वाराणसी (रणभेरी): धर्म और आस्था की नगरी काशी में हरतालिका तीज का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। पर्व के मौके पर पंचगंगा घाट स्थित प्रसिद्ध मां मंगला गौरी मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। बड़ी संख्या में महिलाएं मां के दर्शन-पूजन के लिए मंदिर पहुंचीं। सुहागिन महिलाओं ने जहां पति की दीर्घायु, अखंड सौभाग्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की, वहीं कुंवारी युवतियों ने अच्छे जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए मां के चरणों में प्रार्थना की।
तीज के अवसर पर मंदिर परिसर में भक्तिमय माहौल देखने को मिला। महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सज-धजकर पूजा की थाल लेकर मंदिर पहुंचीं। कई श्रद्धालुओं ने मां को हल्दी, कुमकुम, चुनरी और सुहाग की सामग्री अर्पित कर वैवाहिक जीवन में सुख-शांति की कामना की। दर्शन के दौरान मंदिर परिसर में धार्मिक अनुष्ठान और पूजा-पाठ का क्रम चलता रहा।

सुहाग की लंबी उम्र और दांपत्य सुख की कामना
हरतालिका तीज को महिलाओं के प्रमुख व्रतों में माना जाता है। इस दिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करती हैं। काशी में इस पर्व का विशेष धार्मिक महत्व है। मां मंगला गौरी के दरबार में पहुंचने वाली महिलाओं का कहना है कि वे माता से अपने पति की लंबी आयु, परिवार की खुशहाली और दांपत्य जीवन में प्रेम व सौहार्द बनाए रखने की प्रार्थना करती हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार मां मंगला गौरी को सौभाग्य और मंगल की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। इसी कारण तीज के अवसर पर मंदिर में सुहाग सामग्री चढ़ाने और विशेष पूजा करने की परंपरा है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि विधि-विधान से मां की आराधना करने से जीवन में सुख-शांति आती है और वैवाहिक परेशानियों से मुक्ति का आशीर्वाद मिलता है।
कुंवारी कन्याओं ने भी की मनचाहे वर की कामना
मां मंगला गौरी के मंदिर में केवल सुहागिन महिलाएं ही नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में अविवाहित युवतियां भी पहुंचीं। उन्होंने मां के समक्ष शीघ्र विवाह और मनपसंद जीवनसाथी मिलने की प्रार्थना की। कई युवतियों ने माता को श्रृंगार सामग्री अर्पित कर पूजा-अर्चना की।
मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। इसी धार्मिक प्रसंग से हरतालिका तीज का संबंध जोड़ा जाता है। इसलिए अविवाहित कन्याएं भी इस दिन व्रत और पूजन कर मनचाहे वर की प्राप्ति की कामना करती हैं।
मंगल दोष दूर होने की भी मान्यता
मंदिर से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं में मां मंगला गौरी की उपासना का संबंध मंगल ग्रह से भी बताया जाता है। मंदिर के महंत नारायण गुरु के अनुसार, श्रद्धालुओं में ऐसी आस्था है कि मां की पूजा-अर्चना करने से मंगल ग्रह से जुड़ी बाधाओं और मंगल दोष के प्रभाव को कम करने में सहायता मिलती है।
इसी विश्वास के चलते कई भक्त मंदिर में विशेष पूजा, दीपदान और अन्य धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। तीज के दिन दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भी बढ़ जाती है। महिलाएं लंबे समय तक कतार में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करती नजर आईं और मां के दर्शन के बाद प्रसाद ग्रहण किया।

पंचगंगा घाट स्थित मंदिर की अपनी अलग पहचान
पंचगंगा घाट के निकट स्थित मां मंगला गौरी मंदिर काशी के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। मंदिर की धार्मिक परंपरा और यहां स्थापित देवी-देवताओं के कारण इसका विशेष महत्व माना जाता है। इसे पंचायत्तन मंदिर के रूप में भी जाना जाता है।
मंदिर परिसर में मां गौरी के साथ भगवान शिव, भगवान विष्णु, हनुमान जी समेत अन्य देवी-देवताओं की पूजा का भी विधान बताया जाता है। यही कारण है कि वर्षभर यहां श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है। विशेष पर्वों पर मंदिर में भक्तों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है।

विशेष श्रृंगार ने खींचा श्रद्धालुओं का ध्यान
हरतालिका तीज के अवसर पर मां मंगला गौरी का विशेष श्रृंगार किया गया। फूलों और पारंपरिक पूजन सामग्री से मां का श्रृंगार कर भक्तों के लिए दर्शन की व्यवस्था की गई। मंदिर पहुंचने वाली महिलाओं ने मां के समक्ष सुहाग की सामग्री अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना की।
श्रद्धालुओं की मान्यता है कि मां मंगला गौरी के दरबार में सच्चे मन से की गई प्रार्थना से वैवाहिक जीवन में आने वाली परेशानियां दूर होती हैं। संतान सुख और दांपत्य जीवन में सुख-शांति की कामना लेकर भी बड़ी संख्या में महिलाएं यहां पहुंचती हैं।
