वाराणसी (रणभेरी): टीजीटी परीक्षा में अभ्यर्थियों की जगह सॉल्वर बैठाकर परीक्षा पास कराने वाले संगठित गिरोह के खिलाफ वाराणसी पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। लंबे समय से फरार चल रहे गिरोह के कथित मास्टरमाइंड को उसके एक सहयोगी के साथ गिरफ्तार कर लिया गया। दोनों आरोपियों को पूछताछ के बाद न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई चौकाघाट क्षेत्र स्थित लकड़ी मंडी इलाके में की गई, जहां गुप्त सूचना के आधार पर घेराबंदी कर दोनों आरोपियों को दबोचा गया। गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों की पहचान बिहार निवासी दौलत कुमार और उसके सहयोगी नितीश कुमार के रूप में हुई है।
पहले भी पकड़े गए थे दो सॉल्वर
मामले की शुरुआत टीजीटी परीक्षा के दौरान हुई कार्रवाई से जुड़ी है। परीक्षा केंद्र पर जांच के दौरान दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया था, जो वास्तविक अभ्यर्थियों के स्थान पर परीक्षा दे रहे थे। पूछताछ में सामने आया कि वे एक बड़े सॉल्वर नेटवर्क का हिस्सा हैं और पूरा संचालन बिहार के रहने वाले दौलत कुमार द्वारा किया जा रहा था।
जांच में उसका नाम सामने आने के बाद पुलिस ने उसकी तलाश शुरू कर दी थी। लगातार फरार रहने के कारण उस पर 25 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया गया था।
सूचना मिलते ही हुई घेराबंदी
पुलिस को हाल ही में जानकारी मिली कि आरोपी वाराणसी के चौकाघाट क्षेत्र में मौजूद है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए विशेष टीम का गठन किया गया और इलाके की निगरानी शुरू की गई। देर रात की गई कार्रवाई में दौलत कुमार को उसके सहयोगी नितीश कुमार के साथ गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस ने दोनों के कब्जे से कई संदिग्ध दस्तावेज, फर्जी पहचान संबंधी कागजात, 14 डेबिट कार्ड तथा परीक्षा से जुड़े आर्थिक लेन-देन के दस्तावेज बरामद किए हैं। बरामद सामग्री की जांच की जा रही है, जिससे गिरोह की गतिविधियों के बारे में और महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की संभावना है।
उच्च शिक्षित होने के बावजूद अपनाया गलत रास्ता
पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार मुख्य आरोपी अच्छी शिक्षा प्राप्त कर चुका है और उसके पास स्नातकोत्तर स्तर की डिग्री भी है। इसके बावजूद अधिक धन कमाने की लालसा में उसने परीक्षा माफिया का नेटवर्क खड़ा कर लिया।
जांच अधिकारियों के मुताबिक, आरोपी विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिलाने का झांसा देकर अभ्यर्थियों से संपर्क करता था। इसके बदले वह लाखों रुपये की रकम वसूलता और फिर उनकी जगह परीक्षा में बैठने के लिए योग्य सॉल्वर उपलब्ध कराता था।
फर्जी दस्तावेजों के सहारे होती थी पूरी साजिश
पुलिस के अनुसार, गिरोह अभ्यर्थियों की पहचान छिपाने के लिए नकली पहचान पत्र और अन्य दस्तावेज तैयार करवाता था। इसके बाद सॉल्वर को परीक्षा केंद्र तक पहुंचाया जाता था। यदि योजना सफल हो जाती तो चयनित अभ्यर्थियों के माध्यम से नए ग्राहकों तक पहुंच बनाई जाती और नेटवर्क का विस्तार किया जाता था।
नेटवर्क की गहराई से होगी जांच
पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि गिरोह का नेटवर्क किन-किन राज्यों तक फैला हुआ है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि अब तक कितनी प्रतियोगी परीक्षाओं में इस गिरोह ने सेंध लगाने की कोशिश की और इसमें कितने लोग शामिल रहे हैं।
अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही गिरोह से जुड़े अन्य संदिग्ध सदस्यों की तलाश भी तेज कर दी गई है।
पुलिस का मानना है कि इस गिरफ्तारी से परीक्षा प्रणाली में धांधली करने वाले नेटवर्क के कई अहम राज खुल सकते हैं और आने वाले दिनों में इस मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
