नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, विरोध प्रदर्शन जश्न में बदला
वाराणसी (रणभेरी)। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा जारी किए गए नवीनतम शिक्षा एवं प्रवेश संबंधी नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमल्या बागची की पीठ ने बीएचयू के शोधार्थी डॉ. मृत्युंजय तिवारी की याचिका पर केंद्र और यूजीसी को नोटिस जारी करते हुए इन नियमों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि नियमों में प्रयुक्त शब्द अस्पष्ट हैं और उनके दुरुपयोग की आशंका है।

अगली सुनवाई 19 अप्रैल को होगी। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद पिछले तीन दिनों से यूजीसी के नए रेगुलेशन्स के खिलाफ चल रहे व्यापक विरोध प्रदर्शनों का स्वरूप अचानक बदल गया। वाराणसी में विरोध कर रहे छात्रों और नागरिकों ने रंग–गुलाल उड़ाकर एक–दूसरे को बधाई दी और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के लिए आभार व्यक्त किया। काशी विद्यापीठ, यूपी कॉलेज और बीएचयू सहित शहर के कई महाविद्यालयों के 500 से अधिक छात्रों ने न केवल खुशी मनाई, बल्कि केंद्र और यूजीसी के सामने अपनी आवाज बुलंद रखने की प्रतिबद्धता भी जताई।

डॉ. मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि नए नियमों में सवर्ण समाज को प्रथम दृष्टया अपराधी मान लिया गया है, जो संविधान के समानता के अधिकार का उल्लंघन है। इसी आधार पर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। याचिका के बाद न्यायालय ने न केवल रोक लगाई बल्कि विस्तृत समीक्षा के लिए केंद्र एवं यूजीसी को नोटिस जारी कर 19 अप्रैल को सुनवाई निर्धारित की है। तीन दिनों से जारी विरोध के दौरान कई जिलों में प्रदर्शनकारी कफन पहनकर, मुंडन कराकर तथा केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए सड़कों पर उतरे थे। वाराणसी के डीएम ऑफिस के बाहर भी प्रदर्शनकारियों ने करणी सेना का पोस्टर लहराया और यूजीसी के निर्णय के खिलाफ तीखे शब्दों में अपना रोष जताया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब विरोध–प्रदर्शन के स्वर में परिवर्तन दिखा, जहां कई छात्रों ने इसे संविधान एवं शिक्षा में समानता की लड़ाई की बड़ी जीत बताया।
