बीएचयू में छात्रसंघ बहाली की मांग, अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे छात्र

बीएचयू में छात्रसंघ बहाली की मांग, अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे छात्र

27 अक्टूबर तक जवाब नहीं मिलने पर शुरू किया आंदोलन, चुनाव की तारीख घोषित होने तक धरना जारी रखने का ऐलान

वाराणसी (रणभेरी): काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में छात्रसंघ बहाली की मांग को लेकर मंगलवार को छात्रों ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। छात्र छात्रसंघ भवन परिसर स्थित डीन ऑफ स्टूडेंट्स वेलफेयर (डीएसडब्ल्यू) कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए और नारेबाजी कर अपनी मांग उठाई। छात्रों ने स्पष्ट किया कि जब तक छात्रसंघ चुनाव की तारीख घोषित नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय में वर्ष 1997 से छात्रसंघ बंद है। इसके चलते विद्यार्थियों के पास अपनी समस्याओं को प्रशासन के सामने प्रभावी ढंग से रखने के लिए निर्वाचित प्रतिनिधि नहीं हैं। छात्र शिवांश सिंह और सामाजिक विज्ञान संकाय के छात्र सत्यम सिंह ने बताया कि छात्रसंघ बहाली के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन को पहले ही ज्ञापन सौंपा गया था। इसमें 27 अक्टूबर तक सकारात्मक जवाब देने या चुनाव की तिथि घोषित करने की मांग की गई थी। निर्धारित समय तक जवाब नहीं मिलने पर छात्रों ने धरना शुरू करने का निर्णय लिया।

मेस, पानी और छात्रावास की समस्याएं उठाईं

धरने पर बैठे छात्रों ने छात्रावासों में भोजन की गुणवत्ता, पीने के पानी और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का मुद्दा उठाया। उनका आरोप है कि शिकायतों के बावजूद विद्यार्थियों की समस्याओं का उचित समाधान नहीं हो पाता। इसके अलावा छात्राओं के लिए रात 10 बजे के बाद छात्रावास से बाहर निकलने पर लागू पाबंदियों को लेकर भी सवाल उठाए गए।

सत्यम सिंह ने कहा कि छात्रसंघ विद्यार्थियों को निर्वाचित प्रतिनिधित्व प्रदान करता है। इसके माध्यम से छात्र अपनी समस्याएं विश्वविद्यालय प्रशासन तक पहुंचाने के साथ ही जवाबदेही भी तय कर सकते हैं। उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रसंघ बहाली को लेकर हुए आंदोलनों का उल्लेख करते हुए बीएचयू में भी छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग की।

चुनाव में विवाद की आशंका पर कार्रवाई की मांग

छात्रसंघ चुनाव के दौरान मारपीट और विवाद की आशंका को लेकर शिवांश सिंह ने कहा कि किसी भी चुनाव में अराजक तत्वों की मौजूदगी की आशंका हो सकती है। ऐसे मामलों में चुनाव बंद करने के बजाय संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने में विश्वविद्यालय और जिला प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका है।

भूख हड़ताल और मार्च की चेतावनी

छात्रों ने चेतावनी दी कि मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर भूख हड़ताल और आमरण अनशन जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं। छात्रों ने बताया कि वे छात्रावासों में जाकर अन्य विद्यार्थियों से संपर्क करेंगे और उन्हें आंदोलन से जोड़ने का प्रयास करेंगे। इसके साथ ही विभिन्न छात्र संगठनों से छात्रसंघ बहाली की मांग के समर्थन में आगे आने की अपील की गई है।

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