वाराणसी (रणभेरी): उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) द्वारा आयोजित लघु सिंचाई विभाग के सहायक बोरिंग टेक्नीशियन भर्ती परीक्षा के दौरान हाईटेक नकल कराने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। वाराणसी में परीक्षा दे रहे दो अभ्यर्थियों को इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के जरिए नकल करते हुए पकड़ा गया। मामले की जांच आगे बढ़ने पर उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने प्रयागराज में छापेमारी कर गिरोह के कथित सरगना समेत कुल 11 लोगों को गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई के बाद कुल 13 आरोपियों के खिलाफ वाराणसी और प्रयागराज में संबंधित थानों में मुकदमा दर्ज किया गया है।
परीक्षा के दौरान पहले से थी STF की निगरानी
एसटीएफ के अनुसार भर्ती परीक्षा को देखते हुए उसकी वाराणसी इकाई पहले से सक्रिय थी। परीक्षा के दौरान सूचना मिली कि प्रयागराज में एक गिरोह माइक्रो इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की मदद से प्रतियोगी परीक्षाओं में नकल कराने का काम कर रहा है। सूचना के आधार पर एसटीएफ ने तत्काल जांच शुरू की और प्रयागराज टीम के साथ समन्वय बनाकर कार्रवाई की।
जांच के दौरान पता चला कि गिरोह के कथित सरगना शिवजीत पटेल और उसका भाई कप्तान सिंह पटेल प्रयागराज के बहरिया थाना क्षेत्र के रामगढ़ कोठारी गांव में एक कमरे से पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहे थे। वहीं कुछ लोग प्रश्नपत्र हल कर रहे थे और वाराणसी के परीक्षा केंद्रों पर मौजूद अभ्यर्थियों तक उत्तर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के माध्यम से पहुंचाए जा रहे थे।
प्रयागराज में छापा, सरगना समेत कई लोग गिरफ्तार
पुख्ता जानकारी मिलने के बाद एसटीएफ की टीम ने प्रयागराज में छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान गिरोह से जुड़े कई लोगों और कथित सॉल्वरों को मौके से गिरफ्तार कर लिया गया। जांच में यह भी सामने आया कि वाराणसी के दो परीक्षा केंद्रों पर बैठे अभ्यर्थियों को लाइव तरीके से उत्तर बताए जा रहे थे।
वाराणसी के दो परीक्षा केंद्रों से दो अभ्यर्थी पकड़े गए
एसटीएफ की दूसरी टीम ने वाराणसी में कार्रवाई करते हुए मैदागिन स्थित हरिश्चंद्र बालिका इंटर कॉलेज और लल्लापुरा स्थित एंग्लो मुस्लिम स्कूल में परीक्षा दे रहे दो अभ्यर्थियों को इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के साथ हिरासत में लिया। पूछताछ और तकनीकी जांच के बाद दोनों की गिरफ्तारी की गई।
पांच-पांच लाख रुपये लेकर कराया जा रहा था चयन
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि गिरोह प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल कराने का झांसा देकर अभ्यर्थियों से मोटी रकम वसूलता था। प्रत्येक अभ्यर्थी से करीब पांच लाख रुपये लिए जाते थे। इसके बदले परीक्षा के दौरान माइक्रो इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के जरिए प्रश्नों के उत्तर उपलब्ध कराए जाते थे।
जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह अपने रिश्तेदारों, परिचितों और अन्य माध्यमों से प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों तक पहुंच बनाता था। उन्हें चयन की गारंटी का भरोसा दिलाकर सौदा तय किया जाता था और बाद में पूरी नकल की व्यवस्था की जाती थी।
पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा
इस पूरे मामले में वाराणसी के सिगरा और कोतवाली थाना सहित संबंधित स्थानों पर आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। एसटीएफ अब यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह ने पहले किन-किन प्रतियोगी परीक्षाओं में इसी तरह का नेटवर्क चलाया था और इसमें कितने अभ्यर्थी शामिल रहे हैं।
गिरफ्तार किए गए आरोपी
गिरफ्तार आरोपियों में कप्तान सिंह पटेल, ओम प्रकाश पटेल, राकेश पटेल, रविकांत वर्मा उर्फ अखिलेश, धर्मेंद्र कुमार सिंह, लालता प्रसाद, अनुज कुमार पाल, शिव प्रकाश पटेल, मनोज कुमार, विपिन कुमार वर्मा (अभ्यर्थी), धर्मेंद्र कुमार (अभ्यर्थी), चंदर तथा दीपक पटेल शामिल हैं। सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है और जांच एजेंसियां गिरोह के अन्य संभावित सदस्यों की तलाश कर रही हैं।
