- सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाले जगहों के नाम लोगों को आकर्षित कर रहे
- पौराणिक मंदिरों व तीर्थों को लेकर लोगों में है भारी उत्कंठा
- शनिवार व रविवार को बिहार के लोगों के चलते भी हो रही भारी भीड़
- सबसे पुरातन शहर बनारस की आबोहवा अब बदलती जा रही
राधेश्याम कमल
वाराणसी (रणभेरी): विश्व का सबसे पुरातन शहर बनारस की आबोहवा अब बदलती जा रही है। रहन-सहन, खानपान के साथ ही बनारस में सब कुछ बदलता जा रहा है। इतना ही नहीं बनारस में तो अब भीड़ का ट्रेण्ड भी बदलता जा रहा है। सही मायने में कहा जाय तो रील की दुनिया में अब रीयल काशी को लोग भूलते जा रहे हैं। आजकल लोग सोशल मीडिया के माध्यम से प्रचारित एवं प्रसारित होने वाले स्थलों पर खानपान करने के लिए लोग ज्यादा पहुंच रहे हैं। तीर्थ स्थलों एवं पौराणिक स्थलों के बारे में लोगों को भारी उत्कंठा तो है लेकिन जानकारी के अभाव में वह वहां तक पहुंच नहीं पा रहे हैं। लोग पूरी तरह से सोशल मीडिया पर ही टिके हुए हैं। काशी का जो भी रहस्य है उससे लोग दूर होते जा रहे हैं। इसमें युवाओं की संख्या ज्यादा है। जो सोशल मीडिया के माध्यम से काशी देखना चाहता है। लेकिन वह वास्तविक काशी से दूर होता जा रहा है।
बनारस में तो अब भीड़ का ट्रेण्ड भी बदल गया है। भीड़ तो अब भी रोजाना बनारस आ रही है लेकिन इनमें युवाओं की भीड़ कुछ ज्यादा ही बढ़ गई है। शनिवार एवं रविवार को बनारस की सड़कों पर बाहर से आये लोगों का सैलाब उमड़ रहा है। काशी विश्वनाथ धाम में हर दिन एक से डेढ़ लाख लोग बाबा विश्वनाथ का दर्शन करने आते हैं। ज्ञानवापी गेट नंबर चार से बांसफाटक तक रोजाना दर्शनार्थियों की लंबी कतारें लग रही हैं। ललिताघाट की तरफ से भी बाबा विश्वनाथ धाम पहुंचने में लोगों को कई-कई घंटे लग जा रहे हैं।

जानकारों का मानना है कि बनारस की सीमा से बिहार के सटे होने के कारण बिहार से लोग हर शनिवार एवं रविवार को पिकनिक मनाने के लिए बनारस चले आ रहे हैं जिसके चलते बनारस में इतनी भीड़ बढ़ गई है। बिहार में नशाबंदी होने के कारण वहां से युवाओं की टोलियां बनारस आकर मौज मस्ती के साथ ही पिकनिक मना रही है। बनारस के हर चौराहों पर बिहार से आयी हुई चार पहिया वाहनों की भरमार दिखायी पड़ रही है। बनारस में शनिवार व रविवार को तो भीड़ का यह आलम है कि देर रात्रि तक दशाश्वमेध, गोदौलिया, चौक, बांसफाटक, मैदागिन पर लोगों की भीड़ ही भीड़ दिखायी पड़ रही है। रविवार को तो सुबह सोशल मीडिया पर खानपान की दुकानों का पता पूछते हुए बाहर से आये लोग बनारस की गलियों में मिल जाते हैं। कोई कचौड़ी-जलेबी के बारे में तो कोई चाट के बारे में पूछता हुआ मिल जाता है। गंगा आरती देखने के लिए भी दशाश्वमेधघाट, शीतलाघाट, अस्सी घाट, नमो घाट, ललिता घाट पर लोगों की भारी भीड़ उमड़ रही है।

दशाश्वमेधघाट पर गंगा आरती के समय तो इतनी भीड़ होती है कि घाट पर किसी का भी जाना मुश्किल है। ऊपर से लेकर नीचे तक घाट की सीढ़ियां एकदम खचाखच भरी रहती है। गंगा आरती खत्म होने के बाद भीड़ जब बाहर निकलती है तब उस समय दृश्य देखने लायक होता है। दशाश्वमेध से गोदौलिया तक सड़कें एकदम खचाखच भरी रहती हैं। इस दौरान उधर से कोई गुजर नहीं सकता है। यह सिलसिला रोजाना देखने को मिलता है। सबसे ज्यादा लोगों की भीड़ कालभैरव मंदिर में देखने को मिल रही है।
सुबह से लेकर रात्रि तक गोलघर से कालभैरव चौराहे तक की गलियां पूरी तरह खचाखच भरी रहती है। भीड़ इतनी है कि इधर से कोई अपने घर भी नहीं गुजर सकता है। कालभैरव मंदिर के बाहर चौराहे पर पुलिस के साथ ही अन्य लोगों के वाहन बेतरतीब ढंग से खड़ी कर दी जाती है। इससे आने जाने वालों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। तमाम कोशिशों के बावजूद कालभैरव मंदिर में दर्शन-पूजन के नाम पर धन उगाही को रोका नहीं जा सका है। चारों तरफ अतिक्रमण के साथ ही जाम की स्थिति बनी रहती है लेकिन पुलिस का ध्यान इस ओर एकदम नहीं है।
