बीएचयू में BFA प्रवेश परीक्षा की मार्किंग को लेकर छात्रों का प्रदर्शन, केंद्रीय कार्यालय पर हुआ हंगामा

बीएचयू में BFA प्रवेश परीक्षा की मार्किंग को लेकर छात्रों का प्रदर्शन, केंद्रीय कार्यालय पर हुआ हंगामा

वाराणसी (रणभेरी): काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में बीएफए प्रवेश परीक्षा की मार्किंग प्रक्रिया को लेकर छात्रों का विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है। परीक्षा परिणाम और मूल्यांकन प्रक्रिया में कथित अनियमितता का आरोप लगाते हुए छात्र दूसरी बार विश्वविद्यालय के केंद्रीय कार्यालय पहुंचे और जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब की मांग की। इसी दौरान प्रदर्शनकारियों और प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सुरक्षाकर्मियों के बीच विवाद बढ़ गया। देखते ही देखते मामला धक्का-मुक्की तक पहुंच गया।

घटना के बाद परिसर में काफी देर तक गहमागहमी का माहौल बना रहा। प्रदर्शन से जुड़े कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर भी सामने आए हैं, जिनमें छात्रों और सुरक्षाकर्मियों के बीच धक्का-मुक्की होती नजर आ रही है। हालांकि, वायरल वीडियो में दिखाई दे रहे घटनाक्रम के सभी पहलुओं और लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

जवाब मांगने केंद्रीय कार्यालय पहुंचे छात्र

बीएफए प्रवेश परीक्षा की मार्किंग को लेकर छात्रों ने पहले भी विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने अपनी आपत्तियां रखी थीं। छात्रों का कहना है कि मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर उनके मन में कई सवाल हैं और वे चाहते हैं कि विश्वविद्यालय प्रशासन पूरी प्रक्रिया को स्पष्ट करे।

इसी मांग को लेकर छात्र एक बार फिर बीएचयू के केंद्रीय कार्यालय पहुंचे। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, उनका उद्देश्य संबंधित अधिकारियों से बातचीत कर अपनी शिकायतों का समाधान कराना था। छात्रों का आरोप है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहे थे, लेकिन इसी बीच प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सुरक्षाकर्मी मौके पर पहुंच गए।

इसके बाद दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हुई और स्थिति धीरे-धीरे तनावपूर्ण हो गई। छात्रों का आरोप है कि बातचीत के दौरान धक्का-मुक्की हुई और कुछ प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट भी की गई।

वायरल वीडियो में दिखी धक्का-मुक्की

घटना से संबंधित बताए जा रहे वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे हैं। वीडियो में प्रदर्शन स्थल पर छात्रों और सुरक्षाकर्मियों के बीच हाथापाई जैसी स्थिति दिखाई दे रही है। छात्रों का आरोप है कि प्रदर्शन को हटाने के दौरान सुरक्षाकर्मियों ने बल प्रयोग किया।

प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि महिला सुरक्षाकर्मियों ने कुछ छात्राओं को वहां से हटाने की कोशिश की। इसी दौरान कथित तौर पर छात्राओं को खींचकर अलग किया गया और दो छात्राओं के सड़क पर गिरने की बात सामने आई है।

छात्रों का कहना है कि इस घटनाक्रम में कुछ प्रदर्शनकारियों को चोटें भी आई हैं। हालांकि, चोटों और घटना की पूरी परिस्थितियों को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।

मोबाइल फोन छीनने और अभद्रता के भी आरोप

प्रदर्शन में शामिल कुछ छात्रों ने मौके पर मोबाइल फोन छीने जाने का भी आरोप लगाया है। एक छात्रा ने कथित तौर पर उसके साथ अभद्र व्यवहार करने और गला दबाने की कोशिश किए जाने का आरोप लगाया।

प्रदर्शनकारियों का यह भी दावा है कि मौके पर कुछ ऐसे लोग मौजूद थे जिन्हें वे बाहरी व्यक्ति बता रहे हैं। छात्रों ने आरोप लगाया कि उनके साथ भी विवाद और मारपीट की स्थिति बनी।

