(रणभेरी): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को छत्तीसगढ़ के बस्तर में तैनात सुरक्षा बलों के जवानों के साथ दिवाली का पर्व मनाया। इस दौरान उन्होंने जवानों के साहस, शौर्य और बलिदान की सराहना करते हुए कहा कि उनके अटूट समर्पण और निष्ठा की बदौलत बस्तर से नक्सलवाद के आतंक का पूरी तरह खात्मा हुआ है। प्रधानमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद के खात्मे के बाद यह क्षेत्र की पहली दिवाली है, जो शांति और नई उम्मीद का संदेश लेकर आई है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की सीमाओं और आंतरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाले जवानों के बीच दिवाली मनाना उनके लिए विशेष महत्व रखता है। उन्होंने कहा कि हर साल की तरह इस बार भी उन्होंने देश के इन वीर पहरेदारों के साथ त्योहार मनाने का निर्णय लिया है।
जवानों के योगदान को किया नमन
बस्तर लंबे समय तक वामपंथी उग्रवाद का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां नक्सलवाद के खिलाफ चलाए गए अभियानों में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और छत्तीसगढ़ पुलिस की अहम भूमिका रही है। सुरक्षा बलों ने लगातार अभियान चलाकर नक्सलियों के नेटवर्क को कमजोर किया और क्षेत्र में शांति बहाली की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की। प्रधानमंत्री ने जवानों के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि उनकी बहादुरी और बलिदान के कारण ही बस्तर नक्सलवाद के भय से बाहर निकल सका है।
31 मार्च को घोषित हुआ था नक्सलमुक्ति का लक्ष्य
केंद्र सरकार ने 31 मार्च को शीर्ष नक्सली कमांडरों के सफाए और सैकड़ों नक्सलियों के आत्मसमर्पण के बाद देश को नक्सल समस्या से मुक्त घोषित किया था। इसके बाद बस्तर में शांति और विकास की नई संभावनाएं मजबूत हुई हैं।
सीआरपीएफ ने हासिल की जीरो कैजुअल्टी की उपलब्धि
नक्सल विरोधी अभियानों में सीआरपीएफ ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की है। बल ने लगातार 12 महीनों तक ऑपरेशन के दौरान किसी भी जवान के हताहत नहीं होने का रिकॉर्ड बनाया है। सीआरपीएफ के महानिदेशक जीपी सिंह ने इस सफलता का श्रेय जवानों को उपलब्ध कराए गए आधुनिक उपकरणों, बेहतर प्रशिक्षण, सटीक रणनीतिक योजना और घायल जवानों को समय पर चिकित्सा सहायता एवं सुरक्षित निकालने की व्यवस्था को दिया।
इससे पहले शनिवार को प्रधानमंत्री मोदी ने वीडियो संदेश के माध्यम से देशवासियों को दिवाली की शुभकामनाएं दी थीं। उन्होंने सभी के जीवन में शांति, सुख और समृद्धि की कामना की थी। बस्तर में जवानों के साथ दिवाली मनाकर प्रधानमंत्री ने सुरक्षा बलों के प्रति देश के सम्मान और उनके योगदान को एक बार फिर रेखांकित किया।
