वाराणसी (रणभेरी): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में एक महिला स्ट्रीट वेंडर ने स्थानीय प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए अपनी आजीविका बचाने की अपील की है। महिला का कहना है कि केंद्र सरकार की पीएम स्वनिधि योजना से उन्हें आर्थिक सहायता मिली, जिससे उन्होंने अपने छोटे कारोबार को आगे बढ़ाया। लेकिन अब प्रशासन की ओर से दुकान लगाने पर रोक लगाए जाने के कारण उनका परिवार आर्थिक संकट का सामना कर रहा है।
चार साल से सड़क किनारे कर रही हैं व्यवसाय
वाराणसी के चितरंजन पार्क गेट के निकट वर्षों से पटरी पर दुकान लगाने वाली मुन्नी यादव का कहना है कि वह लगभग 40 वर्षों से इसी स्थान पर छोटा व्यवसाय कर अपने परिवार का भरण-पोषण करती आ रही हैं। उनके अनुसार इसी कारोबार की बदौलत उन्होंने अपने बच्चों की परवरिश की और परिवार की रोजमर्रा की जरूरतें पूरी कीं।
मुन्नी यादव का कहना है कि सरकार द्वारा शुरू की गई प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना का लाभ भी उन्हें मिला। योजना के तहत पहले उन्हें 10 हजार रुपये का ऋण मिला, इसके बाद समय पर भुगतान करने पर 20 हजार रुपये का दूसरा ऋण स्वीकृत हुआ। बाद में उन्हें 50 हजार रुपये तक की वित्तीय सहायता भी प्राप्त हुई, जिससे उन्होंने अपने व्यवसाय को और मजबूत करने का प्रयास किया।
“कमाने नहीं देंगे तो लोन कैसे चुकाएंगे”
महिला स्ट्रीट वेंडर का आरोप है कि हाल के दिनों में स्थानीय प्रशासन उन्हें पहले की तरह दुकान लगाने की अनुमति नहीं दे रहा है। उनका कहना है कि जब भी वह दुकान लगाने का प्रयास करती हैं तो उन्हें हटा दिया जाता है और अधिकारियों की ओर से उच्च स्तर के आदेश लाने की बात कही जाती है।

मुन्नी यादव का कहना है कि सरकार ने छोटे कारोबारियों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से ऋण उपलब्ध कराया, लेकिन यदि उन्हें व्यवसाय ही नहीं करने दिया जाएगा तो उनके सामने ऋण चुकाने और परिवार का पालन-पोषण करने की गंभीर समस्या खड़ी हो जाएगी। उन्होंने कहा कि कई बार मजबूरी में उन्हें छिपकर या सीमित समय के लिए दुकान लगानी पड़ती है, जिससे पर्याप्त आमदनी नहीं हो पा रही है।
परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट
महिला का कहना है कि उनका पूरा परिवार इसी छोटे व्यवसाय पर निर्भर है। यदि दुकान लगाने पर लगातार रोक बनी रही तो घर का खर्च चलाना कठिन हो जाएगा। उनका कहना है कि बढ़ती महंगाई के दौर में रोजगार का कोई दूसरा साधन उपलब्ध नहीं है और दुकान हटने से परिवार आर्थिक असुरक्षा की स्थिति में पहुंच गया है।

पुनर्वास के बाद ही हटाने की मांग
मुन्नी यादव ने मांग की है कि यदि प्रशासन किसी कारणवश वर्तमान स्थान से दुकानदारों को हटाना चाहता है तो पहले उन्हें वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराया जाए। उनका कहना है कि बिना पुनर्वास के गरीब पटरी व्यवसायियों को हटाना उनके रोजगार पर सीधा असर डालता है।
उन्होंने स्ट्रीट वेंडरों के अधिकारों से जुड़े प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा कि छोटे व्यापारियों को व्यवस्थित ढंग से व्यापार करने का अवसर मिलना चाहिए और किसी भी कार्रवाई से पहले उनके पुनर्वास की व्यवस्था की जानी चाहिए।
प्रधानमंत्री से की हस्तक्षेप की अपील
मुन्नी यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भावुक अपील करते हुए कहा कि उन्हें सरकार की योजनाओं से कोई शिकायत नहीं है। उनका कहना है कि उन्हें सरकार की आर्थिक सहायता का लाभ मिला और उसी से उनका कारोबार आगे बढ़ा। लेकिन स्थानीय स्तर पर उत्पन्न परिस्थितियों के कारण उनका रोजगार प्रभावित हो रहा है।
उन्होंने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया कि मामले का संज्ञान लेकर संबंधित अधिकारियों को उचित निर्देश दिए जाएं ताकि उन्हें किसी सुरक्षित और निर्धारित स्थान पर व्यवसाय करने का अवसर मिल सके।
महिला ने यह भी कहा कि उनकी किसी व्यक्ति विशेष से शिकायत नहीं है। उन्होंने प्रधानमंत्री के उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करते हुए केवल इतना आग्रह किया कि गरीब पटरी व्यवसायियों को सम्मानपूर्वक रोजगार करने का अवसर मिले।
प्रशासनिक पक्ष का इंतजार
इस मामले में संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी शेष है। यदि प्रशासन की ओर से कोई प्रतिक्रिया या स्पष्टीकरण प्राप्त होता है तो उसे भी समाचार में प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा, जिससे मामले का संतुलित पक्ष पाठकों के सामने आ सके।
