नवंबर-दिसंबर में शुरू होता है प्रवासी पक्षियों का आगमन, फरवरी-मार्च तक गंगा में रहेगा इनका डेरा; पर्यटकों के साथ स्थानीय नाविकों को भी होगा फायदा
वाराणसी (रणभेरी): धर्म, अध्यात्म और संस्कृति की नगरी काशी में सर्दियों की दस्तक के साथ ही गंगा घाटों की खूबसूरती में एक और आकर्षण जुड़ने जा रहा है। हर साल की तरह इस बार भी साइबेरियन सीगल समेत अन्य प्रवासी पक्षियों के आगमन का इंतजार शुरू हो गया है। हजारों किलोमीटर का सफर तय कर आने वाले इन विदेशी मेहमानों की मौजूदगी से गंगा की लहरें और घाटों का नजारा मनमोहक हो उठता है। नवंबर से दिसंबर के बीच इन पक्षियों का आगमन शुरू होता है और फरवरी-मार्च तक इनका प्रवास जारी रहता है।
हजारों किलोमीटर की दूरी तय कर पहुंचते हैं काशी
साइबेरियन सीगल जैसे प्रवासी पक्षी कड़ाके की ठंड से बचने के लिए साइबेरिया और उत्तर एशिया के अन्य ठंडे इलाकों से भारत का रुख करते हैं। वाराणसी में गंगा का शांत और खुला जलक्षेत्र इनके प्रवास के लिए अनुकूल माना जाता है। ये पक्षी मुख्य रूप से गंगा के घाटों और नदी के खुले हिस्सों में दिखाई देते हैं। करीब तीन से चार महीने तक काशी में प्रवास करने के बाद मौसम गर्म होने पर फरवरी से मार्च के बीच अपने मूल ठिकानों की ओर लौट जाते हैं।
सुबह की नाव यात्रा में दिखता है मनमोहक नजारा
प्रवासी पक्षियों का सबसे खूबसूरत नजारा सुबह के समय देखने को मिलता है। सूर्योदय की पहली किरणें जब गंगा की लहरों पर पड़ती हैं और सफेद सीगल का झुंड आसमान में अठखेलियां करता नजर आता है, तो दृश्य देखते ही बनता है। सुबह गंगा में नाव की सैर करने वाले पर्यटकों के लिए ये पक्षी खास आकर्षण होते हैं। पानी के ऊपर उड़ान भरते, लहरों के बीच तैरते और नावों के आसपास मंडराते इन पक्षियों को देखकर पर्यटक रोमांचित हो उठते हैं। कई पर्यटक इन्हें दाना खिलाकर इस यादगार पल को कैमरे में कैद करते हैं।
प्रवासी पक्षियों से पर्यटन कारोबार को मिलेगा बढ़ावा
साइबेरियन सीगल का आगमन काशी के प्राकृतिक सौंदर्य के साथ स्थानीय पर्यटन कारोबार को भी नई रफ्तार देता है। इन विदेशी मेहमानों को देखने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से पर्यटक वाराणसी पहुंचते हैं। सुबह की नाव यात्रा की मांग बढ़ने से स्थानीय नाविकों को रोजगार के अतिरिक्त अवसर मिलते हैं। पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही का सीधा लाभ नाव संचालन से जुड़े लोगों की आमदनी पर पड़ता है। इस तरह प्रवासी पक्षियों की मौजूदगी काशी के शीतकालीन पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था दोनों के लिए अहम साबित होती है।
काशी की सर्दियों की खास पहचान हैं विदेशी मेहमान
गंगा के घाट, ऐतिहासिक इमारतें, सुबह-ए-बनारस की अलौकिक छटा और गंगा की लहरों पर अठखेलियां करते सफेद प्रवासी पक्षी काशी की सर्दियों को खास पहचान देते हैं। ठंड बढ़ने के साथ इन पक्षियों की संख्या में भी इजाफा होने की उम्मीद रहती है। ऐसे में आने वाले दिनों में गंगा घाटों पर पर्यटकों की रौनक और बढ़ सकती है। काशी की सुबह का दीदार करने आने वाले सैलानियों के लिए साइबेरियन सीगल का झुंड एक बार फिर आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनने को तैयार है।
