रास्ता बंद होने से परेशान महिला ने दी जान, मौत के बाद भी नहीं खुला रास्ता

रास्ता बंद होने से परेशान महिला ने दी जान, मौत के बाद भी नहीं खुला रास्ता

वाराणसी (रणभेरी): बड़ागांव थाना क्षेत्र के अहरक गांव में रास्ते को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद एक परिवार के लिए बेहद दर्दनाक मोड़ पर पहुंच गया। घर से बाहर आने-जाने का रास्ता बंद होने की समस्या से परेशान 50 वर्षीय कविता उपाध्याय ने बुधवार शाम कथित तौर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। परिवार का आरोप है कि करीब दो वर्षों से रास्ते से कब्जा हटवाने के लिए वह लगातार अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर काट रही थीं।

परिजनों का कहना है कि मामले को लेकर जिलाधिकारी की जनसुनवाई से लेकर तहसील और पुलिस अधिकारियों तक कई बार शिकायत की गई, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। बेटे विशाल उपाध्याय के मुताबिक, उनकी मां अधिकारियों से न्याय नहीं मिलने की स्थिति में अपनी जान देने की बात भी कह चुकी थीं।

कविता की मौत के बाद भी रास्ते का विवाद खत्म नहीं हुआ। परिवार ने अंतिम संस्कार के लिए शव को घर से बाहर ले जाने में रास्ते की समस्या का हवाला देते हुए शव उठाने से इनकार कर दिया। गुरुवार सुबह तक करीब 14 घंटे से शव घर के बाहर रखा रहा। सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और परिजनों को समझाने का प्रयास करते रहे।

रास्ता बंद होने से परेशान महिला ने दी जान, मौत के बाद भी नहीं खुला रास्ता

दो साल से रास्ते को लेकर चल रहा विवाद

अहरक गांव में संतोष उपाध्याय का मकान आबादी के बीच स्थित है। उनके बेटे विशाल का कहना है कि घर से मुख्य रास्ते तक पहुंचने के लिए करीब छह फीट चौड़ा रास्ता नवीन परती की जमीन से होकर गुजरता है। परिवार का आरोप है कि लगभग दो वर्ष पहले पड़ोस में रहने वाले मनीष उपाध्याय और अमित उपाध्याय के परिवारों ने उक्त जमीन पर चहारदीवारी खड़ी कर दी। इसके बाद उनका पुराना रास्ता पूरी तरह बंद हो गया। परिवार के मुताबिक, फिलहाल उन्हें करीब दो फीट चौड़े वैकल्पिक रास्ते से आवागमन करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि इतने संकरे रास्ते से परिवार के सदस्यों के सामान्य आवागमन में लगातार परेशानी होती रही।

150 से अधिक शिकायतों का दावा

विशाल का आरोप है कि रास्ता खुलवाने के लिए परिवार ने अलग-अलग स्तर के अधिकारियों से बार-बार शिकायत की। उनका दावा है कि डीएम कार्यालय और जनसुनवाई में 50 से अधिक बार शिकायत की गई, जबकि तहसील स्तर पर एडीएम समेत अन्य अधिकारियों को 100 से ज्यादा प्रार्थना पत्र दिए गए।

परिजनों के अनुसार, करीब एक साल पहले परिवार ने डीएम कार्यालय के बाहर धरना भी दिया था। इसके बावजूद रास्ते की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका। बेटे का दावा है कि परिवार की ओर से रास्ते के संबंध में अधिकारियों और पुलिस से मिलाकर 150 से अधिक बार शिकायत की गई।

22 जुलाई को डीएम की जनसुनवाई में पहुंचा था मामला

परिवार के मुताबिक, रास्ते को लेकर उनकी अंतिम शिकायत 22 जुलाई 2026 को जिलाधिकारी की जनसुनवाई में दी गई थी। इस शिकायत पर 12 अगस्त को आख्या लगाकर मामले का निस्तारण कर दिया गया। परिजनों का कहना है कि जांच रिपोर्ट में शिकायत को सही नहीं पाया गया। परिवार इस निष्कर्ष से सहमत नहीं था। उनका कहना है कि कागजों में शिकायत के निस्तारण के बावजूद जमीन पर उनके घर से निकलने की समस्या जस की तस बनी रही।

