वाराणसी (रणभेरी): वाराणसी की धार्मिक परंपरा अब विदेशों में भी अपनी अलग पहचान बना रही है। काशी के युवा वैदिक आचार्य कृष्ण कांत तिवारी को स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम स्थित हिंदू मंदिर में नियमित पुजारी के रूप में नियुक्त किया गया है। वर्षों से अपने पैतृक मंदिर में पूजा-अर्चना और वैदिक अनुष्ठान कराने वाले आचार्य अब यूरोप में भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
बताया जा रहा है कि चयन प्रक्रिया के दौरान उनसे कर्मकांड, आरती, राग-भोग और धार्मिक विधियों से जुड़े कई प्रश्न पूछे गए। वैदिक ज्ञान के साथ योग और कराटे में उनकी दक्षता ने उन्हें अन्य उम्मीदवारों से अलग पहचान दिलाई। चयन के बाद उन्हें करीब डेढ़ लाख रुपये प्रतिमाह वेतन दिया जा रहा है। रहने और भोजन की व्यवस्था भी संस्था की ओर से निशुल्क उपलब्ध कराई गई है।
स्टॉकहोम के इस हिंदू मंदिर में भगवान विष्णु, महेश सहित कई देवी-देवताओं की नियमित पूजा की जिम्मेदारी आचार्य कृष्ण कांत निभा रहे हैं। धार्मिक वीजा के नियमों के अनुसार वे फिलहाल छह महीने तक वहां सेवाएं देंगे। उन्हें वैदिक कर्मकांड और धार्मिक अनुष्ठानों का लगभग एक दशक का अनुभव है। उन्होंने वाराणसी में रहकर संस्कृत विषय में शास्त्री और आचार्य की शिक्षा प्राप्त की है।

जानकारी के अनुसार, बीएचयू के पूर्व छात्र और वर्तमान में स्वीडन में कार्यरत वैज्ञानिक डॉ. अंशुमान सिंह ने उन्हें इस अवसर के लिए आवेदन करने की सलाह दी थी। उनकी योग्यता और अनुभव को देखते हुए स्टॉकहोम हिंदू सोसायटी ने उन्हें मंदिर सेवा के लिए चुना।
यह मंदिर स्वीडन में बसे हिंदू समुदाय के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन और पूजा के लिए पहुंचते हैं, जबकि त्योहारों पर भक्तों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। आचार्य कृष्ण कांत यहां पूजा-पाठ, यज्ञोपवीत, धार्मिक अनुष्ठान और विशेष आरती जैसी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं।
आचार्य का कहना है कि विदेश में रहकर सनातन संस्कृति का प्रचार-प्रसार करना उनके लिए गर्व की बात है। वे भारतीय आध्यात्मिक मूल्यों और वैदिक परंपराओं को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं।