इन आरोपों को लेकर फिलहाल स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में पूरे मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

एनएसयूआई ने प्रशासन पर साधा निशाना

घटना के बाद एनएसयूआई ने बीएचयू प्रशासन को घेरते हुए छात्रों के समर्थन में आवाज उठाई। संगठन का कहना है कि बीएफए प्रवेश परीक्षा की कथित अनियमितताओं को लेकर छात्र केवल अपनी शिकायतों का जवाब चाहते हैं।

एनएसयूआई के मुताबिक, छात्रों के सवालों का समाधान करने के बजाय उनके साथ कथित तौर पर बल प्रयोग किया गया। संगठन ने घटना की जिम्मेदारी तय करने और छात्रों के साथ हुई कथित मारपीट पर विश्वविद्यालय प्रशासन से जवाब मांगने की बात कही है।

एनएसयूआई ने चेतावनी दी है कि यदि बीएफए छात्रों की मांगों पर जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो रक्षाबंधन के बाद अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जा सकता है। संगठन ने कहा है कि मांगों के समाधान तक आंदोलन लोकतांत्रिक तरीके से जारी रखा जाएगा।

चार प्रमुख मुद्दों को लेकर छात्रों का आंदोलन

छात्रों और प्रदर्शनकारियों की ओर से मुख्य रूप से चार मुद्दे उठाए जा रहे हैं। इनमें प्रदर्शन के दौरान कथित बल प्रयोग के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई, बीएफए प्रवेश परीक्षा की मार्किंग प्रक्रिया से जुड़े सवालों का स्पष्ट जवाब, विश्वविद्यालय परिसर में जलभराव की समस्या और बच्चों को कुत्ते के काटने से जुड़ी घटना की जांच शामिल है।

छात्रों की मांग है कि बीएफए परीक्षा की मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों का विश्वविद्यालय प्रशासन स्पष्ट और पारदर्शी तरीके से जवाब दे। उनका कहना है कि परीक्षा जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में पारदर्शिता जरूरी है, ताकि अभ्यर्थियों के बीच किसी तरह का संदेह न रहे।

बीएचयू में BFA प्रवेश परीक्षा की मार्किंग को लेकर छात्रों का प्रदर्शन, केंद्रीय कार्यालय पर हुआ हंगामा

छात्रों की प्रमुख मांगें

  • कथित मारपीट या बल प्रयोग का आदेश देने वाले अधिकारियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
  • बीएफए प्रवेश परीक्षा की मार्किंग प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों का स्पष्ट और संतोषजनक समाधान किया जाए।
  • अस्पताल से मुख्य द्वार और परिसर के अन्य हिस्सों में होने वाले भारी जलभराव को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन जवाबदेही तय करे।
  • प्रोफेसर की कथित असंवेदनशीलता और बच्चों को कुत्ते द्वारा काटे जाने की घटना की जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

अब प्रशासन के जवाब पर टिकी नजर

बीएफए प्रवेश परीक्षा की मार्किंग को लेकर शुरू हुआ विवाद अब केवल मूल्यांकन प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गया है। प्रदर्शन के दौरान हुए कथित टकराव के बाद छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से परीक्षा प्रक्रिया के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था और छात्रों के साथ व्यवहार को लेकर भी जवाब मांगा है।

फिलहाल छात्रों की ओर से आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में विश्वविद्यालय प्रशासन इस मामले पर क्या निर्णय लेता है और बीएफए प्रवेश परीक्षा की मार्किंग से जुड़े छात्रों के सवालों का किस तरह समाधान करता है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।

वहीं, घटना में लगाए गए मारपीट, मोबाइल फोन छीने जाने और अभद्रता जैसे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पूरे मामले की स्थिति विश्वविद्यालय प्रशासन के आधिकारिक पक्ष और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगी।

Share this news

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *