वाराणसी (रणभेरी): सुमेरु पीठ के पीठाधीश्वर शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती की अध्यक्षता में वाराणसी में संतों की बैठक हुई। इसमें धर्म रक्षा, राष्ट्र रक्षा, गौ रक्षा, सनातन समाज की सुरक्षा, मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने, धर्मांतरण पर रोक और सामाजिक समरसता समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई। संतों ने देश की एकता और अखंडता के लिए जातिगत विभाजन से ऊपर उठकर समाज को एकजुट होने का आह्वान किया।
शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि महायज्ञ का उद्देश्य सनातन धर्म और सनातनियों का संरक्षण-संवर्धन, राष्ट्र की सुरक्षा और समृद्धि की कामना करना है। उन्होंने भारतीय थल सेना, नौसेना और वायुसेना को विशेष शक्ति मिलने तथा देश की सीमाओं की सुरक्षा के लिए प्रार्थना की। उन्होंने भारत के विश्व की उभरती महाशक्ति के रूप में आगे बढ़ने की भी कामना की।

मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने की मांग
संत सम्मेलन में मंदिरों के सरकारी नियंत्रण का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। शंकराचार्य ने मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने की मांग की। उन्होंने धर्मांतरण पर रोक लगाने के साथ धार्मिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और सुरक्षा के लिए स्पष्ट व्यवस्था की जरूरत बताई। देश में सभी लोगों के लिए समान व्यवस्था लागू किए जाने पर भी जोर दिया गया।

जातिगत विभाजन से ऊपर उठने की अपील
शंकराचार्य ने कहा कि जाति के नाम पर समाज में दूरी बढ़ाने के बजाय सामाजिक समरसता और एकता को मजबूत किया जाना चाहिए। गरीबी किसी एक जाति तक सीमित नहीं है। हर जाति और वर्ग में गरीब और संपन्न लोग हैं। ऐसे में सरकारी नीतियां बनाते समय आर्थिक स्थिति को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। सम्मेलन में सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाते हुए भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था की मांग की गई।
आर्थिक आधार पर आरक्षण की वकालत
आरक्षण के मुद्दे पर शंकराचार्य ने जाति के बजाय आर्थिक स्थिति को आधार बनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से संपन्न व्यक्ति को केवल जातिगत आधार पर आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए, जबकि जरूरतमंद गरीबों को शिक्षा, रोजगार और अन्य अवसरों में सहायता मिलनी चाहिए। आर्थिक रूप से कमजोर लोगों तक आवास, शौचालय और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से पहुंचाने की बात कही गई।

सांसद-विधायकों की पेंशन व्यवस्था पर सवाल
संत सम्मेलन में सांसदों, विधायकों और विधान परिषद सदस्यों की पेंशन व्यवस्था पर भी सवाल उठाए गए। शंकराचार्य ने कहा कि आईएएस, आईपीएस, इंजीनियर और प्रोफेसर समेत विभिन्न क्षेत्रों में पेंशन के अलग-अलग नियम हैं। ऐसे में सांसदों और विधायकों की पेंशन व्यवस्था पर भी पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
नेपाल की आपदा में प्रभावित लोगों के लिए प्रार्थना
सम्मेलन में प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित लोगों की सुरक्षा के लिए प्रार्थना की गई। नेपाल में आई आपदा का उल्लेख करते हुए शंकराचार्य ने दैवीय आपदाओं से लोगों की रक्षा की कामना की। उन्होंने कहा कि सनातन समाज के लोग पूरी दुनिया में सुरक्षित रहें और मानवता को आपदाओं से बचाने के लिए प्रार्थना की गई। सम्मेलन में देश की अखंडता, सीमाओं की सुरक्षा और सामाजिक एकता बनाए रखने पर जोर दिया गया।
