(रणभेरी): बहुजन समाज पार्टी (BSP) के संस्थापक कांशीराम की पुण्यतिथि पर शुक्रवार को लखनऊ में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। बसपा सुप्रीमो मायावती ने प्रदेश कार्यालय में कांशीराम के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। इस दौरान उनके भतीजे आकाश आनंद भी मौजूद रहे। पार्टी में दोबारा जिम्मेदारी मिलने के बाद यह पहला अवसर था, जब आकाश आनंद सार्वजनिक रूप से मायावती के साथ दिखाई दिए।
सुबह करीब 9 बजे मायावती बसपा प्रदेश कार्यालय पहुंचीं। उन्होंने कांशीराम के चित्र पर फूल चढ़ाकर श्रद्धांजलि दी। इसके बाद उन्होंने आकाश आनंद को भी आगे आकर पुष्प अर्पित करने का संकेत दिया। आकाश ने चित्र पर फूल चढ़ाए और झुककर कांशीराम को नमन किया।
दिल्ली से लखनऊ बुलाए गए आकाश आनंद
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, मायावती ने गुरुवार रात आकाश आनंद को दिल्ली से लखनऊ आने के लिए कहा था। वहीं, उनके पिता आनंद कुमार और छोटे भाई ईशान आनंद दिल्ली में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में शामिल हुए।
लखनऊ के कार्यक्रम में बसपा प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल और राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा भी मौजूद रहे। कांशीराम की पुण्यतिथि पर बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता अंबेडकर पार्क में एकत्र हुए। यहां विश्वनाथ पाल के नेतृत्व में श्रद्धांजलि सभा समेत अन्य कार्यक्रम आयोजित किए गए।
मायावती ने कांशीराम के योगदान को किया याद
मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कांशीराम को याद करते हुए कहा कि उन्होंने बहुजन समाज को जागरूक किया और वंचित वर्गों को राजनीतिक शक्ति का महत्व समझाया। उनके प्रयासों से दलितों, आदिवासियों और पिछड़े तबकों को लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी भागीदारी बढ़ाने की प्रेरणा मिली।

उन्होंने कहा कि कांशीराम के विचारों और संघर्षों से प्रेरित होकर बसपा ने उत्तर प्रदेश में चार बार सरकार बनाई। मायावती ने महात्मा ज्योतिबा फुले, नारायण गुरु, छत्रपति शाहूजी महाराज और डॉ. भीमराव आंबेडकर के सामाजिक समानता के विचारों का भी उल्लेख किया।
आकाश आनंद ने मायावती की इस पोस्ट को री-पोस्ट किया। वहीं, दिवंगत बसपा विधायक उमाशंकर सिंह के बेटे यूकेश सिंह ने भी कांशीराम को श्रद्धांजलि देते हुए सामाजिक न्याय और वंचितों के अधिकारों के लिए उनके संघर्ष को याद किया।
माफी के बाद आकाश को फिर मिली थी पार्टी में जिम्मेदारी
आकाश आनंद की बसपा में वापसी हाल के दिनों में पार्टी की राजनीति का प्रमुख घटनाक्रम रही है। मायावती ने 3 सितंबर को उन्हें राष्ट्रीय संयोजक के पद से हटा दिया था। इसके बाद 5 अक्टूबर को उन्हें दोबारा यह जिम्मेदारी सौंप दी गई। आकाश ने 2 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर मायावती को अपना राजनीतिक गुरु और प्रेरणास्रोत बताते हुए उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया था। उन्होंने बसपा को अपना परिवार भी बताया था। साथ ही, अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से अलग होने के फैसले का समर्थन किया था।
आकाश की वापसी पर मायावती ने कहा था कि शादी से पहले उन्हें कभी पार्टी से बाहर नहीं करना पड़ा था। उनके मुताबिक, शादी के बाद अशोक सिद्धार्थ के प्रभाव के कारण आकाश के राजनीतिक फैसलों में बदलाव आया। अब कांशीराम की पुण्यतिथि पर मायावती और आकाश का एक साथ दिखाई देना बसपा के भीतर उनके संबंधों और संगठन में आकाश की दोबारा सक्रिय भूमिका के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
