वाराणसी (रणभेरी): धर्म और आस्था की नगरी काशी इन दिनों गणेश उत्सव के रंग में रंगी नजर आ रही है। शहर के ठठेरी बाजार स्थित ऐतिहासिक शेरवाली कोठी में आयोजित गणपति महोत्सव श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यहां मुंबई के प्रसिद्ध लालबाग के राजा की प्रतिमूर्ति स्थापित की गई है, जिसके दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
करीब छह फीट ऊंची गणपति प्रतिमा को आकर्षक ढंग से सजाए गए भव्य पंडाल में स्थापित किया गया है। पंडाल की सजावट और धार्मिक वातावरण लोगों को अपनी ओर खींच रहा है। सुबह से लेकर देर शाम तक भक्तों के पहुंचने का सिलसिला जारी है। श्रद्धालु गणपति बप्पा के समक्ष शीश नवाकर परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की प्रार्थना कर रहे हैं।
पांच दिनों तक चलेगा धार्मिक आयोजन
गणेश उत्सव के पांच दिवसीय आयोजन में प्रतिदिन धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जा रहा है। वैदिक विधि-विधान से भगवान गणेश की पूजा-अर्चना के साथ महाआरती का आयोजन हो रहा है। आरती के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होकर गणपति बप्पा के जयकारे लगा रहे हैं।

उत्सव स्थल पर भजन-कीर्तन के साथ विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। धार्मिक गीतों और गणपति के जयघोष से शेरवाली कोठी का पूरा परिसर भक्तिमय वातावरण में डूबा हुआ है। शाम के समय पंडाल में श्रद्धालुओं की भीड़ और बढ़ जाती है।
लालबाग के राजा की प्रतिमूर्ति बनी आकर्षण
मुंबई के लालबाग क्षेत्र में विराजमान प्रसिद्ध लालबाग के राजा की प्रतिमूर्ति को काशी में स्थापित किया जाना इस बार के गणेश उत्सव की प्रमुख विशेषताओं में शामिल है। प्रतिमा की भव्यता और सजावट श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही है।
आयोजकों की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पूजा और दर्शन की व्यवस्था की गई है। भक्त परिवार के साथ पहुंचकर गणपति बप्पा का आशीर्वाद ले रहे हैं। कई श्रद्धालुओं का कहना है कि काशी में मुंबई की प्रसिद्ध गणेश उत्सव परंपरा की झलक देखना अपने आप में विशेष अनुभव है।

काशी और महाराष्ट्र की परंपरा का संगम
शेरवाली कोठी में आयोजित यह उत्सव धार्मिक दृष्टि से भी खास माना जा रहा है। एक ओर काशी की सदियों पुरानी आध्यात्मिक परंपरा है, वहीं दूसरी ओर महाराष्ट्र की प्रसिद्ध गणेशोत्सव संस्कृति की झलक देखने को मिल रही है। दोनों परंपराओं के इस मेल ने आयोजन को और खास बना दिया है।
गणपति उत्सव के दौरान पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। पंडाल में होने वाली आरती, भजनों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में लोग उत्साह के साथ भाग ले रहे हैं। गणपति बप्पा के जयकारों से पूरा परिसर गूंज रहा है।
श्रद्धालुओं के लिए यह आयोजन केवल भगवान गणेश के दर्शन का अवसर नहीं, बल्कि अलग-अलग क्षेत्रों की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को करीब से महसूस करने का माध्यम भी बन गया है। पांच दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में धार्मिक आयोजनों के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक सहभागिता भी देखने को मिल रही है।
