वाराणसी-जौनपुर हाईवे पर सीएनजी स्टेशन में भीषण आग, चार घंटे तक चला राहत और बचाव अभियान

वाराणसी-जौनपुर हाईवे पर सीएनजी स्टेशन में भीषण आग, चार घंटे तक चला राहत और बचाव अभियान

वाराणसी (रणभेरी): वाराणसी-जौनपुर राष्ट्रीय मार्ग पर स्थित औद्योगिक क्षेत्र करखियाव में शुक्रवार रात एक सीएनजी स्टेशन और उससे जुड़े भंडारण परिसर में भीषण आग लगने से हड़कंप मच गया। आग इतनी तेज थी कि इसकी लपटें कई फीट ऊपर तक दिखाई दे रही थीं और आसपास के इलाकों में दहशत का माहौल बन गया। घटना के बाद प्रशासन, दमकल विभाग और संबंधित एजेंसियों ने संयुक्त रूप से मोर्चा संभाला तथा कई घंटों की मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह नियंत्रण पाया गया।

सूत्रों के अनुसार आग रात करीब नौ बजे के आसपास भड़की। देखते ही देखते आग ने परिसर में रखी ज्वलनशील सामग्री को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे उसका स्वरूप और अधिक विकराल हो गया। आग की ऊंची लपटें दूर-दूर तक दिखाई दे रही थीं और आसपास के लोग भयभीत होकर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने लगे।

वाराणसी-जौनपुर हाईवे पर सीएनजी स्टेशन में भीषण आग, चार घंटे तक चला राहत और बचाव अभियान

दमकल की 11 टीमों ने संभाला मोर्चा

घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। आग की गंभीरता को देखते हुए कुल 11 दमकल इकाइयों को अभियान में लगाया गया। अग्निशमन कर्मियों का सबसे बड़ा लक्ष्य आग को गैस भंडारण क्षेत्र तक पहुंचने से रोकना था, क्योंकि ऐसा होने पर स्थिति और भी खतरनाक हो सकती थी। लगभग तीन घंटे के लगातार प्रयास के बाद आग को नियंत्रित कर लिया गया, जबकि पूरी तरह बुझाने में करीब चार घंटे का समय लगा। राहत की बात यह रही कि समय रहते किए गए प्रयासों से किसी बड़े विस्फोट की नौबत नहीं आई।

ज्वलनशील सामग्री ने बढ़ाई आग की तीव्रता

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार परिसर में मौजूद प्लास्टिक पाइप, औद्योगिक सामग्री और अन्य ज्वलनशील पदार्थों ने आग को तेजी से फैलने में मदद की। आग की गर्मी और धुएं के कारण आसपास का क्षेत्र लंबे समय तक प्रभावित रहा। घटना के बाद संबंधित गैस कंपनी और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम ने जांच शुरू कर दी है। आग लगने के कारणों के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था और आपदा प्रबंधन की समीक्षा भी की जाएगी।

वाराणसी-जौनपुर हाईवे पर सीएनजी स्टेशन में भीषण आग, चार घंटे तक चला राहत और बचाव अभियान

एग्रो पार्क तक नहीं पहुंची आग, बड़ा हादसा टला

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि हवा की दिशा अनुकूल न होती तो आग पास स्थित एग्रो पार्क तक पहुंच सकती थी। उस क्षेत्र में कई फैक्ट्रियां, गोदाम और औद्योगिक इकाइयां संचालित हैं। आग वहां तक पहुंचती तो करोड़ों रुपये की अतिरिक्त क्षति होने की आशंका थी। बताया जा रहा है कि उस समय पछुआ हवा चल रही थी, जिसके कारण आग की दिशा एग्रो पार्क की ओर नहीं बढ़ी। इससे एक संभावित बड़े औद्योगिक हादसे को टालने में मदद मिली।

निजी हाइड्रेंट सिस्टम बना सहारा

मौके पर मौजूद उद्योग समूहों के प्रतिनिधियों ने भी आग पर नियंत्रण पाने में सहयोग किया। आसपास स्थित एक औद्योगिक इकाई द्वारा संचालित हाइड्रेंट सिस्टम को तुरंत सक्रिय कर दिया गया, जिससे आग को फैलने से रोकने में मदद मिली। सूत्रों के अनुसार शुरुआती चरण में उपलब्ध जल स्रोत और हाइड्रेंट व्यवस्था ने दमकल विभाग के पहुंचने तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इससे आग विशेष रूप से दक्षिणी और पश्चिमी हिस्सों में सीमित रखने में सफलता मिली।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

घटना के बाद औद्योगिक क्षेत्र में अग्नि सुरक्षा प्रबंधों को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों और उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि इतने बड़े परिसर में पर्याप्त अग्निशमन संसाधन और आपातकालीन सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध होनी चाहिए थी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं औद्योगिक क्षेत्रों में नियमित सुरक्षा ऑडिट और आपदा प्रबंधन अभ्यास की आवश्यकता को उजागर करती हैं।

हाईवे की एक लेन बंद करनी पड़ी

आग की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल के आसपास एकत्र हो गए। स्थिति को नियंत्रित करने और सुरक्षा बनाए रखने के लिए पुलिस को अतिरिक्त बल लगाना पड़ा। एहतियात के तौर पर वाराणसी-जौनपुर हाईवे की एक लेन अस्थायी रूप से बंद कर दी गई ताकि बचाव कार्यों में कोई बाधा न आए। आग की चपेट में आने से परिसर के कई उपकरण क्षतिग्रस्त हो गए। वहीं परिसर में मौजूद पेड़ों की पत्तियां और शाखाएं भी जल गईं, जिससे पर्यावरणीय नुकसान भी हुआ।

सिलेंडरों को ठंडा रखने के लिए लगातार पानी का छिड़काव

दमकल अधिकारियों ने बताया कि सीएनजी से जुड़े उपकरण और सिलेंडर अत्यधिक गर्म हो चुके थे। ऐसे में सीधे आग बुझाने के साथ-साथ सिलेंडरों को लगातार पानी से ठंडा किया गया ताकि किसी प्रकार के उच्च दबाव वाले विस्फोट की संभावना न बने। सुरक्षा के मद्देनजर परिसर में मौजूद कर्मचारियों, वाहनों और अन्य लोगों को तुरंत सुरक्षित दूरी पर भेज दिया गया। लगभग 200 मीटर के दायरे को खाली कराकर लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई।

करोड़ों की संपत्ति प्रभावित होने की आशंका

हालांकि नुकसान का अंतिम आकलन अभी नहीं किया गया है, लेकिन प्रारंभिक अनुमान के अनुसार आग से भारी आर्थिक क्षति हुई है। जांच पूरी होने के बाद वास्तविक नुकसान और आग के कारणों की विस्तृत रिपोर्ट सामने आएगी। प्रशासन ने कहा है कि घटना की हर पहलू से जांच की जाएगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

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