(रणभेरी): उत्तर प्रदेश सरकार को शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने गाय को “राज्यमाता” का दर्जा देने और बीफ निर्यात पर तत्काल रोक लगाने की मांग को लेकर 40 दिनों का स्पष्ट अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने कहा कि यदि 10 मार्च तक सरकार ने ठोस निर्णय नहीं लिया, तो 11 मार्च को लखनऊ में देशभर के संत समाज के साथ कड़ा विरोध दर्ज कराया जाएगा।
शंकराचार्य ने कहा कि हाल ही में प्रदेश सरकार के पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों ने उनसे शंकराचार्य होने के प्रमाण मांगे थे, जिसे उपलब्ध करा दिया गया है। अब बारी सरकार की है कि वह अपने कथनों और दावों को सिद्ध करे। उन्होंने दो टूक कहा कि 40 दिनों की समयसीमा पूरी होने के बाद संत समाज स्वयं लखनऊ पहुंचकर अपना रुख स्पष्ट करेगा।
बीफ निर्यात को लेकर तीखी टिप्पणी करते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि देश से होने वाले कुल बीफ निर्यात का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा उत्तर प्रदेश से जुड़ा है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि देश में पशुओं की कुल संख्या में भैंसों की हिस्सेदारी लगभग 75 प्रतिशत है, जबकि अन्य राज्यों में गायों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक है। इसके बावजूद उत्तर प्रदेश से बड़े पैमाने पर निर्यात होना गंभीर सवाल खड़े करता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता के मोह में सरकार पाप कर्म कर रही है और सनातनी हिंदुओं पर बल प्रयोग किया जा रहा है। शंकराचार्य ने कहा कि यह सब तत्काल बंद होना चाहिए और बीफ निर्यात पर बिना देरी रोक लगाई जाए।
प्रशासन पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि माफी मांगने की भी एक मर्यादा होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें प्रतीकात्मक सम्मान देने के प्रस्ताव दिए गए, जिन्हें उन्होंने अस्वीकार कर दिया। उनका कहना था कि सम्मान दिखावे से नहीं, बल्कि निर्णयों से होता है।
शंकराचार्य के इस बयान के बाद प्रदेश की सियासत और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। अब निगाहें सरकार के अगले कदम और 10 मार्च की समयसीमा पर टिकी हैं।
