वाराणसी (रणभेरी): वाराणसी शहर में विवाह कराने के नाम पर लोगों से ऑनलाइन ठगी करने वाले एक कथित फर्जी मैट्रिमोनियल नेटवर्क का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। कैंट थाना पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त कार्रवाई में एक फ्लैट से संचालित हो रहे इस गिरोह की संचालिका सहित कुल 10 महिलाओं को गिरफ्तार किया गया। आरोप है कि यह गिरोह अखबारों में वैवाहिक विज्ञापन प्रकाशित कर लोगों को अपने जाल में फंसाता था और फिर “लाइफटाइम सदस्यता” के नाम पर पैसे वसूलकर संपर्क समाप्त कर देता था।
पुलिस के अनुसार, इस मामले में कई राज्यों से शिकायतें मिलने के बाद जांच शुरू की गई थी। शुरुआती पड़ताल में सामने आया कि शिकायतकर्ताओं को वैवाहिक रिश्ता दिलाने का भरोसा दिया गया, लेकिन शुल्क जमा होने के बाद न तो कोई वास्तविक रिश्ता उपलब्ध कराया गया और न ही जमा धनराशि लौटाई गई।
शिकायतों के आधार पर शुरू हुई जांच
एसीपी कैंट अपूर्व पांडेय ने बताया कि साइबर सेल को प्रतिबिंब पोर्टल और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर लगातार शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। शिकायतों में दो मोबाइल नंबरों का बार-बार उल्लेख सामने आया। तकनीकी जांच के दौरान इन नंबरों की कॉल डिटेल, ग्राहक आवेदन पत्र (CAF) और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण किया गया।
जांच में पता चला कि अखबारों में प्रकाशित वैवाहिक विज्ञापन देखकर लोग दिए गए मोबाइल नंबरों पर संपर्क करते थे। इसके बाद खुद को मैट्रिमोनियल एजेंसी का प्रतिनिधि बताकर व्हाट्सएप के माध्यम से युवक-युवती की प्रोफाइल भेजी जाती थी।

सदस्यता शुल्क के नाम पर होती थी वसूली
पुलिस के मुताबिक, कथित एजेंसी पहले भरोसा बनाती थी और फिर परिवार का संपर्क उपलब्ध कराने तथा विवाह तय कराने के नाम पर “लाइफटाइम सब्सक्रिप्शन” लेने के लिए कहा जाता था। भुगतान ऑनलाइन माध्यम से कराया जाता था।
एक महिला शिकायतकर्ता से चार किश्तों में लगभग 7 हजार रुपये लिए गए, जबकि एक अन्य व्यक्ति से 3,500 रुपये सदस्यता शुल्क के रूप में जमा कराए गए। आरोप है कि रकम मिलने के बाद किसी भी ग्राहक को वास्तविक वैवाहिक संपर्क नहीं दिया गया और न ही पैसा वापस किया गया।
अर्दली बाजार स्थित फ्लैट से चल रहा था संचालन
तकनीकी जांच के बाद पुलिस को जानकारी मिली कि अर्दली बाजार क्षेत्र की विंध्यवासिनी नगर कॉलोनी स्थित मकान संख्या 104 में “शुभ मैट्रिमोनियल” के नाम से यह गतिविधि संचालित की जा रही थी। इसके बाद सोमवार शाम साइबर सेल और कैंट थाना पुलिस ने संयुक्त रूप से वहां छापा मारा।
कार्रवाई के दौरान फ्लैट के तीन कमरों में कई महिलाएं मोबाइल और कीपैड फोन के जरिए अलग-अलग लोगों से बातचीत करती मिलीं। पुलिस ने मौके से सभी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की।
छापेमारी में बड़ी मात्रा में सामान बरामद
तलाशी के दौरान पुलिस ने 27 मोबाइल फोन, एक एसर टैबलेट, चार बिल वाउचर, दो रजिस्टर, किरायानामा, उद्यम पंजीकरण से जुड़े दस्तावेज, मैट्रिमोनियल पंजीकरण फॉर्म, तीन क्यूआर कोड, एक पेमेंट साउंड बॉक्स, तीन चेकबुक, एक बैंक पासबुक और पांच डेबिट कार्ड बरामद किए। पुलिस का मानना है कि इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों से गिरोह की कार्यप्रणाली से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते हैं।
व्हाट्सएप के जरिए होता था पूरा नेटवर्क संचालित
जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह का अधिकांश काम व्हाट्सएप के माध्यम से किया जाता था। पहले ग्राहकों को आकर्षक प्रोफाइल भेजी जाती थीं, फिर विश्वास जीतकर ऑनलाइन भुगतान कराया जाता था। साइबर शिकायतों के कारण जब कुछ बैंक खाते फ्रीज हो गए तो आरोपियों ने दूसरे बैंक खातों और अलग-अलग क्यूआर कोड का इस्तेमाल कर रकम वसूलना शुरू कर दिया।
अखबारों के विज्ञापनों से फंसाए जाते थे लोग
पूछताछ में कथित संचालिका रागिनी देवी ने स्वीकार किया कि विभिन्न समाचार पत्रों में आकर्षक वैवाहिक विज्ञापन प्रकाशित कराए जाते थे। इन विज्ञापनों के माध्यम से संपर्क करने वाले लोगों को बेहतर रिश्ते का भरोसा दिया जाता था। सदस्यता शुल्क जमा होने के बाद उन्हें वास्तविक परिवारों का संपर्क उपलब्ध नहीं कराया जाता था।
50 से अधिक लोगों ने दर्ज कराई शिकायत
पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस कथित फर्जी मैट्रिमोनियल नेटवर्क के खिलाफ 50 से अधिक लोगों ने पुलिस और साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। इन्हीं शिकायतों के आधार पर जांच आगे बढ़ी और अंततः पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ।
10 महिलाएं गिरफ्तार
पुलिस ने कार्रवाई के दौरान गिरोह की कथित मास्टरमाइंड रागिनी देवी समेत कुल 10 महिलाओं को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार महिलाओं में वाराणसी के अलग-अलग इलाकों की निवासी महिलाएं शामिल हैं। पुलिस सभी आरोपियों से पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस नेटवर्क से और कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं।
विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज
सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 3(5), 319(2), 318(4), 336(3) और 340(2) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। बरामद मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी ताकि देश के अन्य हिस्सों में हुई इसी तरह की साइबर ठगी की घटनाओं से इनके संबंधों की भी जांच की जा सके।
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद इस नेटवर्क से जुड़े अन्य व्यक्तियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
