- टीबी मरीजों को एक साल से नहीं मिली सहायता, पौष्टिक आहार पर संकट
- 2025 से अब तक मरीजों के खातों में नहीं पहुंची एक भी किस्त
- अस्पतालों के चक्कर काट रहे मरीज, हर जगह एक ही जवाब, ऊपर से बजट नहीं आया !
- पोषण के अभाव में दवाओं का असर घटने का खतरा, टीबी मुक्त भारत अभियान पर सवाल
वाराणसी (रणभेरी): जानलेवा बीमारी क्षय रोग (टीबी) से जूझ रहे मरीजों के लिए संचालित केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी निक्षय पोषण योजना वाराणसी में दम तोड़ती नजर आ रही है। जिले में पिछले एक वर्ष से अधिक समय से इस योजना का बजट अटका हुआ है, जिसके कारण हजारों टीबी मरीजों के सामने पौष्टिक आहार का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। वर्ष 2025 की शुरुआत से लेकर मार्च 2026 तक का लंबा समय बीत जाने के बावजूद अधिकांश पंजीकृत मरीजों के बैंक खातों में प्रोत्साहन राशि की एक भी किस्त नहीं पहुंची है।
सरकार की योजना के अनुसार टीबी मरीजों को उपचार के दौरान हर महीने 1000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जानी थी, ताकि वे दवाओं के साथ पौष्टिक आहार, जैसे दूध, फल और प्रोटीनयुक्त भोजन ले सकें। लेकिन वाराणसी में यह योजना कागजों तक सीमित रह गई है। धरातल पर मरीजों को अपने हक की राशि के लिए अस्पतालों और सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
जिले के प्रमुख स्वास्थ्य केंद्रों…विवेकानंद हॉस्पिटल, पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय चिकित्सालय (डीडीयू), शिवप्रसाद गुप्त मंडलीय अस्पताल और विभिन्न सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में इलाज करा रहे मरीजों का कहना है कि उन्हें योजना का लाभ नहीं मिल रहा। इन अस्पतालों में हर दिन दर्जनों मरीज और उनके परिजन केवल इस उम्मीद में पहुंचते हैं कि शायद आज उनके खाते में सहायता राशि आने की कोई सूचना मिले, लेकिन हर बार उन्हें निराशा ही हाथ लगती है।
मरीजों के मुताबिक जब भी वे अस्पताल प्रशासन या संबंधित विभाग से जानकारी लेने जाते हैं तो उन्हें एक ही जवाब दिया जाता है…ऊपर से बजट पास नहीं हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि जैसे ही शासन से धनराशि जारी होगी, उसे सीधे लाभार्थियों के खातों में भेज दिया जाएगा। लेकिन मरीजों का आरोप है कि इलाज की शुरुआत में बड़े-बड़े आश्वासन दिए गए थे, जबकि जरूरत पड़ने पर उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया गया।
कई मरीज बेहद गरीब परिवारों से आते हैं, जिनके लिए हर महीने मिलने वाली यह 1000 रुपये की राशि उनके पोषण का मुख्य सहारा थी। अब स्थिति यह है कि साल भर से अधिक समय बीत जाने के बावजूद एक भी किस्त न मिलने से मरीजों की आर्थिक स्थिति और स्वास्थ्य दोनों पर गंभीर असर पड़ रहा है। मरीजों का कहना है कि बिना उचित पोषण के टीबी की दवाएं शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती हैं और बीमारी से उबरने में अधिक समय लग सकता है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार जिले में हजारों टीबी मरीजों का डेटा निक्षय पोर्टल पर पूरी तरह अपडेट है, लेकिन तकनीकी और बजटीय कारणों से भुगतान ‘लंबित’ दिखाया जा रहा है।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब सरकार वर्ष 2025-26 तक भारत को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य दोहरा रही है, तब वाराणसी जैसे महत्वपूर्ण शहर में ही मरीजों को उनकी बुनियादी सहायता क्यों नहीं मिल पा रही है। इस मुद्दे को लेकर स्थानीय नागरिकों और मरीजों के परिजनों में भी आक्रोश बढ़ता जा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही लंबित बजट जारी कर मरीजों के खातों में बकाया राशि नहीं भेजी गई, तो यह लापरवाही न केवल हजारों मरीजों की सेहत के लिए खतरा बनेगी, बल्कि टीबी उन्मूलन के राष्ट्रीय लक्ष्य पर भी गंभीर सवाल खड़े करेगी। मरीजों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से तत्काल हस्तक्षेप कर योजना को फिर से पटरी पर लाने की मांग की है।
