काव्य-रचना

काव्य-रचना

   एक चाय की प्याली   

एक चाय की प्याली,
मां..... तेरे हाथों वाली,
जिसमें पानी सी पारदर्शिता,
 चाय पत्ती से गहरे राज ...
चीनी सी मन की मिठास..
 अदरक सा कड़कपन...
 और दूध सी निर्मलता का मिश्रण लिए,
 तुम्हारी बहकी बातें... समझने का एक बहाना है ,
सचमुच बड़ा रहस्यमई यह चाय का अफसाना है ।
इस भाव भरी चाय को जब हम मिलकर पीते हैं....
एक मां की ....एक मां से.. 
जुड़ी सभी भावनाओं को ,
 उसी पल में हम जी लेते हैं।
माफ करना...मां... समय के अभाव में , 
तुमसे कम मिल पाता हूं ।
 प्यार तो बहुत है मगर ....
तुम्हें कम जता पाता हूं,
तुम्हें कम बता पाता हूं।


विवेक पाण्डेय