(रणभेरी): लखनऊ में शुक्रवार देर रात महिला आरक्षण से जुड़े विधेयक को लोकसभा में पारित न किए जाने के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया। अपर्णा यादव के नेतृत्व में विधानसभा के सामने समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान सपा और कांग्रेस के झंडे जलाकर नारेबाजी की गई।
अपर्णा यादव ने प्रदर्शन के दौरान तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जिस दिन जश्न मनाने की तैयारी थी, वही रात निराशा में बदल गई। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह महिलाओं को आगे बढ़ते देखने के पक्ष में नहीं है और केवल परिवारवाद की राजनीति करता है। उन्होंने यह भी कहा कि यह विरोध महिलाओं के अधिकारों के समर्थन में है और आगे भी जारी रहेगा।
उन्होंने प्रधानमंत्री के प्रयासों का जिक्र करते हुए कहा कि महिला सशक्तिकरण से जुड़े इस विधेयक को पारित कराने की पूरी कोशिश की गई, लेकिन परिणाम उम्मीद के अनुरूप नहीं रहा। उनके अनुसार, यह घटनाक्रम निराशाजनक है और इससे महिलाओं की उम्मीदों को झटका लगा है।
सपा कार्यालय के बाहर भी प्रदर्शन
रात करीब 10 बजे समाजवादी पार्टी के कार्यालय के बाहर भी महिलाओं ने विरोध जताया। प्रदर्शनकारियों ने अखिलेश यादव और राहुल गांधी के खिलाफ नारे लगाए। उनका कहना था कि विधेयक पास न होने से महिलाओं की आकांक्षाओं को ठेस पहुंची है। इस बीच, अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर टिप्पणी करते हुए तंज कसा कि प्रदर्शन में पर्याप्त संख्या में महिलाएं नहीं थीं।
दो-तिहाई बहुमत नहीं जुटा सका विधेयक
जानकारी के अनुसार, महिला आरक्षण से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल सका। लोकसभा में लंबी चर्चा के बाद हुई वोटिंग में कुल 528 सांसदों ने भाग लिया, जिसमें 298 मत समर्थन में और 230 विरोध में पड़े। हालांकि, यह आंकड़ा बिल को पारित कराने के लिए पर्याप्त नहीं था। प्रस्तावित विधेयक में संसद की कुल सीटों को बढ़ाने का भी प्रावधान शामिल था। अब इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।
