित एक संस्था ने खुद को शेयर ट्रेडिंग से जुड़ी अधिकृत कंपनी बताकर निवेश कराया और बाद में रकम हड़प ली।
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने संस्था की जांच शुरू की। शुरुआती पड़ताल में सामने आया कि संबंधित कार्यालय के बाहर खुद को सेबी (SEBI) से पंजीकृत संस्था बताया जा रहा था। जब पुलिस ने इस दावे की जांच की तो प्रदर्शित पंजीकरण संख्या संदिग्ध मिली। इसके बाद पूरे मामले की गहराई से जांच करने का निर्णय लिया गया।
नौकरी के बहाने भेजे गए पुलिसकर्मी
जांच को आगे बढ़ाने के लिए साइबर क्राइम के दो सिपाहियों को बिहार के नौकरी की तलाश कर रहे युवकों के रूप में कॉल सेंटर भेजा गया।
पहले दिन दोनों कर्मचारियों ने कार्यालय पहुंचकर नौकरी की इच्छा जताई। वहां मौजूद संचालक विनय मौर्य ने उनसे नाम, पता और शैक्षणिक योग्यता की जानकारी ली। पुलिसकर्मियों ने खुद को स्नातक बताया और रोजगार की आवश्यकता होने की बात कही। संचालक ने अगले दिन आने के लिए कहा।
दूसरे दिन मिला नौकरी का प्रस्ताव
अगले दिन दोनों फिर कार्यालय पहुंचे। वहां मौजूद कर्मचारियों ने उन्हें बताया कि काम केवल फोन पर लोगों से बातचीत करना है। इसी दौरान उन्हें जानकारी मिली कि सोमवार और गुरुवार को कार्यालय में कर्मचारियों की संख्या सबसे अधिक रहती है। बाद में संचालक ने उन्हें आठ हजार रुपये मासिक वेतन के साथ प्रोत्साहन राशि (इंसेंटिव) देने का प्रस्ताव दिया और अगले दिन प्रशिक्षण के लिए बुलाया।
तीसरे दिन खुला पूरा खेल
तीसरे दिन जब दोनों पुलिसकर्मी कार्यालय पहुंचे तो वहां अधिकांश कर्मचारी फोन पर बातचीत करने में व्यस्त थे, जिनमें महिलाओं की संख्या अधिक थी। कुछ देर बाद संचालक ने उन्हें बताया कि उनका काम लोगों को शेयर बाजार में निवेश के लिए प्रेरित करना होगा। जब दोनों ने कहा कि उनके पास शेयर ट्रेडिंग या निवेश सलाह देने की कोई अधिकृत योग्यता नहीं है, तो संचालक ने भरोसा दिलाया कि इसकी व्यवस्था कर दी जाएगी। इसके बाद उन्हें एक तैयार स्क्रिप्ट दी गई और निर्देश दिया गया कि ग्राहकों से बातचीत के दौरान केवल उसी स्क्रिप्ट का उपयोग करना है। यहीं से पुलिस को पूरे फर्जीवाड़े के पर्याप्त साक्ष्य मिल गए।
गुरुवार को की गई छापेमारी
डीसीपी के अनुसार तीन दिनों तक पूरी गतिविधियों पर नजर रखने के बाद गुरुवार दोपहर, जब कार्यालय में अधिकांश कर्मचारी मौजूद थे, पुलिस और साइबर क्राइम टीम ने संयुक्त छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान मौके से कुल 32 लोगों को हिरासत में लिया गया, जिनमें 21 महिलाएं और 11 पुरुष शामिल थे। सभी लोग टेली कॉलिंग और निवेशकों से संपर्क करने का काम कर रहे थे।
तीन जिलों के निवासी निकले आरोपी
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार किए गए अधिकांश आरोपी वाराणसी, चंदौली और मिर्जापुर जिलों के रहने वाले हैं। ये लोग महमूरगंज स्थित एक रिहायशी भवन में “एनकेडी एंड एसोसिएट्स” नाम से कार्यालय संचालित कर रहे थे।
जांच में सामने आया कि कर्मचारियों को आठ हजार से 16 हजार रुपये तक वेतन दिया जाता था। उनका मुख्य कार्य लोगों को शेयर ट्रेडिंग में निवेश के नाम पर कॉल करना और उन्हें अधिक मुनाफे का लालच देकर पैसा निवेश कराने के लिए तैयार करना था।
बिना योग्यता दे रहे थे निवेश की सलाह
डीसीपी नीतू कादयान ने बताया कि गिरफ्तार की गई अधिकांश महिला टेली कॉलर्स ने पूछताछ में बताया कि उन्हें विज्ञापन के माध्यम से नौकरी मिली थी। उन्हें यह विश्वास दिलाया गया था कि संस्था सेबी से अधिकृत है और वैध रूप से निवेश संबंधी सेवाएं देती है। हालांकि जांच में यह सामने आया कि किसी भी कर्मचारी के पास शेयर बाजार या निवेश सलाह देने की आवश्यक पेशेवर योग्यता नहीं थी। पुलिस का कहना है कि बिना प्रशिक्षण और बिना वैधानिक अनुमति के लोगों को निवेश संबंधी सलाह देना गंभीर अनियमितता है।
नहीं था नियुक्ति पत्र, नकद मिलता था वेतन
जांच में यह भी सामने आया कि कर्मचारियों को किसी प्रकार का नियुक्ति पत्र नहीं दिया गया था। कार्यालय में मानव संसाधन (एचआर) विभाग या रिसर्च टीम जैसी कोई व्यवस्था नहीं थी। टेली कॉलर्स को केवल मोबाइल नंबरों की सूची और बातचीत के लिए तैयार स्क्रिप्ट उपलब्ध कराई जाती थी। उसी के आधार पर वे संभावित निवेशकों से संपर्क करते थे। पुलिस के अनुसार कर्मचारियों को वेतन भी बैंक खाते के बजाय नकद दिया जाता था, जिससे पूरे संचालन पर संदेह और गहरा हो गया।
पुलिस की अपील
पुलिस अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संस्था में निवेश करने से पहले उसकी वैधानिक स्थिति, सेबी पंजीकरण और अधिकृत दस्तावेजों की अच्छी तरह जांच कर लें। केवल फोन कॉल, सोशल मीडिया विज्ञापन या अधिक मुनाफे के दावों के आधार पर निवेश करना आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है। फिलहाल पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों, वित्तीय लेनदेन और ठगी से जुड़े नेटवर्क की विस्तृत जांच कर रही है।
