वाराणसी (रणभेरी): महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में परीक्षा परिणाम में सामने आ रही कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आक्रोश शुक्रवार को फिर देखने को मिला। बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने परीक्षा भवन के सामने पहुंचकर प्रदर्शन किया और विश्वविद्यालय प्रशासन से जल्द से जल्द परिणाम दुरुस्त कराने की मांग की। छात्रों का आरोप है कि परीक्षा देने के बावजूद कई विद्यार्थियों को परिणाम में अनुपस्थित दर्ज कर दिया गया है। इसके कारण उन्हें फेल घोषित कर दिया गया, जबकि उन्होंने संबंधित विषय की परीक्षा दी थी।
प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि रिजल्ट में केवल अनुपस्थित दर्ज किए जाने की समस्या ही नहीं है, बल्कि कई अन्य तरह की त्रुटियां भी सामने आ रही हैं। विद्यार्थियों के मुताबिक वे लगातार परीक्षा विभाग और विश्वविद्यालय के अधिकारियों से संपर्क कर रहे हैं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है।
परीक्षा दी, परिणाम में दर्ज हो गया अनुपस्थित
प्रदर्शन में शामिल छात्र आयुष यादव ने बताया कि उन्होंने निर्धारित समय पर परीक्षा दी थी। इसके बावजूद जारी परिणाम में उन्हें अनुपस्थित दिखाया गया। छात्र का कहना है कि जब उन्होंने विश्वविद्यालय स्तर पर इसकी शिकायत की तो उन्हें सुधार का भरोसा दिलाया गया, लेकिन अभी तक परिणाम में अपेक्षित बदलाव नहीं किया गया है।
छात्रों का दावा है कि आयुष अकेले ऐसे विद्यार्थी नहीं हैं, जिनके साथ इस तरह की परेशानी सामने आई है। कई अन्य विद्यार्थियों ने भी परीक्षा में शामिल होने के बावजूद रिजल्ट में अनुपस्थित दर्ज किए जाने की शिकायत की है। इससे छात्रों के सामने अगली कक्षा में प्रवेश, आगे की पढ़ाई और अन्य शैक्षणिक प्रक्रियाओं को लेकर भी परेशानी खड़ी हो रही है।
पहले भी दिया गया था सुधार का भरोसा
छात्रों के अनुसार, परिणाम में गड़बड़ियों को लेकर वे पहले भी विश्वविद्यालय में प्रदर्शन कर चुके हैं। उस समय विश्वविद्यालय की ओर से विद्यार्थियों को आश्वस्त किया गया था कि संबंधित त्रुटियों को तीन दिन के भीतर ठीक कर दिया जाएगा।
विद्यार्थियों का आरोप है कि आश्वासन के बाद अब करीब एक सप्ताह का समय गुजर चुका है, लेकिन कई मामलों में स्थिति पहले जैसी ही बनी हुई है। छात्रों का कहना है कि समस्या दूर होने के बजाय उन्हें बार-बार परीक्षा विभाग के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
एजेंसी पर गंभीर आरोप, छात्रों ने जांच की मांग की
प्रदर्शन के दौरान कुछ छात्रों ने परीक्षा परिणाम तैयार करने और उसमें सुधार से जुड़े काम को लेकर संबंधित एजेंसी पर भी गंभीर आरोप लगाए। छात्र शिवम का आरोप है कि एजेंसी विश्वविद्यालय परिसर के बाहर से काम कर रही है। उनका दावा है कि कुछ लोगों के माध्यम से पैसे लेकर रिजल्ट में कथित तौर पर बदलाव कराने की शिकायतें सामने आई हैं।

छात्रों का कहना है कि उन्होंने इन आरोपों से संबंधित साक्ष्य विश्वविद्यालय के अधिकारियों को उपलब्ध कराते हुए शिकायत भी की है। हालांकि, उनके अनुसार अभी तक इस मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। छात्रों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि परिणाम में गड़बड़ियां किस स्तर पर हुईं और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।
परिसर में एजेंसी से काम कराने की मांग
प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों ने परीक्षा से संबंधित काम करने वाली एजेंसी को विश्वविद्यालय परिसर में ही काम कराने की मांग उठाई। छात्रों का तर्क है कि यदि एजेंसी परिसर में रहकर काम करेगी तो परीक्षा परिणाम से जुड़े कार्यों की निगरानी आसान होगी और किसी भी गड़बड़ी की स्थिति में जिम्मेदारी तय करना भी संभव होगा।
छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की कि जिन विद्यार्थियों ने परीक्षा दी है, लेकिन उन्हें परिणाम में अनुपस्थित या गलत अंक के साथ दर्शाया गया है, उनके मामलों की तत्काल जांच कर परिणाम संशोधित किया जाए। साथ ही परीक्षा परिणाम से जुड़ी अन्य शिकायतों का भी समयबद्ध तरीके से निस्तारण किया जाए।
दोषियों पर कार्रवाई की मांग
छात्रों ने कहा कि परिणाम में गड़बड़ी से विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। इसलिए केवल आश्वासन देने के बजाय विश्वविद्यालय प्रशासन को शिकायतों की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लानी चाहिए। यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
विद्यार्थियों ने यह भी मांग की कि परीक्षा परिणाम से संबंधित शिकायतों के लिए स्पष्ट व्यवस्था बनाई जाए, ताकि छात्रों को बार-बार अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और उनकी शिकायतों का समय पर समाधान हो सके।
समाधान नहीं हुआ तो अनिश्चितकालीन धरने की चेतावनी
प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही परिणाम की त्रुटियों को दूर नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। छात्रों ने कहा कि पहले दिए गए समय के बावजूद समस्या दूर नहीं हुई है। ऐसे में यदि विश्वविद्यालय प्रशासन ने शीघ्र कार्रवाई नहीं की तो वे परिसर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू करने के लिए मजबूर होंगे।
छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की कि परीक्षा परिणाम से जुड़ी सभी शिकायतों की प्राथमिकता के आधार पर जांच कर विद्यार्थियों को राहत दी जाए। साथ ही लगाए गए आरोपों की जांच कर दोषी पाए जाने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
