काशी के लोलार्क कुंड में आस्था का सैलाब, 3 KM लंबी कतार; 2 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने किया स्नान

काशी के लोलार्क कुंड में आस्था का सैलाब, 3 KM लंबी कतार; 2 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने किया स्नान

वाराणसी (रणभेरी): लोलार्क षष्ठी के अवसर पर काशी के भदैनी स्थित ऐतिहासिक लोलार्क कुंड में आस्था का विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ा। संतान सुख की कामना लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ विदेशों से भी श्रद्धालु वाराणसी पहुंचे। गुरुवार को कुंड में स्नान के लिए श्रद्धालुओं की करीब तीन किलोमीटर लंबी कतार दिखाई दी। कुंड तक पहुंचने वाली सभी आठ गलियां भीड़ से भर गईं।

लोलार्क षष्ठी का विशेष स्नान बुधवार रात 12 बजे से शुरू हुआ। गुरुवार दोपहर 12 बजे तक दो लाख से अधिक श्रद्धालुओं के कुंड में स्नान करने की जानकारी सामने आई। लगातार बढ़ती भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन और पुलिस की ओर से व्यापक इंतजाम किए गए थे।

30 सेकंड में स्नान, बाहर कपड़े बदलने की व्यवस्था

लोलार्क कुंड में बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रत्येक श्रद्धालु को स्नान के लिए लगभग 30 सेकंड का समय दिया जा रहा है। स्नान के बाद श्रद्धालुओं के लिए कुंड के बाहर कपड़े बदलने की व्यवस्था की गई है। धार्मिक परंपरा के अनुसार स्नान के दौरान श्रद्धालु फल का दान भी करते हैं।

काशी के लोलार्क कुंड में आस्था का सैलाब, 3 KM लंबी कतार; 2 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने किया स्नान

संतान प्राप्ति की मनोकामना लेकर आने वाले दंपतियों की संख्या भी काफी रही। मान्यता के अनुसार लोलार्क षष्ठी के दिन पति-पत्नी द्वारा एक साथ कुंड में स्नान करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है। इसी धार्मिक विश्वास के चलते दूर-दराज के राज्यों और पड़ोसी देश नेपाल से भी श्रद्धालु काशी पहुंचे।

सूर्योदय के बाद बढ़ी श्रद्धालुओं की भीड़

लोलार्क षष्ठी के मौके पर अधिकांश श्रद्धालु उदया तिथि की मान्यता के अनुसार सूर्योदय के बाद स्नान के लिए कुंड की ओर पहुंचे। सुबह होते ही कुंड के आसपास श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ने लगी। कई श्रद्धालु एक दिन पहले ही वाराणसी पहुंच गए थे और रात से ही स्नान की प्रतीक्षा में कतार में खड़े रहे। बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के अलावा पूर्वांचल के विभिन्न जिलों से भी बड़ी संख्या में लोग वाराणसी पहुंचे।

काशी के लोलार्क कुंड में आस्था का सैलाब, 3 KM लंबी कतार; 2 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने किया स्नान

51 डमरुओं की गूंज के साथ हुई आरती

लोलार्क षष्ठी के आयोजन की शुरुआत धार्मिक विधि-विधान के साथ हुई। 51 डमरुओं के वादन के बीच आरती की गई। इसके बाद धीरे-धीरे श्रद्धालुओं के जत्थे कुंड में स्नान के लिए पहुंचने लगे। भोर होते-होते कुंड और उसके आसपास का पूरा क्षेत्र श्रद्धालुओं से भर गया।

ड्रोन से निगरानी, डबल बैरिकेडिंग से संभाली भीड़

श्रद्धालुओं की भारी संख्या को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रखी गई। पूरे इलाके की निगरानी अत्याधुनिक ड्रोन के माध्यम से की जा रही है। भदैनी स्थित लोलार्क कुंड से पांडेय हवेली तक डबल बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई है।

भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कुंड के आसपास जिग-जैग बैरिकेडिंग बनाई गई है। प्रवेश और निकासी के लिए अलग-अलग रास्ते निर्धारित किए गए हैं। इसका उद्देश्य भीड़ को एक ही स्थान पर इकट्ठा होने से रोकना और श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित रखना है।

धूप से बचाव के लिए बैरिकेडिंग पर लगाई गई छांव

सितंबर की गर्मी को देखते हुए श्रद्धालुओं को राहत देने के लिए बैरिकेडिंग के ऊपर कपड़े की छांव भी लगाई गई है। लंबी कतार में खड़े लोगों को धूप से बचाने के लिए यह व्यवस्था की गई। प्रशासन की ओर से भीड़ के दबाव को देखते हुए लगातार व्यवस्थाओं की निगरानी की जा रही है।

सूर्यदेव से जुड़ी है लोलार्क कुंड की मान्यता

लोलार्क कुंड को काशी के प्राचीन धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसे सूर्यदेव से संबंधित कुंड माना जाता है। मान्यता है कि भाद्रपद शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि पर सूर्यदेव के रथ का पहिया यहां आकर गिरा था। इसी घटना से इस स्थान का नाम ‘लोलार्क’ पड़ा।

लोलार्क षष्ठी के दिन यहां स्नान की परंपरा सदियों पुरानी मानी जाती है। श्रद्धालु संतान प्राप्ति और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के साथ कुंड में आस्था की डुबकी लगाते हैं। विशेष रूप से पति-पत्नी के एक साथ स्नान करने को लेकर धार्मिक आस्था जुड़ी हुई है।

देर रात से ही पहुंचने लगे थे श्रद्धालु

लोलार्क षष्ठी के स्नान को लेकर श्रद्धालुओं में पहले से ही उत्साह था। बड़ी संख्या में लोग बुधवार को ही वाराणसी पहुंच गए थे। रात 12 बजे स्नान शुरू होने के बाद श्रद्धालुओं का आना लगातार जारी रहा। गुरुवार सुबह सूर्योदय के बाद भीड़ और बढ़ती चली गई।

कुंड की ओर जाने वाले मार्गों पर सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है। बैरिकेडिंग के जरिए श्रद्धालुओं को कतारबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है। भीड़ का दबाव कम रखने के लिए प्रवेश और निकास की व्यवस्था अलग रखी गई है।

लोलार्क षष्ठी के अवसर पर एक बार फिर काशी में धार्मिक आस्था, परंपरा और श्रद्धालुओं की भारी मौजूदगी का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। हजारों परिवार संतान सुख और मनोकामना पूर्ति की उम्मीद लेकर लोलार्क कुंड पहुंचे और धार्मिक परंपरा के अनुसार स्नान-दान किया।

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