वाराणसी (रणभेरी): धर्म, अध्यात्म और सनातन परंपरा की प्राचीन नगरी काशी में गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व बुधवार को पूरे श्रद्धाभाव, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु, साधक और भक्त इस अवसर पर काशी पहुंचे। सुबह से ही शहर के प्रमुख मठों, मंदिरों, आश्रमों और धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। हर ओर गुरु वंदना, मंत्रोच्चार, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों का वातावरण बना रहा, जिससे संपूर्ण शहर आध्यात्मिक रंग में रंगा नजर आया।
ब्रह्म मुहूर्त से गंगा घाटों पर जुटने लगे श्रद्धालु
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर श्रद्धालु तड़के ब्रह्म मुहूर्त से ही गंगा तट की ओर पहुंचने लगे। दशाश्वमेध घाट, अस्सी घाट, पंचगंगा घाट, राजेंद्र प्रसाद घाट सहित अन्य प्रमुख घाटों पर श्रद्धालुओं ने पवित्र गंगा में स्नान कर पूजा-अर्चना की। स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने मां गंगा का विधिवत पूजन किया और अपने परिवार की सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य तथा आध्यात्मिक उन्नति की कामना की।

गुरु पूजन के लिए आश्रमों और मठों में उमड़ी भीड़
गंगा स्नान के बाद श्रद्धालु अपने-अपने गुरुजनों, संत-महात्माओं और आध्यात्मिक आचार्यों के आश्रमों की ओर रवाना हुए। विभिन्न आश्रमों में गुरु चरण पादुका पूजन, पुष्प अर्पण, आरती तथा आशीर्वाद ग्रहण करने का क्रम देर शाम तक जारी रहा। श्रद्धालुओं ने परंपरागत विधि-विधान के अनुसार गुरु पूजन कर उनसे जीवन में ज्ञान, सद्बुद्धि और सफलता का आशीर्वाद प्राप्त किया।
भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों से गूंजा शहर
काशी के अनेक धार्मिक संस्थानों में दिनभर भजन-कीर्तन, प्रवचन, वेद मंत्रों का उच्चारण, हवन और सत्संग का आयोजन किया गया। संतों और विद्वानों ने गुरु की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च माना गया है। उन्होंने गुरु को ज्ञान का प्रकाश और जीवन का सच्चा मार्गदर्शक बताते हुए श्रद्धालुओं को धर्म, सेवा और संस्कारों के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।
सुरक्षा और व्यवस्था पर प्रशासन की विशेष नजर
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा और यातायात व्यवस्था की। प्रमुख घाटों, मंदिरों और आश्रमों के आसपास पुलिस बल की तैनाती की गई। भीड़ प्रबंधन के लिए अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों को लगाया गया, जबकि यातायात को सुचारु बनाए रखने के लिए कई स्थानों पर विशेष व्यवस्था की गई। गंगा घाटों पर जल पुलिस और राहत दल भी सतर्क रहे।
पूरे दिन बना रहा श्रद्धा और भक्ति का माहौल
दिनभर काशी के धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहा। मंदिरों में घंटों और शंखनाद की गूंज, घाटों पर वैदिक मंत्रोच्चार तथा आश्रमों में आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने गुरु का आशीर्वाद लेकर अपने जीवन में ज्ञान, शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति की प्रार्थना की। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर काशी एक बार फिर अपनी सनातन परंपरा, धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक गरिमा
