वाराणसी (रणभेरी): महंगाई का असर आम आदमी की जेब पर साफ दिखाई दे रहा है। रोजमर्रा की जरूरतों का सामान खरीदने में लोगों को पहले की तुलना में अधिक खर्च करना पड़ रहा है। सब्जी, दाल, खाद्य तेल और किराना सामान की कीमतों में उतार-चढ़ाव के चलते घर का मासिक बजट बिगड़ रहा है।
महंगाई का दबाव केवल रसोई तक सीमित नहीं है। साबुन, डिटर्जेंट, कपड़े, घरेलू उपयोग का सामान, आने-जाने का खर्च और बाहर खाना भी परिवारों के बजट को प्रभावित कर रहा है। महीने की शुरुआत में तय किए गए खर्च कई बार महीने के अंत तक बढ़ जाते हैं।
मध्यम वर्ग की बढ़ी परेशानी
सबसे ज्यादा परेशानी मध्यम वर्ग और रोज कमाकर घर चलाने वाले परिवारों को हो रही है। लोगों का कहना है कि आमदनी में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हुई, लेकिन जरूरी खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। परिवार की कमाई का बड़ा हिस्सा राशन, बच्चों की पढ़ाई, किराया, बिजली-पानी और यात्रा जैसे खर्चों में निकल जाता है। इसके बाद बचत के लिए बहुत कम रकम बचती है। अचानक आने वाला कोई अतिरिक्त खर्च पूरे महीने का बजट बिगाड़ देता है।

रसोई पर बढ़ा खर्च
घर के मासिक बजट में खाद्य सामग्री का अहम हिस्सा होता है। सब्जियों और दालों के दाम में बदलाव के साथ खाद्य तेल और अन्य जरूरी सामान की कीमतें भी परिवारों के खर्च को प्रभावित करती हैं। बाजार में खरीदारी करने वाले लोगों का कहना है कि पहले जितने सामान में परिवार का साप्ताहिक खर्च आसानी से निकल जाता था, अब उसी खरीदारी के लिए अधिक रकम रखनी पड़ती है। इसका सीधा असर घरेलू बचत पर पड़ रहा है।
आंकड़ों में महंगाई, जेब पर असर
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जुलाई 2026 में खुदरा महंगाई दर 4.45 फीसदी, जबकि खाद्य महंगाई 5.52 फीसदी रही। आंकड़ों के स्तर पर महंगाई नियंत्रित नजर आ सकती है, लेकिन आम उपभोक्ता के लिए वास्तविक स्थिति रोज की खरीदारी से तय होती है।
परिवारों का कहना है कि महंगाई का असर सिर्फ कीमत बढ़ने से नहीं, बल्कि महीने के अंत में बचने वाली रकम से समझ आता है। जब जरूरी खर्च बढ़ते हैं तो बचत और दूसरी जरूरतों के लिए पैसा कम पड़ने लगता है।
कमाई कितनी बढ़ी, यही बड़ा सवाल
महंगाई के बीच सबसे बड़ा सवाल आमदनी को लेकर है। यदि आय में बढ़ोतरी खर्च की रफ्तार से कम हो, तो परिवार की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ना स्वाभाविक है। बच्चों की पढ़ाई, किराया, राशन और बिजली-पानी जैसे खर्चों में कटौती करना आसान नहीं है। ऐसे में लोग गैर-जरूरी खरीदारी कम करने और बचत में कटौती करने को मजबूर हो रहे हैं।
अब सवाल यही है कि आने वाले समय में जरूरी सामान की कीमतों में कितनी राहत मिलती है और आम लोगों की आय किस रफ्तार से बढ़ती है। क्योंकि महंगाई का असली असर सरकारी आंकड़ों से ज्यादा उस रकम में नजर आता है, जो महीने के आखिर में आम आदमी की जेब में बचती है।
