वाराणसी (रणभेरी): शहर के जैतपुरा थाना क्षेत्र स्थित दोषीपुरा मैदान की ऐतिहासिक बारादरी मस्जिद में वर्षों से चली आ रही परंपरा के तहत इस वर्ष भी मस्जिद की चाबी निर्धारित प्रक्रिया के बाद शिया समुदाय को सौंप दी गई। पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में पूरी कार्रवाई कराई गई, जिसकी वीडियोग्राफी भी कराई गई। इसके साथ ही मुहर्रम से जुड़े धार्मिक कार्यक्रमों और आयोजनों की तैयारियां औपचारिक रूप से शुरू हो गई हैं।
मंगलवार देर शाम करीब 9 बजे पुलिस अधिकारियों की निगरानी में मस्जिद परिसर में दोनों समुदायों के प्रतिनिधि एकत्र हुए। निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार मस्जिद की चाबी पहले प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपी गई और बाद में शिया समुदाय के प्रतिनिधियों को हस्तांतरित कर दी गई। इस दौरान मस्जिद में मौजूद सामान का मिलान किया गया तथा पूरे परिसर का निरीक्षण भी कराया गया।
12 दिनों तक होंगे मुहर्रम से जुड़े आयोजन
चाबी हस्तांतरण के बाद अब आगामी दिनों में मस्जिद और उससे जुड़े इमाम चौक क्षेत्र में मुहर्रम की मजलिसों और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। परंपरा के अनुसार मस्जिद के एक कक्ष में सुरक्षित रखा जाने वाला प्रसिद्ध ताजिया भी निर्धारित तिथि पर बाहर निकाला जाएगा।
बताया जाता है कि मुहर्रम की 6 तारीख को ताजिया मस्जिद परिसर से निकालकर बारादरी इमाम चौक पर स्थापित किया जाएगा, जहां श्रद्धालु और अकीदतमंद बड़ी संख्या में पहुंचेंगे। इसके बाद 12 मुहर्रम को धार्मिक रस्मों के पूर्ण होने पर ताजिया पुनः अपने निर्धारित स्थान पर रख दिया जाएगा।
चार दशक से अधिक समय से निभाई जा रही है परंपरा
स्थानीय लोगों के अनुसार यह व्यवस्था पिछले लगभग 45 वर्षों से लगातार चली आ रही है। समुदायों के बीच आपसी सहमति और प्रशासनिक निगरानी में इस परंपरा का निर्वहन किया जाता है। हर वर्ष बकरीद के बाद एक निश्चित अवधि के लिए मस्जिद की चाबी शिया समुदाय को दी जाती है, जबकि वर्ष के शेष समय में इसका प्रबंधन सुन्नी समुदाय के पास रहता है।
सुरक्षा व्यवस्था के बीच हुई पूरी कार्रवाई
चाबी सौंपने की प्रक्रिया के दौरान पुलिस बल की पर्याप्त तैनाती की गई थी। प्रशासन ने किसी भी प्रकार की अव्यवस्था से बचने के लिए पूरे कार्यक्रम की निगरानी की। अधिकारियों की मौजूदगी में मस्जिद के कमरों, सामान और अन्य व्यवस्थाओं का रिकॉर्ड तैयार किया गया। पूरी प्रक्रिया को कैमरे में भी दर्ज किया गया ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से जुड़ा है मामला
स्थानीय प्रबंधन से जुड़े लोगों का कहना है कि अतीत में यह मस्जिद दोनों समुदायों के लोगों के लिए धार्मिक गतिविधियों का केंद्र रही है। हालांकि वर्षों पहले हुए कुछ विवादों के बाद परिस्थितियां बदलीं और बाद में आपसी सहमति से वर्तमान व्यवस्था लागू की गई।
जानकारों के अनुसार 1980 के दशक की शुरुआत में न्यायिक निर्णय आने के बाद समुदायों के बीच बातचीत हुई थी। उसी समय से यह व्यवस्था अस्तित्व में आई, जिसके तहत मुहर्रम और कुछ अन्य विशेष अवसरों पर मस्जिद की चाबी शिया समुदाय को दी जाती है, जबकि सामान्य दिनों में मस्जिद का संचालन सुन्नी समुदाय के पास रहता है।
वर्ष में कुछ विशेष अवसरों पर ही मिलता है अधिकार
मस्जिद प्रबंधन से जुड़े प्रतिनिधियों के अनुसार वर्ष भर में कुछ चुनिंदा धार्मिक अवसर ऐसे होते हैं, जब मस्जिद की चाबी शिया समुदाय को सौंपी जाती है। इनमें मुहर्रम के दिन, इमाम हुसैन की याद में आयोजित होने वाले विशेष कार्यक्रम तथा अन्य धार्मिक अवसर शामिल हैं। निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद चाबी पुनः सुन्नी समुदाय को लौटा दी जाती है। इस वर्ष भी परंपरा के अनुसार चाबी हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मुहर्रम से संबंधित धार्मिक गतिविधियां शुरू हो गई हैं। प्रशासन और दोनों समुदायों के प्रतिनिधियों ने शांतिपूर्ण वातावरण में कार्यक्रमों के आयोजन की अपील की है।