शौचालय में फंदे से लटकी मिलीं कविता

विशाल ने बताया कि उनके पिता संतोष उपाध्याय दिल्ली में निजी कंपनी में नौकरी करते हैं। घर पर वह अपनी मां और दादी के साथ रहते हैं। बुधवार दोपहर बाद कविता अचानक दिखाई नहीं दीं। परिवार ने घर और आसपास उनकी तलाश शुरू की, लेकिन उनका पता नहीं चला।

शाम करीब सात बजे विशाल शौचालय की ओर गए। दरवाजा खोलने पर मां कविता फंदे से लटकी मिलीं। यह देखकर परिवार में चीख-पुकार मच गई। तत्काल पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस मौके पर पहुंची और शव को नीचे उतरवाया।

मौत के बाद परिजनों ने रखी रास्ता खुलवाने की मांग

कविता की मौत के बाद परिवार ने शव को घर के बाहर रख दिया। परिजनों का कहना है कि जिस रास्ते के विवाद को लेकर उनकी मां लंबे समय से अधिकारियों के चक्कर काट रही थीं, उसी रास्ते की समस्या का समाधान हुए बिना वे अंतिम संस्कार नहीं करेंगे।

गुरुवार सुबह तक शव करीब 14 घंटे तक घर के बाहर रखा रहा। परिवार की मांग है कि प्रशासन मौके पर रास्ते की समस्या का समाधान कराए, ताकि शव को अंतिम संस्कार के लिए बाहर ले जाया जा सके। मौके पर एसपी बिंद्रा, बड़ागांव थाना प्रभारी राजीव कुमार सिंह और तहसीलदार समेत पुलिस-प्रशासन के अधिकारी पहुंचे। अधिकारियों ने परिवार को समझाने का प्रयास किया। हालांकि, परिजन रास्ते का समाधान किए जाने की मांग पर अड़े रहे।

पति दिल्ली में नौकरी करते हैं, बेटा कर रहा एमए

कविता के पति संतोष उपाध्याय दिल्ली की एक निजी कंपनी में काम करते हैं। उनका बेटा विशाल उपाध्याय एमए की पढ़ाई कर रहा है। परिवार के मुताबिक, स्वर्गीय लक्ष्मी नारायण उपाध्याय के चार बेटे संतोष, अजय, अक्षयवर नाथ और केदार नाथ उपाध्याय हैं। परिवार का कहना है कि रास्ते को लेकर विवाद लंबे समय से चला आ रहा था। इसी वजह से घर से बाहर निकलने और रोजमर्रा के कामों में उन्हें लगातार दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।

परिजनों ने कहा- पहले ही चिंता में था परिवार

परिजनों के अनुसार, कविता रास्ते की समस्या को लेकर काफी परेशान रहती थीं। पति संतोष और परिवार के अन्य सदस्यों ने उन्हें समझाने की कोशिश की थी। परिवार का दावा है कि उन्होंने कई बार अधिकारियों से न्याय नहीं मिलने पर अपनी जान देने की बात कही थी। परिजनों का आरोप है कि यदि शिकायतों पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई होती और रास्ते की समस्या का समाधान किया जाता तो शायद कविता इतना बड़ा कदम नहीं उठातीं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

एसडीएम बोले- तहसीलदार न्यायालय में मामला लंबित

मामले में एसडीएम का कहना है कि रास्ते से संबंधित विवाद तहसीलदार न्यायालय में लंबित है। अधिकारियों के अनुसार, जिस जमीन को लेकर विवाद है, वह नवीन परती की जमीन है और उससे जुड़े मामले का न्यायिक स्तर पर निस्तारण होना बाकी है। वहीं, परिवार का कहना है कि उन्हें जो वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध कराया जा रहा है, उसकी चौड़ाई करीब दो फीट है। परिजनों का सवाल है कि इतने संकरे रास्ते से परिवार का सामान्य आवागमन किस तरह संभव होगा।

फिलहाल पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर हैं। परिवार को अंतिम संस्कार के लिए मनाने के साथ ही रास्ते से जुड़े विवाद को लेकर भी स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है। कविता की मौत ने गांव में लंबे समय से चले आ रहे रास्ते के विवाद और शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

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