धनबल के सामने संदिग्ध हुई पूर्ण बोरा की ईमानदारी

धनबल के सामने संदिग्ध हुई पूर्ण बोरा की ईमानदारी

जब रणभेरी में छपी भ्रष्टाचार की ख़बर तब जारी हुआ 50 लाख जमा करने का फरमान

  • रथयात्रा की अवैध इमारत पर सवाल, नियम सबके लिए या रसूख वालों के लिए अलग कानून ?
  • खबर छपते ही जागा वीडीए, रातों-रात मानचित्र स्वीकृति की चर्चा ने बढ़ाई शंका
  • पहले निर्माण, फिर अनुमति…क्या बैकडेटिंग से वैधता देने की हो रही कोशिश ?
  • 55 लाख जमा कर ‘वैधता’ का खेल ! गरीबों पर बुलडोजर तो अमीर के लिए विशेष राहत योजना क्यों ?

वाराणसी (रणभेरी): वाराणसी में रथ यात्रा चौराहे के समीप खुलने वाले कथित रूप से पूर्वांचल के सबसे बड़े ज्वेलरी शोरूम की अवैध इमारत ने सीधे तौर पर वाराणसी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा की छवि पर सवाल खड़ा कर दिया है। अब तक जिनकी पहचान एक ईमानदार अधिकारी के रूप में बनाई गई, उसी अधिकारी के कार्यकाल में एक विशाल अवैध निर्माण बिना रोकटोक खड़ा हो जाना कई सवाल पैदा करता है।

सवाल सीधा है कि यदि नियम सबके लिए समान हैं तो एक धनाढ्य व्यापारी के मामले में विभागीय चुप्पी क्यों रही।
सवाल यह भी है कि यह चुप्पी किसी भारी भरकम दबाव का परिणाम है या किसी भारी भरकम उपहार का प्रभाव है।

रणभेरी की खबर पर बौखलाया वीडीए प्रशासन

बीती शाम रथयात्रा क्षेत्र के आलीशान व अवैध निर्माण की खबर जैसे ही रणभेरी ने प्रमुखता से प्रकाशित किया। वैसे ही मामला सार्वजनिक हुआ और भ्रष्टाचार की आगोश में आकंठ डूबे वाराणसी विकास प्राधिकरण प्रशासन में हलचल मच गई।
अक्सर जब तक मामला दबा रहता है तब तक सब कुछ सामान्य दिखता है, लेकिन जैसे ही मीडिया सवाल उठाता है, अचानक फाइलें खुलने लगती हैं। यह बौखलाहट दरअसल उस डर को दर्शाती है कि अब जवाब देना पड़ेगा। और फिर जिन भ्रष्ट अधिकारियों ने रथ यात्रा क्षेत्र के इस अवैध निर्माण को खुला संरक्षण देने का कृत्य किया था उन्हीं भ्रष्ट अधिकारियों ने अपना काला चेहरा छुपाने के लिए कागजी मामले को सेट करने में पूरी ताकत लगा दी।

खबर छपते ही शुरू हुई मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया

रथयात्रा क्षेत्र के चर्चित अवैध इमारत के संदर्भ में एक ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आया है जिसे जानकर आप हैरत में पड़ जाएंगे। वाराणसी विकास प्राधिकरण जहां एक तरफ गरीबों या मिडिल क्लास फैमिली के अवैध निर्माण पर सीलिंग की कार्रवाई और तोड़ फोड़ मचाने में माहिर है वहीं सूत्र बता रहे है कि इस आलीशान अवैध निर्माण को बचाने के लिए प्राधिकरण ने पूरी ताकत लगा दी और सवालों से बचने के लिए आनन फानन में सुविधा शुल्क के दम पर दस्तावेजों को दुरुस्त करने में जुटे हुए है।

