15 वर्षीय नाबालिग से अंडाणु निकाले जाने का सनसनीखेज मामला, सरोगेसी रैकेट की आशंका

15 वर्षीय नाबालिग से अंडाणु निकाले जाने का सनसनीखेज मामला, सरोगेसी रैकेट की आशंका

आईफोन और 15 हजार के लालच में फंसाई गई किशोरी, ब्रेनवॉश और धर्मांतरण के आरोप

(रणभेरी): प्रयागराज में नाबालिग लड़कियों के शोषण से जुड़ा एक गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां 15 वर्षीय एक किशोरी से कथित तौर पर सरोगेसी के नाम पर अंडाणु निकाले गए। इसके बदले उसे एक महंगे मोबाइल फोन और नकद रुपये देने का वादा किया गया था। पुलिस जांच में इस पूरे घटनाक्रम के पीछे एक संगठित रैकेट की आशंका जताई जा रही है।

प्राथमिक जांच में सामने आया है कि किशोरी को एक महिला ने भरोसे में लेकर छोटे से मेडिकल प्रोसीजर का झांसा दिया और “नई ज़िंदगी” का सपना दिखाया। किशोरी के अनुसार, उसे न सिर्फ पैसों का लालच दिया गया, बल्कि बार-बार धर्म बदलने और भविष्य में निकाह कराने जैसी बातें भी कही जाती रहीं।

एक साल में 20 से अधिक नाबालिगों के शोषण की आशंका

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि बीते एक वर्ष में 20 से 25 कम उम्र की लड़कियों को इसी तरह निशाना बनाया गया हो सकता है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस तीन बिंदुओं पर जांच कर रही है, कितनी नाबालिग लड़कियों से अवैध रूप से अंडाणु निकाले गए। क्या इस नेटवर्क का संबंध किसी बड़े देह व्यापार या मानव तस्करी गिरोह से है।क्या आर्थिक शोषण के साथ-साथ धर्मांतरण का दबाव भी बनाया जा रहा था।फिलहाल पीड़ित किशोरी को संरक्षण में रखा गया है और उसका मेडिकल परीक्षण कराया जा रहा है।

15 वर्षीय नाबालिग से अंडाणु निकाले जाने का सनसनीखेज मामला, सरोगेसी रैकेट की आशंका

मां की शिकायत से खुली परतें

मामले की जड़ प्रयागराज के नवाबगंज क्षेत्र से जुड़ी है। यहां रहने वाली एक महिला ने पुलिस को बताया कि उसकी नाबालिग बेटी पिछले कुछ समय से एक संदिग्ध महिला के संपर्क में थी। बेटी रोज़ घर से निकलती और देर शाम लौटती थी, लेकिन सवाल करने पर टालमटोल करती थी।

15 जनवरी को किशोरी अचानक लापता हो गई। परिजनों की तलाश के बाद 21 जनवरी को पता चला कि वह सिविल लाइंस स्थित एक आईवीएफ सेंटर में भर्ती है। मां का आरोप है कि वहां पहुंचने पर जानकारी मिली कि बेटी का ऑपरेशन हो चुका है और उसके अंडाणु निकाले जा चुके हैं।

इंजेक्शन, हार्मोनल प्रक्रिया और ऑपरेशन

पीड़िता के बयान के मुताबिक, ऑपरेशन से पहले उसे लगातार इंजेक्शन दिए गए, जिससे उसका मासिक धर्म रोका गया। इसके बाद कई दिनों तक उसे आईवीएफ सेंटर बुलाया जाता रहा और अंततः सर्जरी की गई। बदले में उसे सिर्फ आंशिक रकम ही दी गई।

CWC और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई

मामला सामने आने के बाद इसे बाल कल्याण समिति (CWC) के संज्ञान में लिया गया। किशोरी और उसकी मां के बयान दर्ज किए गए हैं। समिति ने मामले को गंभीर मानते हुए किशोरी को शेल्टर होम में रखने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट होता है कि नाबालिग का मानसिक रूप से ब्रेनवॉश किया गया। धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित करने और अवैध मेडिकल प्रक्रिया के आरोपों की भी गहन जांच की जा रही है।

आरोपी महिला और नेटवर्क की तलाश

पीड़िता की मां ने पुलिस को दिए नए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया है कि एक महिला अपने परिवार के साथ मिलकर इस पूरे नेटवर्क को संचालित कर रही है। आरोप है कि पहले लड़कियों को भरोसे में लिया जाता है, फिर आईवीएफ सेंटर ले जाकर अंडाणु निकाले जाते हैं और बाद में उन्हें अलग-अलग गतिविधियों में धकेला जाता है।पुलिस का कहना है कि जांच जारी है और सभी पहलुओं की पुष्टि के बाद कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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