वाराणसी में कानून बिका, सिस्टम झुका—धनबल के आगे नतमस्तक हुआ प्रशासन!

वाराणसी में कानून बिका, सिस्टम झुका—धनबल के आगे नतमस्तक हुआ प्रशासन!

जिस शहर के चप्पे चप्पे पर गरीबों से लेकर मिडिल क्लास के लोगों को वाराणसी विकास प्राधिकरण के भ्रष्ट अधिकारियों द्वारा छोटे-छोटे निर्माण के मामलों में भी प्रताड़ित किया जाता है नोटिस देकर के अवैध तरीके से धन वसूला जाता है मेहनत की कमाई से एक दो कमरे का निर्माण करने वाले लोगों की इमारत को सील कर दिया जाता है रोजी-रोटी के लिए जद्दोजहद करने वाले छोटे दुकानदारों अतिक्रमण अभियान के नाम पर निशाना बनाया जाता है और फिर अवैध रूप से वसूली का अभियान चलाया जाता है इस शहर में वाराणसी विकास प्राधिकरण में दोयम दर्जे का कानून लागू करके भ्रष्टाचार के मामले में एक बुलंद परचम लहराने का काम कर दिया। गरीबों एवं मध्यम वर्गीय लोगों से अकड़ कर तानाशाही तरीके से बात करने वाले वाराणसी विकास प्राधिकरण के अफसर ने राजू अग्रवाल की जूती पर अपना नाक रगड़ते हुए इस आलीशान इमारत की चौखट पर अपना ईमान गिरवी रख दिया ना कोई नोटिस ना कोई कार्रवाई धड़ले से बेधड़क विगत दो वर्षों से सीना तानकर राज्यों अग्रवाल ने अवैध इमारत का निर्माण कर दिया और अब सोशल मीडिया और मीडिया के जरिए इस बात का प्रचार किया जा रहा है कि पूर्वांचल की धरती पर पूर्वांचल का सबसे बड़ा ज्वेलरी शोरूम बनकर तैयार हो गया जिसका उद्घाटन करने बागेश्वर धाम सरकार धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री अक्षय तृतीया के दिन 19 अप्रैल को वाराणसी पधार रहे हैं इमारत दुल्हन की तरह सच कर तैयार हो रही है शहर में छपे छपे पर बोर्ड बैनर होर्डिंग लगाकर बागेश्वर धाम सरकार के अभिनंदन की व्यवस्था की जा रही है।

वाराणसी में कानून बिका, सिस्टम झुका—धनबल के आगे नतमस्तक हुआ प्रशासन!

वाराणसी (रणभेरी): प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में अगर कानून इस तरह खुलेआम नीलाम होने लगे, तो यह सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम के चरित्र का खुला पोस्टमार्टम है। रथयात्रा क्षेत्र में सर्राफा कारोबारी राजू अग्रवाल द्वारा खड़ी की गई पूर्वांचल की सबसे बड़ी ज्वेलरी शोरूम की यह आलीशान इमारत आज भ्रष्टाचार की जीती-जागती तस्वीर बनकर खड़ी है और उसके सामने वाराणसी विकास प्राधिकरण का पूरा तंत्र घुटनों के बल दिखाई दे रहा है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शासनकाल में प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के इस धनाढ्य व्यक्ति ने अनोखा इतिहास रच दिया। राजू अग्रवाल के नाम से कुख्यात वाराणसी के सर्राफा कारोबारी ने शासन सत्ता से लेकर जिला प्रशासन तक को अपने धन बल के आगे घुटनों पर लाकर खड़ा कर दिया।

वाराणसी के रथयात्रा क्षेत्र में कथित रूप से पूर्वांचल का सबसे बड़ा ज्वेलरी शोरूम बनाकर राजू अग्रवाल ने एक अलग इतिहास रच दिया, यहाँ इतिहास शब्द का प्रयोग इसलिए किया जा रहा है कि इस इमारत की नींव में न केवल सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नारों को दफन कर दिया गया बल्कि वाराणसी विकास प्राधिकरण के नीचे से लेकर ऊपर तक सभी अफसर ने अपना ईमान भी गिरवी रख दिया।

इस अवैध निर्माण के जरिये एक तरफ जहां भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस का दावा करने वाले योगी सरकार के राज्य में भ्रष्टाचार की जिंदा मिसाल प्रस्तुत करती हुई यह इमारत सीना तान कर खड़ी है वहीं दूसरी तरफ नियम और कानून का पाठ शहर वासियों को पढ़ाने वाले विकास प्राधिकरण के वीसी पूर्ण बोरा की मौन सहमति ने इस इमारत की चमक धमक में चार चांद लगाने का काम कर दिया।

यह वही शहर है जहां एक गरीब अगर अपने घर में एक कमरा भी बढ़ा दे, तो नोटिस, सीलिंग और बुलडोजर की कार्रवाई उसके सिर पर टूट पड़ती है। यह वही शहर है जहां आये दिन मिडिल लोगों के छोटे-मोटे निर्माण पर नियमों का हवाला देकर सीलिंग का ताला जड़ दिया जाता है, यह वही शहर है जहां गरीब दुकानदारों की रोजी-रोटी पर अतिक्रमण का हवाला देकर उजाड़ दिया जाता है और प्रताड़ित करने के बाद उनसे वसूली की जाती है, और फिर कानून का डंडा दिखाकर उन्हें झुकने पर मजबूर किया जाता है। लेकिन इसी शहर में, ठीक उसी कानून को जूते की नोक पर रखकर, एक धनाढ्य कारोबारी दो वर्षों से खुलेआम एक भव्य अवैध इमारत खड़ी करता है और पूरा सिस्टम मूकदर्शक बना रहता है।

अब सवाल इस बात का है कि क्या धन पशुओं के लिए अलग कानून बना दिया गया है। जनता कह रही है कि यदि शहर के धनाढ्य व्यक्तियों के लिए अलग कानून है तो फिर मिडिल क्लास एवं गरीबों पर सितम क्यों? अगर शहर के मशहूर इलाके में आलीशान भव्य इमारत को अवैध निर्माण के लिए खुली छूट दे दी गई तो क्यों ना मिडिल क्लास और गरीबों के साथ वाराणसी विकास प्राधिकरण के लूट की योजना पर विराम लगना चाहिए ? क्यों नहीं पूरे शहर वासियों को अब निर्माण की खुली छूट दे देनी चाहिए ? क्यों नहीं उन भवनों का सील खोल देना चाहिए जिन भवनों को विकास प्राधिकरण ने नियमों का हवाला देते हुए सील कर दिया था! सवाल हर तरफ है जवाब देने वाला कोई नहीं है लेकिन सवाल तो जिंदा रहेंगे ही! वाराणसी के रथ यात्रा क्षेत्र में एक शातिर धनाढ्य व्यक्ति राजू अग्रवाल के इस अवैध निर्माण के भव्य उद्घाटन की तैयारी उत्तर प्रदेश की सरकार और वाराणसी विकास प्राधिकरण के अफसर दोनों को सवालों के घेरे में खड़ा करता है ? जहाँ भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस का दावा फेल होता दिखाई दे रहा है वीडिए के नियमों की धज्जियां भी उड़ रही हैं, और अगर कानून किसी धनपशु के चौखट पर तलवे चाटते हुआ दिख रहा है तो फिर सवाल तो होंगे ही।

सूत्र बताते हैं कि इस भवन के निर्माण के आड़ में राजू अग्रवाल ने लगभग दो करोड रुपए की राजस्व की क्षति उत्तर प्रदेश सरकार को पहुंचाने का काम किया है। विकास प्राधिकरण के एक जोनल अफसर की माने तो प्राधिकरण के पूर्व वीसी को राजू अग्रवाल ने भारी भरकम रत्न जड़ित उपहार भेंट किया था जिसके साथ ही इस निर्माण को नियम और कानून से अलग रखकर खुली छूट दी गई थी, अब सवाल इस बात का है कि वर्तमान वीसी पूर्ण वोरा ने आखिर किस दबाव में या किस प्रभाव में आकर के इस अवैध निर्माण को नियम और कानून के हवाले से बाहर छोड़ा हुआ है।

हालांकि कहा जाता है कि वाराणसी विकास प्राधिकरण केबीसी पूर्ण बोरा एक निहायत ईमानदार अफसर हैं लेकिन यदि भ्रष्टाचार की इस आलीशान अवैध इमारत का उद्घाटन धूमधाम से होने जा रहा है तो इस निहायत ईमानदार अफसर की ईमानदारी पर सवाल तो उठेंगे ही ?

सूत्र यह भी बताते हैं कि राजू अग्रवाल ने जब भारी भरकम काला धन देकर इस प्रोपर्टी को क्रय किया था तभी उसके बाद इनके यहाँ इनकम टैक्स एवं ईडी के अफसरों ने छापेमारी भी की थी हालांकि बताया जाता है कि कई दिनों तक चली जांच पड़ताल के बाद एक बड़ी डील के साथ इस कहानी का भी पटाक्षेप हो गया था। चुकी राजू अग्रवाल को लटक झटक के साथ सिस्टम को सेट करने का महारथी बताया जाता है।

जीरो टॉलरेंस के दावे की कब्र

यह इमारत सिर्फ ईंट और सीमेंट का ढांचा नहीं है यह उस जीरो टॉलरेंस के दावे की कब्र है, जिसे उत्तर प्रदेश की सरकार बार-बार दोहराती रही है। सवाल सीधा है क्या यह वही शासन है जहां भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की बात होती है, या यह वही व्यवस्था है जहां पैसा कानून को खरीद लेता है?

