ऑस्ट्रेलिया से पिता का तर्पण करने के लिए काशी आए मैथ्यू, गंगा घाट पर किया पिंडदान

ऑस्ट्रेलिया से पिता का तर्पण करने के लिए काशी आए मैथ्यू, गंगा घाट पर किया पिंडदान

वाराणसी (रणभेरी): काशी को मोक्ष की नगरी माना जाता है और ऐसा माना जाता है कि यहां मरने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है, इसलिए देश-विदेश से लोग यहां आते हैं। पुरखों को नमन और तर्पण करने का काम काशी की इस धरती पर किया जाता है। आस्ट्रेलिया नागरिक मैथ्यू  बुधवार को गंगा घाट पर तर्पण किया और कहा अब हर साल बनारस आकर अपने पिता का श्राद्ध कर्म करेंगे। 

मैथ्यू ऑस्ट्रेलिया से काशी आए पिता का पिंडदान गंगा घाट पर करने के लिए उन्होंने गंगा स्नान किया। पिंड बनाए। फिर तर्पण किया।करीब 1.30 घंटे तक चले पूजन के दौरान मैथ्यू ने अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। उन्होंने कहा- ये मेरे पिता की आखिरी इच्छा थी। जिसे पूरा करने के लिए अब मैं भारत आया हूं।

मैथ्यू अपने बातचीत में बताया कि उनके पिताजी एक हिंदू थे। और उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में ही शादी की थी उन्होंने बताया कि मेरी माता क्रिश्चियन थी मेरे पिता ने मेरी माता से कहा था कि जब उनका निधन होगा तो उन्हें दफन न करके अग्नि से जलाया जायेगा। लेकिन मेरी माता ने ऐसा नहीं किया उसे समय मैं बहुत छोटा था अब जब हमने सनातन के बारे में जाना उसके बारे में बेहद करीब से जानकारी हासिल की तो मैं अपने पिता के तर्पण के लिए काशी आया हूं। 

ऑस्ट्रेलिया से वाराणसी मैथ्यू ने बताया कि उन्हें सनातन धर्म से प्रेम हो गया है उन्होंने यह भी बताया कि बहुत से लोगों ने सनातन धर्म को अपनाया है मेरी भी इच्छा है उन्होंने बताया कि मेरे देश में बहुत से ऐसे लोग हैं जो भारत के संस्कृति से प्रेम करते हैं। वह इन दोनों काशी में है उनके गाइड ने बताया कि अब तक उन्होंने काशी के सभी प्रमुख मंदिरों में दर्शन पूजन किया है और अगले एक सप्ताह तक वह काशी में भ्रमण करेंगे। 

वाराणसी (रणभेरी): काशी को मोक्ष की नगरी माना जाता है और ऐसा माना जाता है कि यहां मरने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है, इसलिए देश-विदेश से लोग यहां आते हैं। पुरखों को नमन और तर्पण करने का काम काशी की इस धरती पर किया जाता है। आस्ट्रेलिया नागरिक मैथ्यू  बुधवार को गंगा घाट पर तर्पण किया और कहा अब हर साल बनारस आकर अपने पिता का श्राद्ध कर्म करेंगे। 

मैथ्यू ऑस्ट्रेलिया से काशी आए पिता का पिंडदान गंगा घाट पर करने के लिए उन्होंने गंगा स्नान किया। पिंड बनाए। फिर तर्पण किया।करीब 1.30 घंटे तक चले पूजन के दौरान मैथ्यू ने अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। उन्होंने कहा- ये मेरे पिता की आखिरी इच्छा थी। जिसे पूरा करने के लिए अब मैं भारत आया हूं।

मैथ्यू अपने बातचीत में बताया कि उनके पिताजी एक हिंदू थे। और उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में ही शादी की थी उन्होंने बताया कि मेरी माता क्रिश्चियन थी मेरे पिता ने मेरी माता से कहा था कि जब उनका निधन होगा तो उन्हें दफन न करके अग्नि से जलाया जायेगा। लेकिन मेरी माता ने ऐसा नहीं किया उसे समय मैं बहुत छोटा था अब जब हमने सनातन के बारे में जाना उसके बारे में बेहद करीब से जानकारी हासिल की तो मैं अपने पिता के तर्पण के लिए काशी आया हूं। 

ऑस्ट्रेलिया से वाराणसी मैथ्यू ने बताया कि उन्हें सनातन धर्म से प्रेम हो गया है उन्होंने यह भी बताया कि बहुत से लोगों ने सनातन धर्म को अपनाया है मेरी भी इच्छा है उन्होंने बताया कि मेरे देश में बहुत से ऐसे लोग हैं जो भारत के संस्कृति से प्रेम करते हैं। वह इन दोनों काशी में है उनके गाइड ने बताया कि अब तक उन्होंने काशी के सभी प्रमुख मंदिरों में दर्शन पूजन किया है और अगले एक सप्ताह तक वह काशी में भ्रमण करेंगे।