वाराणसी (रणभेरी): शनिवार सुबह से वाराणसी और आसपास के इलाकों में मौसम ने करवट ली है। सुबह से आसमान में बादल छाए रहे और कई क्षेत्रों में रुक-रुककर बूंदाबांदी होती रही। मौसम विभाग से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक अगले 24 घंटे तक बारिश की गतिविधियां बनी रह सकती हैं। इस दौरान तेज हवाएं चलने की भी संभावना है।
मौसम में आए बदलाव का संबंध बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव वाले सिस्टम से बताया जा रहा है। इसके असर से पूर्वी उत्तर प्रदेश में पिछले करीब दो दिनों से कहीं हल्की तो कहीं रुक-रुककर बारिश हो रही है। कुछ स्थानों पर हवाओं की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे के आसपास पहुंच सकती है।
मौसम विशेषज्ञ मनोज श्रीवास्तव के मुताबिक रविवार से बारिश में धीरे-धीरे कमी आने की उम्मीद है। इसके साथ ही बादलों के छंटने का सिलसिला शुरू हो सकता है। हालांकि, स्थानीय स्तर पर बादल छाए रहने और हल्की बारिश की संभावना बनी रहेगी। उन्होंने बताया कि उत्तरी छत्तीसगढ़ के आसपास बने निम्न दबाव के कारण सिस्टम उत्तर-उत्तरपश्चिम दिशा की ओर बढ़ रहा है, जिसका प्रभाव पूर्वी उत्तर प्रदेश में दिखाई दे रहा है।

शनिवार सुबह वाराणसी का तापमान करीब 26 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वातावरण में नमी बढ़ने और हवाओं की रफ्तार तेज होने के कारण लोगों को सामान्य दिनों की अपेक्षा मौसम कुछ ठंडा महसूस हुआ।
बंगाल की खाड़ी से आ रही नम हवाओं का असर
बीएचयू के भू-भौतिकी विभाग की ग्रामीण कृषि मौसम सेवा के नोडल अधिकारी प्रो. रवि शंकर सिंह और तकनीकी अधिकारी शिवमंगल सिंह के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बना निम्न दबाव का क्षेत्र बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश की दिशा में प्रभावी है।
इस सिस्टम के कारण वातावरण में मौजूद नमी वाली मानसूनी हवाएं इसकी ओर बढ़ रही हैं। इन्हीं हवाओं के साथ नमी वाले बादल पूर्वी उत्तर प्रदेश तक पहुंच रहे हैं। इससे वाराणसी समेत आसपास के क्षेत्रों में बादल बनने और बारिश की गतिविधियों में बढ़ोतरी हुई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि निम्न दबाव वाले सिस्टम की दिशा और स्थिति में होने वाले बदलाव का सीधा असर बारिश की तीव्रता पर पड़ सकता है। इसलिए आने वाले घंटों में कहीं बारिश तेज तो कहीं हल्की रहने की स्थिति बन सकती है।
तेज हवाओं ने बढ़ाई किसानों की चिंता
लगातार बारिश और तेज हवाओं को देखते हुए किसानों की चिंता भी बढ़ गई है। खासतौर पर धान की फसल पर इसका असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। खेतों में अधिक नमी और तेज हवा के कारण धान के पौधों के गिरने की समस्या यानी लॉजिंग का खतरा बढ़ सकता है।
वहीं, लंबे समय तक खेतों में नमी बनी रहने से फसल में कीट और विभिन्न रोगों का प्रकोप बढ़ने की संभावना भी रहती है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को खेतों की नियमित निगरानी करने और फसल की स्थिति में किसी भी बदलाव पर तत्काल ध्यान देने की सलाह दी है।