वाराणसी विकास प्राधिकरण, जो आम जनता के लिए कानून का पहरेदार बना फिरता है, इस मामले में क्यों चुप है? वीसी पूर्ण वोरा की ईमानदारी के किस तराजू में इस इमारत को तोला गया है? क्या कानून अब सिर्फ गरीबों और मध्यम वर्ग के लिए बचा है? क्या इस शहर में दो कानून लागू हैं एक कमजोरों के लिए और दूसरा रसूखदारों के लिए?

बागेश्वर धाम सरकार लहरायेंगे भ्रष्टाचार का परचम

स्थिति इतनी बेशर्म हो चुकी है कि इस कथित अवैध इमारत का उद्घाटन भी पूरे तामझाम के साथ करने की तैयारी है। अक्षय तृतीया के दिन 19 अप्रैल को बागेश्वर धाम सरकार धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के हाथों इसका उद्घाटन प्रस्तावित है। शहर भर में पोस्टर, बैनर और होर्डिंग लग रहे हैं।

जानिए कौन है घुँघरू बांधकर मुज़रा को बेताब ?

सूत्र बताते हैं कि इस निर्माण के जरिए लगभग दो करोड़ रुपये के राजस्व की क्षति राज्य सरकार को पहुंचाई गई है। यह भी चर्चा है कि पूर्व वीसी स्तर पर इस निर्माण को “विशेष संरक्षण” मिला, और अब सवाल यह है कि वर्तमान जिम्मेदार अधिकारी किस दबाव या प्रभाव में इस पूरे मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं। बताया जा रहा है कि दुल्हन की तरह सजाई जा रही नारायण दास की इस कोठी में वीडीए अफसर भी अपने पैरों में घुँघरू बांधकर मुज़रा करने के लिए बेताब है।

जनता पूछ रही है…

  • अगर कानून अमीरों के लिए अलग है, तो गरीबों पर अत्याचार क्यों?
  • अगर यह इमारत वैध है, तो बाकी शहर के सील किए गए मकान अवैध क्यों?
  • अगर यह खेल ऐसे ही चलता रहा, तो फिर क्यों न पूरे शहर को खुली छूट दे दी जाए?
  • यह मामला अब सिर्फ एक इमारत का नहीं रहा – यह वाराणसी की आत्मा पर लगा दाग बन चुका है।

सवाल जो ज़िंदा रहेंगे

  • क्या वीडीए की कार्रवाई सिर्फ गरीबों के लिए है?
  • क्या रसूखदारों के लिए अलग कानून लागू है?
  • 2 करोड़ के राजस्व नुकसान का जिम्मेदार कौन?
  • किसके संरक्षण में खड़ी हुई यह इमारत?
  • क्या “जीरो टॉलरेंस” सिर्फ एक नारा है?

जनता पूछ रही है

जनता अब पूछ रही है अगर राजू अग्रवाल के लिए कानून अलग है, तो फिर गरीबों पर अत्याचार क्यों? अगर शहर के बीचों-बीच इतनी बड़ी अवैध इमारत को खुली छूट दी जा सकती है, तो फिर मिडिल क्लास और गरीबों के घरों को क्यों सील किया जाता है? क्यों उनसे वसूली की जाती है? क्यों उनके सपनों पर बुलडोजर चलाया जाता है?

यह सवाल सिर्फ एक इमारत का नहीं है यह सवाल पूरे सिस्टम की नीयत का है। वाराणसी आज देख रहा है कि कैसे एक धनपशु के सामने पूरा प्रशासन झुक गया है। कैसे नियम-कानून उसके दरवाजे पर जाकर दम तोड़ रहे हैं। कैसे ईमानदारी के दावे हवा में उड़ रहे हैं। और जब कानून इस तरह बिकने लगे, तो यह सिर्फ अन्याय नहीं होता यह व्यवस्था के पतन की घोषणा होती है।

कानून की हार, भ्रष्टाचार की जीत

अब भी वक्त है या तो इस अवैध निर्माण पर कानून की कार्रवाई हो, या फिर खुलकर घोषित कर दिया जाए कि इस शहर में कानून सिर्फ गरीबों के लिए है। क्योंकि अगर ऐसा नहीं हुआ, तो यह इमारत सिर्फ एक शोरूम नहीं रहेगी यह आने वाले समय में उस दिन की गवाही बनेगी, जब वाराणसी में कानून हार गया था और भ्रष्टाचार जीत गया था।

कानून बिका… सिस्टम झुका… वाराणसी में धनबल का खुला राज!

रथयात्रा में खड़ी अवैध इमारत बनी ‘भ्रष्टाचार की कोठी’, वीडीए खामोश-सरकार के दावे ध्वस्त
दो साल तक धड़ल्ले से बना पूर्वांचल का सबसे बड़ा ज्वेलरी शोरूम- ना नोटिस, ना कार्रवाई- गरीबों पर बुलडोजर, अमीरों पर मेहरबानी- अक्षय तृतीया पर होगा भव्य उद्घाटन, कानून बना तमाशबीन

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