स्कूल में बच्ची को दो बार मच्छर ने काटा, प्रोफेसर ने डीएम से की शिकायत

स्कूल में बच्ची को दो बार मच्छर ने काटा, प्रोफेसर ने डीएम से की शिकायत

(रणभेरी): मुरादाबाद के कांठ रोड स्थित शिरडी साईं पब्लिक स्कूल में एलकेजी में पढ़ने वाली छह वर्षीय बच्ची को स्कूल परिसर में मच्छर काटने का मामला सामने आया है। बच्ची के पिता और एमिटी यूनिवर्सिटी नोएडा में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सोनू सिंह ने स्कूल की साफ-सफाई और मच्छर नियंत्रण व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पैंसिया से शिकायत की है। उन्होंने 19 अगस्त को डीएम को ई-मेल भेजकर पूरे मामले की जानकारी दी और स्कूल की जवाबदेही तय करने की मांग की।

प्रोफेसर का कहना है कि बच्चों को स्कूल भेजते समय अभिभावक यह भरोसा करते हैं कि वहां उन्हें सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण मिलेगा। यदि स्कूल परिसर में मच्छरों की समस्या बनी हुई है और शिकायत के बाद भी प्रभावी कदम नहीं उठाए जाते, तो किसी बच्चे के बीमार पड़ने की स्थिति में इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी, यह सवाल स्कूल प्रबंधन से पूछा जाना चाहिए।

पहली शिकायत के बाद भी नहीं हुआ असर

डॉ. सोनू सिंह के मुताबिक, उनकी बेटी को पहली बार स्कूल में मच्छर ने काटा था। बच्ची के घर लौटने पर जब उन्हें इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने स्कूल डायरी के माध्यम से विद्यालय प्रशासन को मामले से अवगत कराया। उनका आरोप है कि शिकायत के बावजूद मच्छरों की समस्या दूर करने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए।

कुछ समय बाद बच्ची को दोबारा मच्छर ने काट लिया। लगातार दूसरी बार ऐसी स्थिति सामने आने के बाद अभिभावक ने स्कूल प्रबंधन से शिकायत करने के साथ ही मामले को जिला प्रशासन के संज्ञान में पहुंचाने का निर्णय लिया।

‘पूरी फीस लेते हैं तो सुरक्षा की जिम्मेदारी भी हो’

प्रोफेसर ने अपनी शिकायत में कहा कि अभिभावक बच्चों की पढ़ाई के लिए स्कूल को फीस देते हैं और इसी भरोसे के साथ अपने बच्चों को घंटों विद्यालय परिसर में छोड़ते हैं। ऐसे में स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी है कि परिसर में साफ-सफाई की उचित व्यवस्था हो और मच्छर जैसे संक्रमण फैलाने वाले कीड़ों से बचाव के लिए नियमित इंतजाम किए जाएं।

उनका कहना है कि मामला सिर्फ उनकी बेटी तक सीमित नहीं है। यदि स्कूल परिसर में मच्छरों की समस्या है तो वहां पढ़ने वाले अन्य बच्चे भी प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए प्रशासन को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए स्कूल की व्यवस्था की जांच करनी चाहिए।

न्यूरोसाइकोलॉजी और न्यूरोसाइंस में कर चुके हैं रिसर्च

डॉ. सोनू सिंह ने बताया कि वह करीब आठ वर्षों तक अमेरिका में न्यूरोसाइकोलॉजी और न्यूरोसाइंस के क्षेत्र में शोध कर चुके हैं। इसी वजह से उनका कहना है कि मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों और उनसे जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों को वह अच्छी तरह समझते हैं।

उनका सवाल है कि यदि किसी बच्चे को स्कूल में मच्छर काटता है और बाद में उसे मच्छर जनित बीमारी हो जाती है, तो ऐसी स्थिति में जिम्मेदारी किसकी होगी। उन्होंने प्रशासन से स्कूल की जवाबदेही तय करने और बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित कराने की मांग की है।

डीएम ने सभी स्कूलों में साफ-सफाई के निर्देश दिए

मामले की शिकायत सामने आने के बाद जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पैंसिया ने जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) को आवश्यक निर्देश दिए हैं। डीएम ने संबंधित विद्यालय के साथ जिले के अन्य स्कूलों में भी साफ-सफाई की व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने को कहा है।

प्रशासन का जोर इस बात पर है कि स्कूल परिसरों में गंदगी, जलभराव और मच्छरों के पनपने की संभावित जगहों को खत्म किया जाए, ताकि बच्चों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

स्कूल में फॉगिंग कराने के निर्देश

जिला विद्यालय निरीक्षक ऋतु तोमर ने बताया कि प्रोफेसर की शिकायत का संज्ञान लिया गया है। संबंधित निजी स्कूल को परिसर में फॉगिंग कराने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही स्कूल प्रबंधन को साफ-सफाई व्यवस्था बेहतर रखने के लिए भी कहा गया है। डीआईओएस के अनुसार, यदि स्कूल प्रशासन अधिकारियों के निर्देशों का पालन नहीं करता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

अभिभावकों की चिंता भी बढ़ी

स्कूल में पढ़ने वाले छोटे बच्चों के अभिभावकों के लिए यह मामला चिंता का विषय बन गया है। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों को स्कूल भेजते समय सुरक्षा और स्वच्छता सबसे महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में स्कूलों में नियमित सफाई, जलभराव की रोकथाम और मच्छर नियंत्रण जैसी व्यवस्थाएं लगातार होनी चाहिए।

फिलहाल प्रशासन की ओर से स्कूल में फॉगिंग कराने के निर्देश दिए गए हैं। अब देखना होगा कि विद्यालय प्रबंधन इन निर्देशों को कितनी गंभीरता से लागू करता है और परिसर में मच्छरों की समस्या को रोकने के लिए क्या स्थायी कदम उठाए जाते हैं।

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