रवि योग में की जायेगी मां जान्हवी की पूजा, ज्येष्ठ मास में पृथ्वी पर अवतरित हुई थी पतित पावनी गंगा
वाराणसी (रणभेरी): गंगा दशहरा पर स्नान करने से मनुष्य के दस प्रकार के पापों का शमन होता है। इसके साथ ही उसे मोक्ष का मार्ग प्रशस्त हो जाता है। गंगा स्नान के दौरान मंत्रों का उच्चारण न केवल मन को शुद्ध करता है बल्कि जातक को विष्णु लोक की प्राप्ति में सहायक होता है। प्रसिद्ध ज्योतिषविद् पं. विमल जैन ने बताया कि इस बार रवि योग में 26 मई को गंगा दशहरा का पर्व मनाया जायेगा। ज्येष्ठ मास में इस दिन धरती पर पतित पावनी गंगा अवतरित हुई थीं।
इस वर्ष ज्येष्ठ शुक्ल दशमी तिथि का प्रारंभ वृष लग्न में सुबह 4.30 बजे से 6.30 बजे तक होगा। यह स्नान और पूजा के लिए सबसे सटीक और सही मुहुर्त है। इस वर्ष 17 मई से अधिकमास लग रहा है। यदि ज्येष्ठ मास में अधिकमास हो तो गंगा दशहरा का उत्सव उसी मास में मनाया जाता है। न कि शुद्ध मास में। धार्मिक दृष्टिकोण से अधिकमास में किये गये स्नान और दान का फल सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक प्राप्त होता है।
गंगा दशहरा के दिन काशी के दशाश्वमेधघाट पर गंगा स्नान का विशेष फल बताया जाता है। इसी स्थान पर ब्रह्मा ने अश्वमेध यज्ञ किया था। इसी के चलते इस स्थान का महत्व और और भी बढ़ जाता है। इस दिन शुद्ध मन से स्नानकर गंगा स्तुति का पाठ कर गंगा की पूजा अर्चना करनी चाहिए। इससे शारीरिक, मानसिक पापों का शमन होता है। साथ ही समस्त मनोकामनाएं पूरी हीेती है।
