- घाटों की पवित्रता और काशी की आत्मा से खिलवाड़ आखिर कब तक ?
- भदैनी से जानकी घाट सहित अन्य घाटों पर रात में बेखौफ नशे का सेवन
- देर रात तक खुली दुकानों की आड़ में पनप रहा नशे का खेल, पुलिस गश्त पर उठ रहे सवाल
वाराणसी (रणभेरी): गंगा तट पर बसे काशी के घाट, जहां कभी आध्यात्मिकता की धारा बहती थी और हर ओर मंत्रोच्चार, भजन और साधना की गूंज सुनाई देती थी, आज एक चिंताजनक बदलाव की गिरफ्त में नजर आ रहे हैं। मां गंगा के पावन किनारे अब नशे का साया गहराता जा रहा है। भदैनी और जानकी घाट के बीच का हालिया मामला इस बदलती तस्वीर को उजागर करता है, जहां देर रात खुलेआम गांजा सेवन करते युवकों का वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश है। यही हाल अन्य घाटों का भी है।
वीडियो में कुछ युवक घाट की सीढ़ियों पर बैठकर बेखौफ तरीके से गांजा रगड़ते और सेवन करते दिखाई दे रहे हैं। सबसे चिंताजनक पहलू यह रहा कि जब एक स्थानीय व्यक्ति ने इसका विरोध किया, तो युवकों ने उल्टा उसी के साथ अभद्रता और झड़प शुरू कर दी। यह घटना न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि घाटों की पवित्रता और सुरक्षा पर भी गंभीर चिंता पैदा करती है।
काशी के घाटों की पहचान सदियों से धार्मिक आस्था, तप और साधना के केंद्र के रूप में रही है। यहां की गंगा आरती, संतों का वास और श्रद्धालुओं की भक्ति इस नगरी को विशेष बनाती है। लेकिन हाल के वर्षों में पर्यटन के बढ़ते दबाव और प्रशासनिक लापरवाही के कारण घाटों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। दिन में जहां श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है, वहीं रात होते ही इन घाटों पर अनुशासनहीनता और असामाजिक गतिविधियां बढ़ जाती हैं।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि रात 10 बजे के बाद शहर के अधिकांश बाजार बंद हो जाते हैं, लेकिन घाटों पर चाय, सिगरेट और फास्ट फूड की दुकानें देर रात तक संचालित होती रहती हैं। इन दुकानों की आड़ में न केवल नशे का सेवन, बल्कि उसका अवैध कारोबार भी पनप रहा है। अंधेरे और कम निगरानी का फायदा उठाकर असामाजिक तत्व इन स्थानों को अपना सुरक्षित ठिकाना बना चुके हैं।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि अस्सी चौकी के अंतर्गत आने वाले इन घाटों पर नियमित गश्त का अभाव साफ दिखता है। यदि पुलिस की सक्रियता और उपस्थिति लगातार बनी रहे, तो इस तरह की घटनाओं पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है। फिलहाल स्थिति यह है कि रात के समय घाटों पर पुलिस की मौजूदगी बेहद सीमित नजर आती है, जिससे नशेड़ियों के हौसले बुलंद हैं। घाट किनारे रहने वाले लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि घाटों की पवित्रता और सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए। देर रात तक खुलने वाली दुकानों पर सख्त निगरानी रखी जाए और नशे के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जाए। साथ ही अस्सी चौकी पुलिस को निर्देश दिए जाएं कि वह नियमित रूप से घाटों पर गश्त करे, ताकि असामाजिक तत्वों पर अंकुश लगाया जा सके।
काशी केवल एक शहर नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक आत्मा है। यहां के घाट मां गंगा की गोद में बसे वो पवित्र स्थल हैं, जहां हर आस्था सिर झुकाती है। यदि इन घाटों पर नशे का यह साया यूं ही गहराता रहा, तो यह न केवल काशी की गरिमा को ठेस पहुंचाएगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए इस धरोहर की पवित्रता भी खतरे में पड़ जाएगी।
