साढ़े तीन साल पुराने महिला पहलवान यौन उत्पीड़न मामले में बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर बरी, अदालत ने कहा- आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं

साढ़े तीन साल पुराने महिला पहलवान यौन उत्पीड़न मामले में बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर बरी, अदालत ने कहा- आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं

(रणभेरी): भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह को महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सोमवार को अपना फैसला सुनाते हुए बृजभूषण शरण सिंह और भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर को सभी आरोपों से बरी कर दिया।

अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए साक्ष्य आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। सुनवाई के दौरान गवाहों के बयानों और शिकायतों में कई महत्वपूर्ण विरोधाभास सामने आए, जिनके कारण आरोपों की पुष्टि नहीं हो सकी। इसी आधार पर अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषमुक्त घोषित किया।

फैसले के बाद बृजभूषण शरण सिंह की प्रतिक्रिया

अदालत का फैसला आने के बाद बृजभूषण शरण सिंह ने संक्षिप्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने शुरुआत से ही खुद को निर्दोष बताया था और अब अदालत के फैसले ने उनके पक्ष को सही साबित कर दिया है।

वहीं, उनके अधिवक्ता ने कहा कि वे अदालत के विस्तृत आदेश की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि बचाव पक्ष का प्रारंभ से यही तर्क था कि शिकायतों और गवाहों के बयानों में कई प्रकार की विसंगतियां थीं, जिनका असर पूरे मुकदमे पर पड़ा। विस्तृत आदेश मिलने के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया पर विस्तार से प्रतिक्रिया दी जाएगी।

साढ़े तीन साल पुराने महिला पहलवान यौन उत्पीड़न मामले में बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर बरी, अदालत ने कहा- आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं

छह महिला पहलवानों ने लगाए थे गंभीर आरोप

यह मामला वर्ष 2023 में उस समय राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना था, जब छह महिला पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न, पीछा करने (स्टॉकिंग) और आपराधिक धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। इन आरोपों के बाद देश के कई नामी पहलवानों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर लंबा आंदोलन शुरू किया था।

प्रदर्शन में शामिल खिलाड़ियों ने निष्पक्ष जांच, एफआईआर दर्ज करने और बृजभूषण शरण सिंह को पद से हटाने की मांग की थी। यह आंदोलन कई महीनों तक चला और राष्ट्रीय राजनीति तथा खेल जगत में व्यापक चर्चा का विषय बना रहा।

साढ़े तीन साल पुराने महिला पहलवान यौन उत्पीड़न मामले में बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर बरी, अदालत ने कहा- आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं

करीब साढ़े तीन वर्षों तक चली न्यायिक प्रक्रिया

यह मामला जनवरी 2023 में पहलवानों के धरने से शुरू होकर अगस्त 2026 में अदालत के अंतिम निर्णय तक पहुंचा। इस दौरान पुलिस जांच, एफआईआर, चार्जशीट, अदालत में सुनवाई, गवाहों के बयान और अंतिम बहस सहित कई महत्वपूर्ण कानूनी चरण पूरे हुए।

जनवरी 2023: आंदोलन की शुरुआत

  • 18 जनवरी 2023 को देश के कई शीर्ष पहलवान जंतर-मंतर पर धरने पर बैठे। अगले दिन पूर्व पहलवान बबीता फोगाट ने प्रदर्शनकारियों से मुलाकात कर सरकार से बातचीत का भरोसा दिलाया। उसी दिन तत्कालीन केंद्रीय खेल मंत्री अनुराग ठाकुर के साथ भी पहलवानों की बैठक हुई।
  • 20 जनवरी को पहलवान विनेश फोगाट ने भारतीय ओलंपिक संघ, प्रधानमंत्री कार्यालय, खेल मंत्रालय और अन्य संबंधित अधिकारियों के समक्ष अपनी शिकायतें सार्वजनिक रूप से रखीं।
  • 21 जनवरी को सरकार से आश्वासन मिलने के बाद पहला धरना समाप्त कर दिया गया।

जांच समिति का गठन

23 जनवरी 2023 को खेल मंत्रालय ने आरोपों की जांच के लिए एक ओवरसाइट समिति गठित की। समिति ने कई पक्षों से बातचीत की और अप्रैल 2023 में अपनी रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों को सौंप दी। हालांकि, पहलवान जांच से संतुष्ट नहीं हुए और उन्होंने दोबारा कानूनी कार्रवाई की मांग शुरू कर दी।

