वाराणसी (रणभेरी): गंगा का जलस्तर घटते ही अस्सी घाट पर जगह को लेकर विवाद सामने आने लगा है। करीब एक महीने तक बाढ़ की चपेट में रहे घाट पर पानी उतरने के बाद सिल्ट हटाने और साफ-सफाई का काम चल रहा है। इसी बीच दुकान, चौकी और बैठने की जगह को लेकर अलग-अलग पक्षों में दावे शुरू हो गए। शनिवार सुबह विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों में गाली-गलौज के बाद मारपीट हो गई। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
बाढ़ के दौरान अस्सी घाट का बड़ा हिस्सा सिल्ट से पट गया था। जलस्तर कम होने के बाद घाट की सीढ़ियों और आसपास के हिस्से से सिल्ट हटाई जा रही है। इसी दौरान दुकान लगाने वाले लोगों और तीर्थ पुरोहित परिवार के बीच जगह को लेकर विवाद शुरू हुआ।

तीर्थ पुरोहित परिवार का आरोप है कि गंगा का पानी उतरने के बाद उन्होंने अपने स्तर से घाट पर जमा सिल्ट हटवाकर अपनी इस्तेमाल वाली जगह को साफ कराया था। इसके बाद जब वह जगह को व्यवस्थित कर रहे थे, तभी वहां दुकान लगाने वाले कुछ लोगों ने विरोध शुरू कर दिया। दूसरी ओर दुकानदारों का कहना है कि वे लंबे समय से उसी स्थान पर दुकान लगाते आ रहे हैं। पानी उतरने के बाद भी वे अपनी पुरानी जगह पर ही दुकान लगाएंगे।
टीका-चंदन की चौकियों को लेकर भी सवाल
अस्सी घाट पर विवाद अस्थायी दुकानों तक ही सीमित नहीं है। तीर्थ पुरोहित परिवार का आरोप है कि घाट पर टीका-चंदन लगाने वाले कुछ लोगों ने भी जगह-जगह चौकियां लगा रखी हैं। उनका कहना है कि सार्वजनिक घाट की सीमित जगह में दुकानें और चौकियां लगने से श्रद्धालुओं के आवागमन में परेशानी होती है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, गंगा का जलस्तर बढ़ने के दौरान कई अस्थायी दुकानें और चौकियां हट गई थीं। अब पानी घटने और घाट का हिस्सा सूखने के साथ ही पुरानी जगहों पर दोबारा दुकानें और चौकियां लगाने को लेकर विवाद शुरू हो गया है।
नगर निगम की रसीद को लेकर उठे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्सी घाट पर बड़ी संख्या में अस्थायी दुकानें लगती हैं। कुछ दुकानदारों का दावा है कि नगर निगम की ओर से उनकी रसीद भी काटी जाती है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि घाट की सार्वजनिक जगह पर दुकान लगाने की अनुमति किस आधार पर दी जाती है और दुकानदारों के लिए जगह का निर्धारण कौन करता है। विवाद के बाद अब घाट पर दुकान और चौकी लगाने की व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
