सावन में बदला वाराणसी का मौसम, बूंदाबांदी के बीच बढ़ी उमस; गंगा का जलस्तर फिर चढ़ा, नौकाओं पर रोक

सावन में बदला वाराणसी का मौसम, बूंदाबांदी के बीच बढ़ी उमस; गंगा का जलस्तर फिर चढ़ा, नौकाओं पर रोक

वाराणसी (रणभेरी): सावन के बीच वाराणसी में मौसम का मिजाज लगातार उतार-चढ़ाव वाला बना हुआ है। सोमवार सुबह से ही शहर में बादलों की आवाजाही रही। आसमान पर हल्के बादल छाए रहने के साथ कई इलाकों में रुक-रुककर बूंदाबांदी भी हुई। हालांकि बारिश बहुत तेज नहीं रही, लेकिन वातावरण में नमी बढ़ने से लोगों को उमस का सामना करना पड़ा।

सोमवार को शहर का अधिकतम तापमान करीब 32 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया गया। हवा की गति लगभग 10 किलोमीटर प्रति घंटे रही, जबकि वातावरण में नमी का स्तर करीब 73 प्रतिशत रहा। नमी अधिक होने के कारण तापमान सामान्य से बहुत ज्यादा नहीं होने के बावजूद गर्मी और चिपचिपाहट का अहसास बना रहा।

आधी रात के बाद हुई बारिश ने दी राहत

इससे पहले रविवार देर रात मौसम ने करवट ली। रात करीब 12 बजे के बाद सावन के बादल वाराणसी पर मेहरबान हुए और शहर के कई हिस्सों में बारिश शुरू हो गई। वरुणापार समेत अलग-अलग क्षेत्रों में कहीं हल्की तो कहीं अपेक्षाकृत तेज बारिश दर्ज की गई। बारिश का दौर रात करीब एक बजे के बाद तक चलता रहा।

रात में हुई बारिश के कारण कुछ समय के लिए तापमान में गिरावट आई और लोगों को गर्मी से राहत मिली। हालांकि सोमवार सुबह बादलों के बीच उमस फिर बढ़ गई।

दक्षिण की ओर खिसक रही मानसून द्रोणिका

मौसम वैज्ञानिक प्रो. मनोज श्रीवास्तव के अनुसार, मानसून द्रोणिका इन दिनों अपने सामान्य स्थान से कुछ दक्षिण दिशा की ओर खिसक रही है। मौसम की इसी स्थिति के कारण पूर्वांचल में बादल बनने और हल्की बारिश की संभावना बनी हुई है।

वाराणसी और आसपास के इलाकों में आने वाले समय में भी बादलों की आवाजाही के साथ हल्की बारिश देखने को मिल सकती है। हालांकि बारिश की तीव्रता और स्थान में बदलाव मौसम की मौजूदा परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

सावन में बदला वाराणसी का मौसम, बूंदाबांदी के बीच बढ़ी उमस; गंगा का जलस्तर फिर चढ़ा, नौकाओं पर रोक

गंगा के जलस्तर में फिर शुरू हुई बढ़ोतरी

मौसम के बदलाव के बीच वाराणसी में गंगा का जलस्तर भी चिंता बढ़ा रहा है। रविवार को दिनभर जलस्तर लगभग स्थिर रहने के बाद शाम होते-होते इसमें फिर बढ़ोतरी दर्ज की गई। जलस्तर बढ़ने की रफ्तार फिलहाल धीमी है और यह आधा सेंटीमीटर प्रति घंटे से भी कम बताई जा रही है, लेकिन पानी बढ़ने के साथ गंगा की धार और लहरों का असर भी दिखाई देने लगा है।

तेज हवा और बढ़ते जलस्तर के कारण गंगा में लहरें उठ रही हैं। स्थिति को देखते हुए प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने सतर्कता बढ़ा दी है।

छोटी-बड़ी सभी नावों के संचालन पर रोक

गंगा में बढ़े बहाव और मौसम की स्थिति को देखते हुए सुरक्षा के लिहाज से छोटी-बड़ी सभी नौकाओं के संचालन पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। प्रशासन का मानना है कि तेज बहाव के बीच नावों का संचालन जोखिम भरा साबित हो सकता है।

वहीं, क्रूज के संचालन पर अभी रोक नहीं लगाई गई है। अधिकारियों का कहना है कि यदि आने वाले समय में गंगा का जलस्तर और बढ़ता है या परिस्थितियां प्रतिकूल होती हैं, तो क्रूज संचालन को लेकर भी आगे निर्णय लिया जा सकता है।

जल पुलिस प्रभारी निरीक्षक सुधीर त्रिपाठी ने बताया कि गंगा में बहाव तेज होने की स्थिति में नावों का संचालन यात्रियों और नाविकों दोनों के लिए खतरा पैदा कर सकता है। इसी वजह से एहतियात के तौर पर नावों को चलाने पर रोक लगाई गई है। प्रशासन की प्राथमिकता लोगों की सुरक्षा है और जलस्तर की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

दशाश्वमेध घाट पर फिर बदली गंगा आरती की जगह

गंगा का बढ़ता जलस्तर अब घाटों पर होने वाली धार्मिक गतिविधियों को भी प्रभावित करने लगा है। पानी बढ़ने के कारण दशाश्वमेध घाट पर गंगा आरती का स्थान एक बार फिर बदलना पड़ा। रविवार शाम घाट की निचली सीढ़ियों तक बाढ़ का पानी पहुंच गया था। इसके बावजूद गंगा आरती देखने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ में खास कमी नहीं आई। श्रद्धालु बदले हुए स्थान से आरती में शामिल हुए।

घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है। जल पुलिस और एनडीआरएफ की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं। दशाश्वमेध घाट से मीर घाट होते हुए ललिता घाट के गंगाद्वार से विश्वनाथ धाम की ओर जाने वाले श्रद्धालुओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।

सुरक्षा टीमें श्रद्धालुओं को गंगा के बढ़े हुए जलस्तर और तेज बहाव से दूर रहने की अपील कर रही हैं। घाटों पर पानी की स्थिति को देखते हुए लोगों से अनावश्यक रूप से नदी के करीब नहीं जाने को कहा जा रहा है।

मणिकर्णिका घाट का निचला शवदाह स्थल पानी में डूबा

गंगा के बढ़ते पानी का असर मणिकर्णिका घाट पर भी दिखाई दे रहा है। घाट का निचला शवदाह स्थल जलमग्न हो गया है। इसके कारण अंतिम संस्कार के लिए आने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

पानी बढ़ने के कारण निचले हिस्से में गतिविधियां प्रभावित हुई हैं और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ही अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ रही है। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां घाटों की स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं।

घाटों पर बढ़ी निगरानी

गंगा के जलस्तर में दोबारा बढ़ोतरी के बाद वाराणसी के प्रमुख घाटों पर निगरानी बढ़ा दी गई है। जल पुलिस और एनडीआरएफ की टीमें लगातार संवेदनशील क्षेत्रों का निरीक्षण कर रही हैं। श्रद्धालुओं और पर्यटकों को गहरे पानी में जाने से बचने तथा घाटों के निचले हिस्सों में सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।

फिलहाल वाराणसी में एक ओर सावन की बारिश का दौर बना हुआ है, वहीं दूसरी तरफ गंगा के बढ़ते जलस्तर ने घाटों और नदी से जुड़ी गतिविधियों के सामने चुनौती खड़ी कर दी है। प्रशासन की नजर जलस्तर में होने वाले अगले बदलाव पर टिकी है।

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