संस्कृत भाषा, भारतीय ज्ञान परंपरा और शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान पर केंद्र सरकार ने किया सम्मानित
वाराणसी (रणभेरी): भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृत भाषा एवं शास्त्रीय शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विख्यात संस्कृतविद् एवं शिक्षाविद् प्रो. वेमपट्टी कुटुम्ब शास्त्री को भारत सरकार द्वारा वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित “पद्मश्री” सम्मान से सम्मानित किए जाने की घोषणा की गई है। इस सम्मान के बाद संस्कृत शिक्षा जगत में हर्ष और गौरव का वातावरण है।
प्रो. शास्त्री लंबे समय से संस्कृत भाषा, भारतीय दर्शन, वेद-वाङ्मय तथा प्राचीन ज्ञान परंपरा के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए सक्रिय रहे हैं। उन्होंने न केवल देश में बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी संस्कृत की प्रतिष्ठा को नई ऊँचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके अकादमिक नेतृत्व और शोधपरक कार्यों को संस्कृत जगत में विशेष सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है।
शैक्षिक एवं प्रशासनिक क्षेत्र में भी प्रो. शास्त्री का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। वे संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति रह चुके हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय तथा सोमनाथ संस्कृत विश्वविद्यालय में भी कुलपति के रूप में अपनी सेवाएं दी हैं। उनके कार्यकाल के दौरान संस्कृत शिक्षा के आधुनिकीकरण, शोध गतिविधियों के विस्तार तथा भारतीय परंपरागत ज्ञान को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण पहल की गईं।
प्रो. शास्त्री के सम्मानित होने पर प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि संपूर्ण संस्कृत समाज, भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा का गौरव है। उन्होंने कहा कि प्रो. शास्त्री जैसे विद्वानों का जीवन और कार्य नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति तथा संस्कृत अध्ययन की ओर प्रेरित करेगा।
कुलपति प्रो. शर्मा ने आगे कहा कि वर्तमान समय में भारतीय ज्ञान परंपरा को विश्व पटल पर स्थापित करने की आवश्यकता है और प्रो. वेमपट्टी कुटुम्ब शास्त्री ने इस दिशा में जो योगदान दिया है, वह आने वाले समय में भी प्रेरणास्रोत बना रहेगा। उन्होंने इसे संस्कृत शिक्षा जगत के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि इस सम्मान से देशभर के संस्कृत अध्येताओं और शोधकर्ताओं का उत्साह बढ़ेगा।
संस्कृत विद्वानों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने भी प्रो. शास्त्री को पद्मश्री सम्मान मिलने पर खुशी व्यक्त की है। विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों और सांस्कृतिक संगठनों द्वारा उन्हें बधाई संदेश भेजे जा रहे हैं। संस्कृत जगत का मानना है कि यह सम्मान भारतीय संस्कृति और परंपरा की वैश्विक स्वीकार्यता का प्रतीक है।
