(रणभेरी): संसद परिसर में मंगलवार को उस समय राजनीतिक माहौल और गरमा गया जब उत्तर प्रदेश से सांसद चंद्रशेखर आजाद लगातार दूसरे दिन भी विरोध-प्रदर्शन पर डटे रहे। वह संसद भवन परिसर में स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के निकट धरने पर बैठे रहे। सोमवार देर रात से शुरू हुआ उनका धरना मंगलवार सुबह बारिश के बावजूद जारी रहा। तेज बारिश होने पर भी उन्होंने अपना स्थान नहीं छोड़ा और छाते के सहारे वहीं बैठे रहकर विरोध दर्ज कराया।
चंद्रशेखर आजाद ने यह धरना हाल ही में प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में शुरू किया है। उनका आरोप है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों के साथ जिस तरह बल प्रयोग किया गया, वह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि युवाओं और छात्रों की आवाज सुनने के बजाय उन पर बल प्रयोग करना किसी भी लोकतांत्रिक सरकार के लिए उचित नहीं माना जा सकता।
धरने के दौरान उन्होंने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक भावनात्मक संदेश भी साझा किया। उन्होंने लिखा कि जब अत्याचार अपनी सीमा पार करने लगता है, तभी परिवर्तन की शुरुआत होती है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान बच्चों और छात्राओं के साथ जो व्यवहार किया गया, उसने उन्हें भीतर तक व्यथित कर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने जलियांवाला बाग जैसी ऐतिहासिक घटना को प्रत्यक्ष नहीं देखा, लेकिन हाल की घटनाओं ने उन्हें उस दौर की याद अवश्य दिला दी। उनका कहना था कि लोकतंत्र में जनता की आवाज को दबाने के बजाय सम्मान दिया जाना चाहिए।
धरने के दौरान उन्होंने प्रसिद्ध कवि दुष्यंत कुमार की पंक्तियां भी साझा करते हुए अपने आंदोलन को बदलाव की लड़ाई बताया। उन्होंने लिखा कि उनका उद्देश्य केवल विरोध दर्ज कराना नहीं, बल्कि व्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन लाना है। उन्होंने कहा कि समाज में जमा पीड़ा अब समाप्त होनी चाहिए और ऐसी स्थिति बननी चाहिए जिससे आम लोगों को न्याय और राहत मिल सके।
उधर, संसद परिसर के बाहर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद अखिलेश यादव ने भी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि छात्रों और युवाओं के प्रदर्शन को बलपूर्वक दबाने की कोशिश की गई। उनके अनुसार प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया गया और आंसू गैस के गोले छोड़े गए, जिससे कई छात्र घायल हुए। उन्होंने दावा किया कि चिकित्सकों के अनुसार कुछ छात्रों के सिर में गंभीर चोटें आई हैं। अखिलेश यादव ने सवाल उठाया कि यदि सरकार युवाओं के साथ ऐसा व्यवहार करेगी तो इससे उसकी छवि पर नकारात्मक असर पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए, न कि दमन का।
समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने भी इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि छात्रों और युवाओं की पीड़ा को नजरअंदाज किया जा रहा है। उनके अनुसार बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं परेशान हैं, लेकिन सरकार उनकी बात सुनने को तैयार नहीं दिख रही। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी स्तर पर जिम्मेदारी तय होती है तो संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मामलों में सरकार को अधिक संवेदनशील रवैया अपनाना चाहिए।
दिनभर चले इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच सांसद चंद्रशेखर आजाद संसद परिसर में अपने धरने पर डटे रहे। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका विरोध तब तक जारी रहेगा, जब तक छात्रों और युवाओं के साथ हुई कथित ज्यादती के मामले में जवाबदेही तय नहीं की जाती। उनके समर्थन में विभिन्न सामाजिक संगठनों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने भी अपनी प्रतिक्रियाएं दीं।