दूसरी बार धरना और एफआईआर

  • 21 अप्रैल 2023 को छह महिला पहलवानों ने कनॉट प्लेस थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। इसके दो दिन बाद 23 अप्रैल से जंतर-मंतर पर दूसरा धरना शुरू हुआ।
  • 25 अप्रैल को पहलवानों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। अदालत में सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने की जानकारी दी।
  • 28 अप्रैल 2023 को छह महिला पहलवानों की शिकायत पर यौन उत्पीड़न संबंधी एफआईआर दर्ज की गई। वहीं, एक नाबालिग पहलवान की शिकायत के आधार पर पॉक्सो अधिनियम के तहत अलग मामला भी दर्ज हुआ।

सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही

एफआईआर दर्ज होने के बाद 4 मई 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने याचिका का निस्तारण कर दिया। अदालत ने माना कि शिकायत पर आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू हो चुकी है।

संसद मार्च और आंदोलन

  • 28 मई 2023 को नए संसद भवन की ओर मार्च के दौरान प्रदर्शनकारी पहलवानों को पुलिस ने हिरासत में लिया।
  • 30 मई को खिलाड़ी अपने पदक गंगा नदी में प्रवाहित करने हरिद्वार पहुंचे, लेकिन किसानों और सामाजिक संगठनों के आग्रह पर उन्होंने अपना निर्णय स्थगित कर दिया।
  • 3 जून को केंद्रीय गृह मंत्री से खिलाड़ियों की मुलाकात हुई। इसके बाद 7 जून को खेल मंत्री अनुराग ठाकुर के साथ बातचीत हुई और 15 जून तक आंदोलन स्थगित करने पर सहमति बनी।

पुलिस ने दाखिल की चार्जशीट

  • 15 जून 2023 को दिल्ली पुलिस ने बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर के खिलाफ चार्जशीट अदालत में पेश की।
  • इसी दिन नाबालिग पहलवान से जुड़े पॉक्सो मामले में पुलिस ने क्लोजर रिपोर्ट भी दाखिल की।
  • 7 जुलाई 2023 को अदालत ने चार्जशीट पर संज्ञान लिया और 20 जुलाई को दोनों आरोपियों को नियमित जमानत दे दी गई।

आरोप तय होने के बाद शुरू हुआ ट्रायल

  • 10 मई 2024 को अदालत ने उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर आरोप तय करने का आदेश दिया।
  • 21 मई 2024 को दोनों आरोपियों पर औपचारिक आरोप तय किए गए। हालांकि उन्होंने अदालत में स्वयं को निर्दोष बताते हुए मुकदमे का सामना करने का निर्णय लिया।
  • 26 जुलाई 2024 से अभियोजन पक्ष के गवाहों की गवाही शुरू हुई।

पॉक्सो मामले में क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार

26 मई 2025 को पटियाला हाउस कोर्ट ने नाबालिग पहलवान से जुड़े पॉक्सो मामले में दिल्ली पुलिस द्वारा दाखिल क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर ली।

32 गवाहों से हुई पूछताछ

मुख्य मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 32 गवाहों के बयान दर्ज कराए। वहीं, 9 गवाहों को बाद में सूची से हटा दिया गया। 25 मई 2026 को अभियोजन पक्ष के अंतिम गवाह की गवाही पूरी हुई। इसके बाद 8 जून 2026 को दोनों आरोपियों के बयान दर्ज किए गए और 9 जून से अंतिम बहस शुरू हुई, जो 2 जुलाई 2026 तक चली।

अदालत का अंतिम फैसला

सभी पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद 3 अगस्त 2026 को राउज एवेन्यू कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया।

अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को आवश्यक कानूनी मानक के अनुरूप सिद्ध नहीं कर सका। गवाहों के बयानों में पाए गए विरोधाभास और उपलब्ध साक्ष्यों की कमी के चलते संदेह से परे अपराध सिद्ध नहीं हो पाया। इसी आधार पर बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया।

मामले का महत्व

यह मामला भारतीय खेल जगत के सबसे चर्चित विवादों में शामिल रहा। एक ओर देश के कई प्रमुख पहलवान न्याय की मांग को लेकर लंबे समय तक आंदोलन करते रहे, वहीं दूसरी ओर अदालत में विस्तृत सुनवाई, गवाहों की गवाही और कानूनी बहस के बाद अंततः न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अपना निर्णय सुनाया। अदालत के इस फैसले के साथ इस बहुचर्चित मुकदमे का ट्रायल स्तर पर समापन हो गया। हालांकि विस्तृत न्यायिक आदेश जारी होने के बाद संबंधित पक्ष आगे की कानूनी संभावनाओं पर निर्णय ले सकते हैं।

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