रंगमंच में शिक्षा पर शोधपत्र प्रस्तुत कर संस्कृति, मनोरंजन और रचनात्मक उद्योग के विकास का खाका रखा
वाराणसी (रणभेरी): सकलडीहा पीजी कॉलेज में समाजशास्त्र विभाग एवं पार्श्वनाथ विद्यापीठ, वाराणसी के संयुक्त तत्वावधान में ‘विकसित भारत 2047 : चुनौतियां एवं संभावनाएं’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में बनारस के वरिष्ठ रंगकर्मी, अभिनेता, निर्देशक, कवि, लेखक, समाज वैज्ञानिक एवं जैक्सन-कमिंस डीलर अजय पाठक ने ‘रंगमंच में शिक्षा के द्वारा विकसित भारत के सांस्कृतिक, आध्यात्मिक एवं रचनात्मक उद्योग का विकास’ विषय पर शोधपत्र प्रस्तुत किया।
अजय पाठक ने अपने शोधपत्र में बताया कि रंगमंच केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि शिक्षा, संस्कृति, सामाजिक चेतना और रोजगार सृजन का प्रभावी साधन भी बन सकता है। उन्होंने रंगमंच को शिक्षा से जोड़कर विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में रचनात्मक उद्योगों की भूमिका को विस्तार से रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित तरीके से रंगमंच को शिक्षा, पर्यटन, सांस्कृतिक विरासत और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़कर रोजगार के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं। इससे बनारस की समृद्ध रंगमंचीय परंपरा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने के साथ अर्थतंत्र को भी मजबूती मिल सकती है।
संगोष्ठी का शुभारंभ करते हुए कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने कहा कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में शिक्षा और ज्ञान को विकास की केंद्रीय शक्ति बनाना होगा। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के सदस्य डॉ. हरेंद्र कुमार राय ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल और सामाजिक उत्तरदायित्व पर जोर दिया। पार्श्वनाथ विद्यापीठ के कार्यकारी निदेशक डॉ. श्री प्रकाश पाण्डेय ने भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कृति को विकसित भारत की आधारभूमि बताया। संगोष्ठी में शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी मौजूद रहे।
