वाराणसी ( रणभेरी): भीषण गर्मी से जूझ रहे देश के बीच धर्म नगरी वाराणसी से आस्था की एक अनूठी तस्वीर सामने आई है। यहां स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर में हर साल की तरह इस बार भी परंपरागत “जलधारी” व्यवस्था शुरू कर दी गई है, जिसके तहत भगवान शिव का गंगाजल से निरंतर अभिषेक किया जा रहा है।
मंदिर के पुजारी श्रीकांत के अनुसार, अक्षय तृतीया के साथ ही गर्मी का असर तेज हो जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए गर्भगृह में विशेष जलधारी लगाई जाती है। इस व्यवस्था के माध्यम से गंगा जल की लगातार धारा बाबा विश्वनाथ पर प्रवाहित होती रहती है, जिससे उनका अभिषेक होता है।
बताया गया कि यह प्रक्रिया मध्यान भोग आरती के बाद शुरू होती है और दोपहर भर जारी रहती है। यह परंपरा वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया से शुरू होकर सावन पूर्णिमा तक चलती है।
मंदिर के अर्चकों का कहना है कि यह परंपरा कोई नई नहीं, बल्कि सैकड़ों वर्षों से चली आ रही है। माना जाता है कि करीब 300 सालों से बाबा पर इसी तरह जलधारी के माध्यम से अभिषेक किया जाता रहा है। पुजारी श्रीकांत बताते हैं कि भगवान शिव को ‘कैलाशपति’ कहा जाता है, जिन पर मौसम का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। बावजूद इसके, काशी के भक्त अपने आराध्य के प्रति प्रेम और समर्पण दिखाने के लिए मौसम के अनुसार विशेष व्यवस्थाएं करते हैं। यह परंपरा भक्त और भगवान के बीच गहरे भावनात्मक संबंध को दर्शाती है।
