वाराणसी (रणभेरी): सारनाथ के ऐतिहासिक उत्खनन को लेकर लंबे समय से चली आ रही ऐतिहासिक बहस पर अब विराम लग गया है। प्रमाणिक दस्तावेजों और ऐतिहासिक स्रोतों के गहन अध्ययन के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने स्वीकार किया है कि सारनाथ में प्रारंभिक उत्खनन का कार्य 18वीं शताब्दी के अंतिम दौर में बाबू जगत सिंह ने कराया था।
इस निर्णय के बाद एएसआई ने 10 फरवरी 2026 को जारी आदेश (पत्रांक F.No.T-17/10/2024-EE (35099)) के तहत सारनाथ परिसर में एक संशोधित शिलापट्ट स्थापित कर दिया है, जिसमें इस ऐतिहासिक तथ्य को दर्ज किया गया है। पहले यह जानकारी इतिहास में स्पष्ट रूप से सामने नहीं आ सकी थी।
बताया जा रहा है कि जगत सिंह रॉयल फैमिली प्रोजेक्ट शोध समिति ने इस विषय पर लगातार शोध करते हुए कई दस्तावेज और ऐतिहासिक प्रमाण जुटाए। इन्हीं तथ्यों के आधार पर एएसआई ने जांच के बाद बाबू जगत सिंह के योगदान को आधिकारिक मान्यता दी।
समिति के संरक्षक प्रदीप नारायण सिंह ने इसे वाराणसी और देश की ऐतिहासिक विरासत के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल परिवार या समिति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे पूर्वजों के योगदान को देश के सामने लाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने यह भी बताया कि इस विषय पर शोध अभी जारी है और आने वाले समय में इससे जुड़े कई अन्य ऐतिहासिक तथ्य भी सामने लाए जाएंगे, जिससे देश के इतिहास को और स्पष्ट रूप से समझने में मदद मिलेगी।
