- रूस के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में प्रो. कमलेश कुमार सिंह ने पेश किया शोध
- पीसीबी से 100% तांबा और 92% सोना रिकवर करने की क्षमता प्रदर्शित
वाराणसी (रणभेरी): ई-कचरा पर्यावरण के लिए चुनौती बनने के साथ ही कीमती और महत्वपूर्ण धातुओं का बड़ा भंडार भी है। आईआईटी-बीएचयू के धातुकर्म इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर कमलेश कुमार सिंह ने ई-कचरे से उपयोगी धातुओं की रिकवरी को लेकर किए गए शोध को रूस के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में प्रस्तुत किया। 23 से 25 सितंबर तक रूस के नालचिक में आयोजित GEO-SUSTAINABILITY BRICS 2026 सम्मेलन में उन्होंने ई-कचरे से सोना, तांबा समेत अन्य धातुओं की रिकवरी की तकनीकी संभावनाओं पर जानकारी साझा की। शोध में डेलमिनेटेड प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (पीसीबी) से 100 प्रतिशत तांबा और 92 प्रतिशत सोना निकालने की क्षमता प्रदर्शित की गई। इसके अलावा टैंटलम कैपेसिटर से 99 प्रतिशत मैंगनीज की रिकवरी हुई, जिसकी शुद्धता 99.6 प्रतिशत तक रही। शोध में चांदी समेत अन्य धातुओं की रिकवरी की संभावनाओं का भी अध्ययन किया गया है।
प्रो. सिंह के अनुसार मोबाइल, कंप्यूटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से निकलने वाले ई-कचरे में सीसा, पारा और कैडमियम जैसे खतरनाक तत्व पाए जाते हैं। वहीं, इनके पीसीबी में सोना, चांदी, तांबा और टैंटलम जैसी मूल्यवान धातुएं मौजूद रहती हैं। ऐसे में ई-कचरे का वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण पर्यावरणीय जोखिम कम करने के साथ धातुओं की दोबारा प्राप्ति का रास्ता खोल सकता है।
शोध में लीचिंग, सॉल्वेंट एक्सट्रैक्शन, हाइड्रोमेटलर्जी, बायो-हाइड्रोमेटलर्जी और इलेक्ट्रोविनिंग जैसी तकनीकों के संयोजन पर जोर दिया गया है। बेहद कम मात्रा में मौजूद धातुओं की रिकवरी के लिए पॉलीमर इनक्लूजन मेंब्रेन तकनीक का भी अध्ययन किया गया। सम्मेलन में रूस, भारत, चीन, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, तुर्की और उज्बेकिस्तान समेत कई देशों के वैज्ञानिक शामिल हुए।
