मुस्लिम महिलाओं ने उतारी श्रीराम की आरती, दिया एकता और सद्भाव का संदेश

मुस्लिम महिलाओं ने उतारी श्रीराम की आरती, दिया एकता और सद्भाव का संदेश

उर्दू में गाई राम आरती, हनुमान चालीसा का किया पाठ; बोलीं- धर्म बदलने से पूर्वज और परंपराएं नहीं बदलतीं

वाराणसी (रणभेरी): दीपावली के अवसर पर काशी की मुस्लिम महिलाओं ने भगवान श्रीराम की आरती उतारकर सामाजिक एकता, प्रेम और सांस्कृतिक सद्भाव का संदेश दिया। लमही स्थित सुभाष भवन में विशाल भारत संस्थान एवं मुस्लिम महिला फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित श्रीराम महाआरती कार्यक्रम में सैकड़ों मुस्लिम महिलाओं ने भाग लिया। इस दौरान महिलाओं ने दीपों से सजी थालियों के साथ भगवान श्रीराम और माता जानकी की आरती उतारी। विशेष आकर्षण उर्दू में लिखी गई श्रीराम आरती रही, जिसे महिलाओं ने सामूहिक रूप से गाया। इसके साथ ही हनुमान चालीसा का पाठ भी किया गया।

मुस्लिम महिलाओं ने उतारी श्रीराम की आरती, दिया एकता और सद्भाव का संदेश

कार्यक्रम में महिलाओं ने कहा कि धर्म बदलने से पूर्वज, संस्कृति और परंपराएं नहीं बदलतीं। भारत में रहने वाले सभी समुदायों की सांस्कृतिक विरासत साझा है। त्योहार किसी एक धर्म का नहीं, बल्कि पूरे देश और समाज का होता है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम त्याग, मर्यादा, प्रेम और परिवार को जोड़ने के प्रतीक हैं। उनके आदर्शों को अपनाकर ही परिवार और समाज को मजबूत बनाया जा सकता है।

विशाल भारत संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजीव श्रीगुरुजी ने कहा कि मुस्लिम महिलाएं समाज को जोड़ने का काम कर रही हैं। आज परिवारों में बिखराव का एक बड़ा कारण त्याग और मर्यादा के आदर्शों से दूरी है। प्रभु श्रीराम का जीवन त्याग, समर्पण और पारिवारिक मूल्यों की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि विश्व शांति और सामाजिक सद्भाव के लिए राम के आदर्शों को समझना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है।

मुस्लिम महिलाओं ने उतारी श्रीराम की आरती, दिया एकता और सद्भाव का संदेश

मुस्लिम महिला फाउंडेशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष नाजनीन अंसारी ने कहा कि भारत की धरती पर रहने वाले लोगों की सांस्कृतिक जड़ें एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। धर्म बदल सकता है, लेकिन पूर्वज और ऐतिहासिक परंपराएं नहीं बदलतीं। उन्होंने कहा कि अपनी पहचान बनाए रखने के लिए भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जुड़े रहना जरूरी है। भगवान श्रीराम के आदर्शों में परिवार के प्रति त्याग, समाज के प्रति जिम्मेदारी और देश के प्रति समर्पण की भावना निहित है। उन्होंने कहा कि परिवार को बचाना है तो राम के आदर्शों को अपनाना होगा।

डॉ. नजमा परवीन ने कहा कि रामराज्य की कल्पना केवल भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के अनेक देशों में आदर्श शासन व्यवस्था के रूप में की जाती है। भगवान राम के जीवन और चरित्र को पढ़ने तथा उनके आदर्शों को घर-घर तक पहुंचाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि राम के विचार परिवार में सुख, समृद्धि और आपसी प्रेम का आधार बन सकते हैं।

कार्यक्रम में नगीना बेगम, नाजमा बानो, शमसुननिशा, तबस्सुम, डॉ. अर्चना भारतवंशी, डॉ. मृदुला जायसवाल, जीनत रहमान, रोकसार परवीन, प्रज्ञा, इली, खुशी, उजाला, दक्षिता, सरोज, पूनम, सुनीता, मैना, धनेसरा, पार्वती और किशुना सहित बड़ी संख्या में महिलाओं ने सहभागिता की।

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