सूत्र बता रहे हैं कि रथयात्रा मामले में रातों-रात मानचित्र स्वीकृत की प्रक्रिया भी आगे बढ़ गई। लेकिन सवाल फिर उठता है कि यदि निर्माण वैध की श्रेणी में शामिल होने योग्य था तो मानचित्र स्वीकृति पहले क्यों नहीं कराई गई थी। और यदि यह निर्माण अवैध था, तो खबर छपने के बाद उसे वैध बनाने की जल्दबाजी क्यों।

यह स्थिति यह दर्शाती है कि भ्रष्ट अफसरों ने पहले चांदी की जूती चाटकर नियमों को नजरअंदाज किया और अब सवालों के घेरे में खुद को फंसता हुआ पाकर कागजों में वैधता देने की कोशिश में जुट गए। यानी पहले निर्माण फिर अनुमति, जो पूरी तरह प्रक्रिया के उलट है।

धनबल के सामने संदिग्ध हुई पूर्ण बोरा की ईमानदारी

भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने के लिए शुरू हुआ दस्तावेज दुरुस्तीकरण का खेल

रथयात्रा क्षेत्र में खड़ी की गई आलीशान अवैध इमारत के मामले में अब यह तो स्पष्ट होता दिखाई दे रहा है कि वाराणसी के विकास प्राधिकरण अफसरो ने पूरे तरीके से भ्रष्टाचार के दम पर इस अवैध इमारत का निर्माण होने दिया और जब सवालों के घेरे में फंसे तो धनाढ्य सर्राफा व्यवसाय राजू अग्रवाल की इमारत को बचाने के लिए सारे नियम कानून की धज्जियां उड़ाते हुए उनके पक्ष में कलम चलाना शुरु कर दिया।

सूत्र यह भी बता रहे है कि इस अवैध इमारत को बचाने के लिए अब रिकॉर्ड को बैक डेट में बदलकर ठीक किया जा रहा है ताकि भविष्य में जांच होने पर सब कुछ सही दिखाई दे। दस्तावेज दुरुस्तीकरण का अर्थ यहां सिर्फ तकनीकी सुधार नहीं बल्कि संभावित रूप से तारीखों में बदलाव फाइल मूवमेंट को सही दिखाना अनुमतियों को पीछे की तारीख में जोड़ना इत्यादि किया जा रहा है जो अपने आप में अपराधिक कृत्य है। हालांकि इस तरह का खेल अक्सर बड़े मामलों को बचाने के लिए किया जाता है।

सरकारी मद में जमा कराया जाएगा अब 55 लाख रुपया

जब कोई निर्माण अवैध होता है और बाद में उसे नियमित करने की कोशिश होती है, तो एक तय राशि सरकार के खाते में जमा कराई जाती है। लेकिन यहां सवाल यह है क्या यह राशि जुर्माना है या वैधता खरीदने की कीमत यदि पहले ही नियमों का पालन कराया जाता तो यह स्थिति आती ही नहीं। अब यह भुगतान कहीं न कहीं इस बात का संकेत देता है कि गलती पहले हुई और अब उसे पैसों के जरिए ढकने की कोशिश की जा रही है। इस प्रकरण में पहले नियमों को दरकिनार कर निर्माण हुआ, फिर मीडिया ने सवाल उठाया इसके बाद वीडीए सक्रिय हुआ और अब कागजों में वैधता देने की प्रक्रिया शुरू हुई।

और अंत में आर्थिक समायोजन के जरिए मामले को शांत करने की कोशिश हो रही है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि कानून का पालन पहले होना चाहिए या बाद में ? और यदि पैसे देकर हर अवैध काम को वैध बनाया जा सकता है तो फिर गरीब और मध्यम वर्ग पर कार्रवाई का कहर क्यों ? यही वह सवाल है जो इस पूरी कहानी का केंद्र है और जिसका जवाब अब भी बाकी है। लेकिन इस पूरे प्रकरण ने आज वाराणसी विकास प्राधिकरण के सर्वाधिक ईमानदार कहे जाने वाले वीसी पूर्ण बोरा की ईमानदारी को कटघरे में लाकर खड़ा कर दिया।

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