मोबाइल पर पूरा राशन, कोटेदार के तराजू पर डाका !

मोबाइल पर पूरा राशन, कोटेदार के तराजू पर डाका !
  • डिजिटल मैसेज में पूरी मात्रा, लेकिन थैले में पहुंच रहा कम अनाज
  • ई-पॉस मशीन में फुल वितरण, जमीनी हकीकत में जारी है घटतौली का खेल
  • गरीबों के हक पर कटौती का आरोप, औचक जांच न होने से बढ़ रहा आक्रोश

वाराणसी (रणभेरी )। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी मुफ्त राशन योजना पर वाराणसी में कोटेदारों की मनमानी भारी पड़ती दिखाई दे रही है। सरकार जहां डिजिटल पारदर्शिता के जरिए हर कार्डधारक के मोबाइल पर राशन की पूरी मात्रा का मैसेज भेजकर जवाबदेही तय करने का दावा कर रही है, वहीं धरातल पर लाभार्थियों को निर्धारित मात्रा से कम अनाज मिलने के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं।

गरीब परिवारों का कहना है कि मोबाइल पर पूरा राशन दिखाया जाता है, लेकिन कोटेदार के तराजू तक पहुंचते-पहुंचते कई किलो अनाज गायब हो जाता है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत प्रत्येक यूनिट पर पांच किलो अनाज देने का प्रावधान है, जिसमें एक किलो गेहूं और चार किलो चावल शामिल है। क्षेत्र के एक कार्डधारक ने बताया कि परिवार में चार सदस्य होने के कारण उन्हें कुल 16 किलो चावल और चार किलो गेहूं मिलना चाहिए। मोबाइल पर आए सरकारी मैसेज में भी यही मात्रा दर्ज रहती है, लेकिन राशन दुकान पर पहुंचने के बाद कोटेदार कम अनाज तौलकर थमा देता है। आरोप है कि चावल और गेहूं दोनों में कटौती की जा रही है।

लाभार्थियों का कहना है कि जब वे मोबाइल पर आए मैसेज का हवाला देकर विरोध करते हैं, तो कोटेदार दबंगई भरे अंदाज में जवाब देते हैं कि ऊपर से ही राशन कम मिल रहा है और हर जगह यही व्यवस्था चल रही है। सवाल यह उठ रहा है कि जब ई-पॉस मशीन पर अंगूठा लगते ही सरकारी रिकॉर्ड में पूरा वितरण दर्ज हो जाता है, तो फिर लाभार्थियों तक पहुंचने वाला राशन कम कैसे हो रहा है। लोगों का आरोप है कि यह खेल सीधे तौर पर कालाबाजारी और गरीबों के हिस्से पर डाका डालने जैसा है।
क्षेत्रीय जनता में इस धांधली को लेकर भारी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि महंगाई के दौर में गरीब परिवार सरकारी राशन के सहारे अपना गुजारा कर रहे हैं, लेकिन यदि हर कार्डधारक के हिस्से से दो से तीन किलो अनाज काट लिया जाएगा, तो योजना का वास्तविक लाभ पात्र लोगों तक कभी नहीं पहुंचेगा।

स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन और खाद्य एवं रसद विभाग से राशन दुकानों का औचक निरीक्षण कराने, डिजिटल रिकॉर्ड और वास्तविक वितरण का मिलान कराने तथा दोषी कोटेदारों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।
एक परिवार ने बताया कि राशन लेने जाने पर निर्धारित मात्रा से कम अनाज दिया जाता है। विरोध करने पर कोटेदार साफ कह देता है कि कटौती करके ही राशन मिलेगा। उनका कहना है कि यदि सरकार पूरा राशन भेज रही है, तो बीच में गरीबों का हिस्सा कौन निगल रहा है, इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

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