(रणभेरी): संसद के मानसून सत्र के दौरान शुक्रवार को विपक्षी सांसदों ने राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित चोरी के आरोपों को लेकर संसद परिसर में प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान सांसद पप्पू यादव अलग अंदाज में नजर आए। वे पुजारी की वेशभूषा में दानपेटी लेकर संसद पहुंचे और सरकार से इस मामले में जवाबदेही की मांग की।
प्रदर्शन में कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत कई विपक्षी सांसद शामिल हुए। इस दौरान नेताओं ने दानपेटी में प्रतीकात्मक रूप से चंदा डाला और पूरे मामले की जांच की मांग उठाई। विपक्षी सांसद अपने हाथों में बैनर और पोस्टर लेकर पहुंचे थे। इनमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की संसद में मौजूदगी को लेकर सवाल उठाए गए थे।
विपक्ष का आरोप है कि राम मंदिर से जुड़े चढ़ावे और व्यवस्थाओं को लेकर सामने आए विवादों पर सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। प्रदर्शनकारी सांसदों ने मांग की कि इस मुद्दे पर संसद में विस्तृत चर्चा कराई जाए और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो।
लोकसभा में हंगामे के बाद कार्यवाही स्थगित
शुक्रवार को लोकसभा की कार्यवाही तय समय के अनुसार सुबह 11 बजे शुरू हुई, लेकिन विपक्षी सदस्यों के विरोध और नारेबाजी के चलते सदन का माहौल काफी हंगामेदार रहा। हंगामे को देखते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।

दोपहर में सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई तो सरकार ने जन्म-मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया। चर्चा के बाद यह विधेयक ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। इसके बाद संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही तीन अगस्त तक के लिए स्थगित कर दी गई।
केंद्रीय मंत्री के बयान पर कांग्रेस का विशेषाधिकार प्रस्ताव
इधर, कांग्रेस ने केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह के संसद में दिए गए एक बयान को लेकर उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाने की बात कही है। कांग्रेस का आरोप है कि मंत्री का बयान तथ्यों के विपरीत था।
दरअसल, जितेंद्र सिंह ने संसद में कहा था कि जंतर-मंतर और संसद मार्च जैसे प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की घटनाएं नहीं हुई थीं। इस बयान को लेकर कांग्रेस नेताओं ने आपत्ति जताई और इसे सदन को गुमराह करने वाला बताया। विपक्ष ने इस पूरे मामले पर सरकार से जवाब मांगा है, जबकि सत्ता पक्ष का कहना है कि संसद की कार्यवाही तथ्यों और नियमों के आधार पर चलनी चाहिए। मानसून सत्र के दौरान यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है।
